स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के पालको में आक्रोश, दुर्घटना के डर से कोई भी बच्चे नहीं पहुंचे स्कूल

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संजय बंजारे

करगीरोड कोटा।मौहारखार प्राथमिक शाला में पांचवी क्लास में पढ़ने वाली अपने घर में सबसे छोटी मां बाप की लाडली बेटी 10 वर्षीय छात्रा तुलसी यादव पिता मनोज यादव निवासी मौहारखार रानीसागर पंचायत की रक्षाबंधन के 1 दिन पहले जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई थी, स्कूल के पास रहने वाले स्थानीय निवासियों ने बताया कि स्कूल की शिक्षिका द्वारा बच्चों को स्कूल के बाहर पढ़ाया जा रहा था, उस दौरान यह घटना घटी, पढ़ाई में होशियार मासूम तुलसी सरकारी स्कूल की जर्जर हालत की वजह से मौत के भेंट चढ़ गई, अगर स्कूल भवन की हालात अच्छे होते तो शायद मासूम तुलसी आज हमारे बीच होती मासूम ,तुलसी के मौत के बाद बाकी पढ़ने वाले बच्चे बच्चियां को उनके पालकों ने स्कूल भेजना बंद कर दिया, पालको में भी काफी आक्रोश है ,स्कूल की जर्जर भवनों को देखकर दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए बच्चों के माता-पिता ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया  स्कूल में खाली दोनों शिक्षिका मौजूद थे, स्कूल के संकुल समन्वयक भी मौजूद थे ,बच्ची की मौत के बाद शिक्षा विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारी जागते हुए जर्जर भवन का निरीक्षण करने स्कूल पहुंचे ,एबीओ असगर खां द्वारा स्कूल का निरीक्षण किया गया जहां पर बच्ची को सांप ने काटा था, उस जगह को रिपेयरिंग करवाया गया जर्जर स्कूल भवनों की हालत देखकर एबीओ भी आश्चर्यचकित रह गए प्राथमिक शाला के भवन काफी छोटे होने, स्कूल के छतों से टपकते हुए पानी, स्कूल के छत के प्लास्टर नीचे गिरते हुए ,कुल मिलाकर स्कूल भवन की जर्जर स्थिति को देखकर ऐसा लगता है ,समय रहते अगर भवनों का सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

शिक्षा के अधिकार का कानून हो, या बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ, आओ स्कूल चले हम, जैसे स्लोगन स्कूल खुलते ही शिक्षा विभाग उसके प्रचार प्रसार में ही लगा रहता है, प्रचार प्रसार में लाखों रुपए फूंक दिए जाते हैं ,पर स्कूल भवनों की जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए विभाग के पास राशि नहीं है, बुनियादी सुविधाओं टॉयलेट पीने का साफ पानी के लिए राशि उपलब्ध नहीं करा पाता, शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है ,कि वर्तमान में नए भवनों की स्वीकृति नहीं हो रही है,और मेंटेनेंस के लिए उतनी राशि विभाग द्वारा दी नहीं जाती ,बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाने ,बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था कि जवाबदारी किसकी है, सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था किसकी जवाबदेही बनती है, मां बाप अगर अपने बच्चों को सरकारी स्कूल भेजते हैं, तो क्या उनकी सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे रहेगी, गरीब के बच्चों को क्या अच्छी शिक्षा पाने का अधिकार नहीं ,सुरक्षा व्यवस्था देना शासन और प्रशासन का कर्तव्य नहीं, प्राइवेट स्कूलों की बाढ़ में सरकारी स्कूलों की हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रही है ,एक तरफ शासन और विभाग प्राइवेट स्कूलों को महत्व देते हुए आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्कूल बंद होते जा रहे हैं ,बचे हुए सरकारी स्कूल की हालत काफी दयनीय है ,भवन जर्जर हो चुके हैं, स्कूलों में खेल का मैदान, स्कूलों में बाउंड्री वाल किचन शेड नहीं के बराबर है कोटा ब्लॉक के अधिकांश स्कूलों की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है। छत्तीसगढ़ शासन और शिक्षा विभाग को अपने पड़ोसी राज्य दिल्ली से सीखने की आवश्यकता है ,शिक्षा को लेकर पिछले 3 सालों में दिल्ली जैसे केंद्र शासित राज्य में सरकारी स्कूलों में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिले है, दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा सरकारी स्कूलों का स्तर सुधारने में काफी मेहनत और मशक्कत किया गया ,स्कूल के टीचरों को विदेश में ट्रेनिंग के लिए भेजा जा रहा है, दिल्ली के सरकारी स्कूलों की चर्चा इंटरनेशनल अखबारों की सुर्खियों में हैं, 29 राज्यों में बेस्ट शिक्षा मंत्री का खिताब पाने वाले दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा सरकारी स्कूलों में वह तमाम तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जो कि प्राइवेट स्कूलों में रहती हैं, सरकारी स्कूलों के स्तर सुधारने के साथ-साथ प्राइवेट स्कूलों पर भी नकेल कसी है ,प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस को लेकर भी दिल्ली की सरकार ने कड़े कदम उठाएं जिसका नतीजा देखने को मिला प्राइवेट स्कूलों ने बढ़ी हुई फीस पालको को वापस किया आज की तारीख में दिल्ली जैसे राज्य में सरकारी स्कूलों का स्तर काफी सुधरा है ,जो प्राइवेट स्कूलों से अपने नाम कटा कर अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भर्ती कर रहे हैं पिछले 15 साल से सत्ता में बैठी सरकार और शिक्षा विभाग के मंत्री और अधिकारी सरकारी स्कूलों को बंद करवाने में लगे हुए हैं, पूरे छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूलों ही तो जैसे बाढ़ आ चुकी है, जैसे-जैसे प्राइवेट स्कूल बढ़ते जा रहे हैं वैसे वैसे सरकारी स्कूलों का स्तर गिरता जा रहा है, एक प्रकार से छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यापार बन चुका है।

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