वन विभाग के अधिकारियों ने राष्ट्रीय शोक के दिन पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेई जी के सम्मान को किया नीलाम

०० ठेकेदारों की आड़ लेकर वनमंडलाधिकारी द्वारा कहना कि लोग आते जाते रहते हैं, बेशर्मी भरा बयान

०० सामान्य प्रशासन के आदेश की अवहेलना के साथ भारत रत्न के सम्मान को भी नीलाम किया वन विभाग के नीलामी अधिकारियों ने

संजय बंजारे

करगीरोड कोटा। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न प्रखर प्रवक्ता ओजस्वी कवि स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई के निधन पर जब सारा देश शोक मना रहा है ,राज्य शासन के मुखिया प्रशासनिक अधिकारी श्रद्धांजलि देने उनके निवास स्थान पहुंच रहे हैं, पूर्व प्रधानमंत्री के आकस्मिक निधन पर भारत सरकार के साथ राज्य सरकारें ने भी 7 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है, जिसके बाबत आज की तारीख में सभी शासकीय कार्यालय में अवकाश घोषित किया गया, शासकीय और प्रशासनिक कार्य आज की तारीख में नहीं होना था, इसके बिल्कुल विपरीत वन विभाग के कोटा वन मंडल के सेल डिपो काष्ठागार में लकड़ियों के लाट की नीलामी की जा रही थी, जिसकी नीलामी में स्वयं वनमंडलाधिकारी एसके पैकरा की उपस्थिति में लकड़ी के लाटो का नीलाम किया जा रहा था, साथ ही कोटा वन विभाग के परिक्षेत्र अधिकारी एसडीओ डी एन त्रिपाठी सेल डिपो प्रभारी बलराम तिवारी रेंजर अरूण घाटगे सहित वन विभाग के अन्य कर्मचारी की मौजूदगी में लकड़ियों की लाट की नीलामी की जा रही थी ,नीलामी के समय कोटा सहित आसपास क्षेत्र व दूरस्थ इलाकों से आए ठेकेदारों ने भी हिस्सा लिया।

बहरहाल देखने वाली बात यह थी, कि पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर छत्तीसगढ़ शासन के मुखिया डॉ रमन सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारी श्रद्धांजलि देने पूर्व प्रधानमंत्री के निवास स्थान पर गए हुए हैं, साथ ही सामान्य प्रशासन द्वारा आज की तारीख के लिए बकायदा विभागीय, संभागायुक्त, कलेक्टर के लिए आदेश निकाला गया था, कि आज की तारीख में राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है, जिसमें शासकीय कार्यालय बंद और प्रशासनिक कार्य की मनाही थी, उसके बावजूद भी वन विभाग के अधिकारियों द्वारा आज के दिन इस तरह का कृत्य पूर्व प्रधानमंत्री के अपमान की दासता लिखते हुए दिखाई पड़ रहा है, आज के दिन वन विभाग के अधिकारियों सामान्य प्रशासन  विभाग के द्वारा आदेश की  अवहेलना भी की गई उसके बाद मीडिया द्वारा सवाल पूछने पर व अपने उच्च अधिकारी से फोन पर बात करते हुए अपने उच्च अधिकारी को यह अवगत कराना कि ठेकेदारों द्वारा यह कहना कि लोग आते रहते हैं,जाते रहते हैं, एक उच्च पद पर बैठा अधिकारी भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री का इस तरह से अपमान बड़े ही बेशर्मी से सरेआम किया जा रहा था, नीलामी से लाखों रुपए के राजस्व प्राप्ति के लिए वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री के मान सम्मान को नीलाम कर दिया उसके बाद बड़े ही बेशर्मी से मीडिया के सामने आकर यह बयान देना कि हम तो शासन का कार्य कर रहे हैं ,शासन के राजस्व के लिए ही काम कर रहे हैं ,पूर्व प्रधानमंत्री व सम्माननीय भारत रत्न नेता स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जिनके लिए सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष और सारा देश उनके निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहा है, वहीं पर छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग के उच्च पदों पर आसीन अधिकारियों द्वारा बड़े ही बड़बोले ढंग से बड़ी बेशर्मी से पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान किया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों की बातों से ऐसा प्रतीत हुआ कि वन विभाग छत्तीसगढ़ राज्य शासन के अंतर्गत नहीं आता है, वन विभाग और उनके अधिकारियों द्वारा अंग्रेजों के कानून के हिसाब से विभाग को चलाया जा रहा है, जिम्मेदार अधिकारी सार्थक जवाब देने के बजाय निरर्थक बातें कर रहे थे, वनमंडलाधिकारी तो शासन का ऐसा कार्य कर रहे थे ,जैसा कि कार्य प्रधानमंत्री कार्यालय में नहीं होता है, मुख्यमंत्री कार्यालय में नहीं होता जब देश का प्रधानमंत्री अपने सारे कार्यक्रमों को रद्द करके प्रदेश का मुख्यमंत्री अपने सारे कार्यक्रमों को रद्द करके राष्ट्रीय शोक में शामिल हो रहा है, वहां पर वन विभाग के उच्च पद पर बैठे अधिकारियों का इस तरह का रवैया जैसे कि राष्ट्रीय शोक के दिन नीलाम करके इनको छत्तीसगढ़ शासन की तरफ से सम्मानित किया जाएगा ,महीने में एक या दो दिन दिखने वाले कोटा रेंज के अधिकारी एसडीओ हो या रेंजर जो कि मुख्यालय में कम रहते हैं, आज उनको कार्य करने की ऐसा जुनून छाया था कि उन्हें होश ही नहीं रहा कि आज राष्ट्रीय शोक है, लकड़ी के लाटो की नीलामी करते-करते पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी के मान सम्मान को ही नीलाम कर दिया। इस बारे में नीलामी में भाग लेने आए कोटा सहित दूरदराज से आए हुए टिंबर ठेकेदारों ने बताया कि हमें इसकी पूर्व की जानकारी प्राप्त नहीं थी, ना ही वन विभाग के अधिकारियों द्वारा सूचना दी गई थी, चूंकि आज नीलामी में पहुंचने पर हमें सूचना दी गई, और हमसे पूछा गया तो हम क्या करते हमें जानकारी थी कि आज राष्ट्रीय शोक है, पर अगर पूर्व में ही जानकारी मिल जाती तो हम ना आते हमें भी पूर्व प्रधानमंत्री जी के निधन पर काफी दुख हुआ है, पर समय रहते अगर जानकारी मिल जाती जो हम आज नीलामी में हिस्सा लेने नहीं आते आज के डिजिटल समय में व्हाट्सएप्प में जानकारी डालने से जानकारी मिल जाती है, पर हमें जानकारी नहीं थी इस वजह से हम नीलाम में शामिल हुए, वहीं पर इस पूरे घटनाक्रम के बाद एसडीओ डी एन त्रिपाठी, काष्ठागार अधिकारी बलराम तिवारी ,वन विभाग के ही रेंजर अरूण घाटगे, मीडिया से बचते नजर आए यहां तक की उनसे जब इस बारे में पूछा गया कि आपको आज के राष्ट्रीय अवकाश होने की जानकारी नहीं थी ,तो खामोश रहे साथ ही मीडिया ऑफिस में अंदर ना आ जाए अंदर से ही दरवाजे में सीटकनी लगा दी गई थी। आज के इस पूरे घटनाक्रम के बाद वन विभाग के उच्च पद पर आसीन अधिकारी इस पर क्या कार्रवाई करते हैं, यह तो आने वाला समय बताएगा बहरहाल वन विभाग के अधिकारियों द्वारा आज राष्ट्रीय शोक के दिन पूर्व प्रधानमंत्री के सम्मान को ठेस पहुंचाया है, वनमंडलाधिकारी का बेशर्मी भरा बयान से पूर्व प्रधानमंत्री के सम्मान में श्रद्धांजलि देने वालों को काफी ठेस पहुंचा है, वनमंडलाधिकारी और वन विभाग के अधिकारियों के इस तरह के बर्ताव से मीडिया और मीडिया के लोगों द्वारा भी निंदा की गई है।

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