संस्कृति के संरक्षण का केन्द्र बनेगा नया रायपुर का आदिवासी संग्रहालय-अनुसंधान संस्थान : डॉ. रमन सिंह

०० मुख्यमंत्री द्वारा दो सामाजिक भवनों के लिए 1.58 करोड़ की मंजूरी पर गोंडवाना समाज ने जताया आभार

रायपुर| मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि नया रायपुर में 26 करोड़ रूपए की लागत से तैयार हो रहा आदिवासी संग्रहालय और आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (टी.आर.आई.) जनजातीय संस्कृति के संवर्धन-संरक्षण और आदिवासी समाज के साथ सरकार के जीवंत सम्पर्क के केन्द्र के रूप में विकसित होगा। उन्होंने कहा कि इस केन्द्र में विभिन्न जनजातियों की भाषा, बोली और लुप्त हो रहे वाद्य यंत्रों के संरक्षण का काम होगा। यहां जनजातियों से जुड़े शोध कार्य किए जा सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह आज दोपहर यहां अपने निवास पर प्रदेश से सभी 27 जिलों से आए गोंडवाना समाज के प्रतिनिधि मंडल को संबोधित कर रहे थे।

    
आदिम जाति विकास एवं स्कूल शिक्षा मंत्री श्री केदार कश्यप, वन मंत्री श्री महेश गागड़ा, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री जी.आर. राणा और उपाध्यक्ष श्री विकास मरकाम सहित प्रदेश के 27 जिले से आए गोंडवाना समाज के पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे। प्रतिनिधि मंडल ने राजधानी रायपुर के टिकरापारा में गोंड़वाना समाज के भवन के लिए एक करोड़ रूपए और कोरबा जिले के पाली में सामुदायिक भवन के लिए 58 लाख रूपए की मंजूरी देने पर मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए उनके प्रति आभार प्रकट किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि नया रायपुर में आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (टी.आर.आई.) में नोडल अधिकारियों को नियुक्त किया जाएगा, जहां आदिवासी समाज के लोग अपनी संस्कृति के संरक्षण और प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विकास कार्यों के संबंध में अपने सुझाव दे सकेंगे। समाज से प्राप्त सुझावों के आधार पर आदिवासी बहुल क्षेत्रों के विकास की रूपरेखा तय की जाएगी। डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के निर्माण में आदिवासी समाज का भी महत्वपूर्ण योगदान है। समाज की एकजुटता ही समाज की ताकत होती है। शिक्षित समाज ही आगे बढ़ता है। समाज के सदस्य हर बेटे और हर बेटी को शिक्षित करें। शासकीय योजनाओं का सहयोग लेकर समाज को आर्थिक दृष्टि से मजबूत बनाने और मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन योजना की मदद से समाज के लोगों के कौशल विकास का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की नई पीढ़ी में चेतना जागृत हुई है। अब इस समाज के बच्चे शिक्षक बनने के साथ-साथ अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षाओं  में भी चुने जा रहे है। उन्होंने आज माना में आयोजित नव आरक्षकों की दीक्षांत परेड का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के बाद आरक्षक बने 546 युवाओं में 75 प्रतिशत युवा नक्सल प्रभावित राजनांदगांव और बस्तर क्षेत्र के हैं।मुख्यमंत्री ने समाज के लिए संचालित राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि बस्तर एवं दक्षिण आदिवासी क्षेत्र विकास प्राधिकरण और सरगुजा एवं उत्तर आदिवासी क्षेत्र विकास प्राधिकरण के माध्यम से इन दोनों प्राधिकरणों के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में लगभग 450 करोड़ रूपए की लागत के कार्य कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर और सरगुजा में तृतीय और चतुर्थ वर्ग के पदों में भर्ती में स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता दी जा रही है। बस्तर और सरगुजा का अलग केडर बनने से तृतीय और चतुर्थ वर्ग के पदों पर लगभग 6 हजार स्थानीय युवाओं की भर्ती हुई है। वन मंत्री श्री महेश गागड़ा ने कहा कि राज्य शासन द्वारा आदिवासी समाज के विकास के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाकर आदिवासी समाज समृद्ध समाज बन सकता है। आदिवासी विकास एवं स्कूल शिक्षा मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि आगामी 9 अगस्त को आदिवासी दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में समाज के अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिभावान लोगों को सम्मानित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री जी.आर राणा ने बताया कि मुख्यमंत्री की पहल पर 22 जनजाति समूहों के नामों की मात्रात्मक त्रुटियों के सुधार से अब जाति प्रमाण पत्र, स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र बनने में आसानी हुई है। इससे इन जनजाति समूहों की लगभग 58 लाख आबादी लाभान्वित हो रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में जनजातियों को संवैधानिक अधिकार देने का यह ऐतिहासिक फैसला हुआ है, जो समाज के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम का संचालन आयोग के उपाध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने किया। 

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