नंद कुमार बघेल ब्राह्मण समाज को बांटने का ना करे प्रयास: नीलकण्ठ त्रिपाठी

रायपुर| राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ के राष्ट्रीय सचिव एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी नीलकण्ठ त्रिपाठी ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल के पिता पर ब्राह्मण को बांटने का आरोप लगाया है। त्रिपाठी ने बताया कि कुछ दिनों पहले राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बधेल के पिता द्वारा ब्राह्मण समाज के प्रति अनावश्यक बयान दिया गया, नंद कुमार बघेल निरंतर ब्राह्मण समाज का विरोध करते आ रहे है उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक ब्राह्मण के साथ है अल्पसंख्यक ब्राह्मण के नही।

सर्व प्रथम यह समझ नही आता कि छत्तीसगढ़ में ब्राह्मण समाज कब से बटा हुआ है यहाँ  सर्व समाज के ब्राह्मण प्रारम्भ से ही छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में अपना तन मन धन तीनो अर्पण किये है| यहाँ के ब्राह्मण समाज ने छत्तीसगढ़ के तमाम समाजो को साथ मे लेकर शुरू से ही उनको आगे बढ़ाने का प्रयास किया हैं। प्रदेश अध्यक्ष के पिता जी शायद यह भूल गए कि झीरम घाटी में शहीद होने वाले स्व विद्याचरण शुक्ला एक ब्राह्मण थे, उन्होंने कभी भी अल्पसंख्यक व बहुसंख्यक या अन्य समाज मे अंतर नही किया और छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा करते करते अपने प्राण की भी आहुति देदी। समाज के बारे में इतना विभत्स टिप्पणी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल के द्वारा आने के बाद भी भूपेश बघेल का इस संदर्भ में एक भी खंडन न आना यह भूपेश बघेल की मानसिकता को दर्शाता है कि कही न कही ब्राह्मण समाज के प्रति विरोध व्याप्त है यदि भूपेश बघेल को लगता है कि ब्राह्मण समाज के विरोध की मानसिकता को मौन समर्थन देकर वे सोचते है कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस की नैया को पार लगा देंगे उनकी सोच का ब्राह्मण समाज हर जगह विरोध करेगी। उनके और उनके पिताजी के द्वारा समाज से सार्वजनिक माफी नही मांगी गई। तो समाज का हर युवा, वरिष्ठ तमाम लोग कांग्रेस का विरोध करेंगे। राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ छत्तीसगढ़ के तमाम समाज से अपील करेगा कि छत्तीसगढ़ में समाज को बांटने वाले लोग जो कि कांग्रेस पार्टी में ही है ऐसे पार्टी में अपना वोट देकर छत्तीसगढ़ की मर्यादा को भंग न होने दे, इसीलिए छ ग कांग्रेस पार्टी के मुखिया भूपेश बघेल एवं उनके पिता नंदकुमार पटेल को सार्वजनिक रूप से समाज से माफी मांगनी होगी, साथ मे कांग्रेस पार्टी  को भी अपने विचार स्पष्ट करे कि वे ब्राह्मण के समर्थन में है कि विरोध में है।

 

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