526 करोड़ रुपए की राफेल जहाज मोदी जी के आते ही 1,670 करोड़ रुपए कैसे हो गई : शक्तिसिंह गोहिल

०० एआईसीसी सचिव एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी चंदन यादव, प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल, पूर्व सांसद करूणा शुक्ला विशेष रूप से उपस्थित थे

रायपुर। एआईसीसी के प्रवक्ता एवं बिहार प्रभारी शक्तिसिंह गोहिल ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस शासन में 526 करोड़ रुपए में जो राफेल जहाज खरीदा जा रहा था, उसकी 300 प्रतिशत कीमत बढ़कर मोदी जी के आते रातों-रात 1,670 करोड़ रुपए कैसे हो गई?  हमारे देश के जवान जान हथेली पर लेकर देश की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं। अब जो उनके लिए सामान, हथियार या जो कुछ खरीदारी होती है, उसमें घपले नहीं होने चाहिएं। जब हम पॉवर में थे, कांग्रेस पार्टी ने भ्रष्टाचार के आरोपियों को कभी बचाने की कोशिश नहीं की। बोफोर्स के नाम पर बीजेपी ने पूरे देश में मुहिम चलाई और डतण् ब्समंद जिन्हें जाना और माना जाता था, उनको भी बदनाम करने की कोशिश की। कहा करते थे कि सात दिन दे दो, सारे सबूत ला देंगे। सात दिन तो छोड़ो सात साल से ज्यादा वक्त वो पॉवर में रहे, बोफोर्स में कुछ नहीं मिला। पर कारगिल का युद्ध जीतने के बाद, उस युद्ध में भाग लेने वाले एक ऑफिसर ने अंग्रेजी न्यूज पेपर में एक आर्टिकल लिखा जिसमें उन्होंने बताया कि कारगिल हम बोफोर्स के कारण जीते। उस हाईट और ठंड में और कोई वेपन काम नहीं करता था, सिर्फ बोफोर्स ही काम आई और भारत की जीत हुई। बीजेपी के टेन्योर ( tenure ) के दौरान ही अपर ज्यूडिशरी ने कहा कि राजीव जी के खिलाफ एक छोटा सा भी एविडेंस नहीं है।

 

शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि डिफेंस खरीदारी में कुछ चीजें ऐसी हैं जिसको थोड़ा सा शेल्टर मिल जाता है। अक्सर कहा जाता है कि मोदी जी करोड़ों से कम खाते नहीं और ‘सेफ करप्शन’ में महारत है। ऐसा आपने कभी देखा नहीं होगा, आज तक के देश के इतिहास में एक ही सरकार, एक ही प्रधानमंत्री और चार साल में तीन रक्षा मंत्री। मोदी जी के टेन्योर में चार साल में तीन रक्षा मंत्री आ चुके हैं। अरुण जेटली जी आए, उन्होंने देखा कि मोदी जी मेरे कंधे पर गन रख रहे हैं, बच गए, निकल गए, मनोहर पर्रिकर जी आए, मौका ढूंढा, अपने राज्य में चले गए, अपने बलबूते पर सरकार बन सके, इसके हालत भी नहीं थे, फिर भी रक्षा मंत्रालय छोड़ा, चले गए गोवा के मुख्यमंत्री बनने। और अभी बड़ा राजनीतिक अनुभव नहीं है, निर्मला जी के कंधे पर गन नहीं, तोप रखकर मोदी जी राफेल का करप्शन करवाने जा रहे हैं। ग्रेंड मदर ऑफ ऑल दी करप्शन, वो राफेल डील है।  60,145 करोड़ रु. की राफेल डील ने साबित कर दिया कि ‘कल्चर ऑफ क्रोनी कैपिटलिज़्म’ यानि 3C’s मोदी सरकार का डीएनए बन गया है। ‘झूठ परोसना’ व ‘छल-कपट का चक्रव्यूह बुन’ देश को बरगलाना ही अब सबसे बड़े रक्षा सौदे में भाजपाई मूल मंत्र है। एक झूठ छिपाने के लिए सौ और झूठ बोले जा रहे हैं। वास्तविकता यह है कि 36 राफेल लड़ाकू जहाजों की एकतरफा खरीद से सीधे-सीधे ‘गहरी साजिश’, ‘धोखाधड़ी’ व ‘सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के षडयंत्र’ की बू आती है। अब साफ है कि राफेल जहाज बनाने वाली कंपनी, डसॉल्ट एविएशन ने 13 मार्च, 2014 को एक ‘वर्कशेयर समझौते’ के रूप में सरकारी कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से 36,000 करोड़ रु. के ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए। परंतु प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी का ‘क्रोनी कैपिटलिज़्म प्रेम’ तब जगजाहिर हो गया, जब 10 अप्रैल, 2015 को 36 राफेल लड़ाकू जहाजों के खरीद की मोदी जी द्वारा की गई एकतरफा घोषणा के फौरन बाद, सरकारी कंपनी, एचएएल को इस सबसे बड़े ‘डिफेंस ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट’ से दरकिनार कर दिया गया व इसे एक निज़ी क्षेत्र की कंपनी को दे दिया गया। प्रधानमंत्री व रक्षामंत्री इसका कारण क्यों नहीं बता रहे?  ‘डिफेंस ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट’ एक निजी कंपनी, रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को दे दिया गया, जिसे लड़ाकू जहाजों के निर्माण का शून्य भी अनुभव नहीं। रिलायंस डिफेंस लिमिटेड का गठन फ्रांस में 10 अप्रैल, 2015 को प्रधानमंत्री जी द्वारा 36 राफेल लड़ाकू जहाजों की खरीद की घोषणा किए जाने से 12 दिन पहले यानि 28 मार्च, 2015 को किया गया।  फ्रांस का ही जहाज है मिराज, फ्रांस में बने मिराज जहाज की कीमत जब देश के तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी जी संसद के पटल पर बता सकते हैं तो, मोदी जी और निर्मला जी इतना क्यों घबराते हैं, फ्रांस में बने दूसरे जहाज राफेल की कीमत पर चर्चा करने से ? जब सुखोई एयरक्राफ्ट की कीमत आदरणीय एंटनी जी संसद के पटल पर बता सकते हैं, जब एडमिरल गोर्शकोव जो हमारा एयरक्राप्ट कैरियर है, उसकी कीमत एंटनी जी सदन के पटल पर बता सकते हैं, जब रक्षा के सबसे बड़े मसौदे कावेरी इंजन प्रोजेक्ट की कीमत आदरणीय एंटनी जी सदन के पटल पर बता सकते हैं, तो मोदी जी और निर्मला जी किस बात से घबरा रहे हैं? क्या घबराहट केवल यही नहीं कि 300 प्रतिशत कीमत में इजाफा, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर खत्म और ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट जो 35 हजार करोड़ का है, वो एक पब्लिक सेक्टर डिफेंस अंडर टेकिंग से मिलकर बगैर किसी टेंडर के अपने एक मित्र की जेब में डाल देना, जिन्हें जीरो एक्सपीरियंस है, जैसा राहुल गाँधी जी ने कहा। क्या ये इस देश के साथ विश्वासघात नहीं? क्या प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री देश को झूठ पर झूठ बोलकर रंगे हाथों नहीं पकड़े जा रहे? क्या प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने इस देश को गुमराह नहीं किया? क्या प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गाँधी की बात से विचलित हो इतना झूठ बोल रहे हैं कि एक झूठ छुपाने के लिए 1,000 झूठ उन्हें और बोलने पड़ रहे हैं? क्या ये विशेषाधिकार का हनन नहीं? ये कुछ प्रश्न हैं, जो हम ने आज उठाए हैं। पत्रकारवार्ता में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी डॉ. चंदन यादव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, पूर्व सांसद करूणा शुक्ला, प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी, जिला अध्यक्षगण नरेन्द्र बोलर, विजय केशरवानी, प्रदेश प्रवक्तागण अभयनारायण राय, शैलेश पांडेय उपस्थित थे।

 

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