खेल से अनुशासन व जीत का मूल्य समझ मे आता है, हार और जीत जीवन का हैं एक हिस्सा : प्रकाश जायसवाल

०० सरस्वती शिशु मंदिर कोटा में जिला-स्तरीय खो-खो खेल के साथ प्रतियोगिता का हुआ समापन

करगीरोड कोटा। सरस्वती शिशु मंदिर कोटा में जिला स्तरीय खो-खो प्रतियोगिता का दो दिवसीय कार्यक्रम संपन्न के बाद आज कोटा नगर के सरस्वती शिशु मन्दिर में समापन हुआ, मुख्य अतिथि के रूप से शिवनारायण तिवारी व प्रकाश जायसवाल की अध्यक्षता में समापन हुआ,कार्यक्रम की शुरुवात में सर्वप्रथम दीप प्रज्वलित कर वंदन किया गया, कार्यक्रम की  अध्यक्षता कर रहे,प्रकाश जायसवाल ने कहा कि बिना संगठित हुए जीत असंभव  है,खेल से अनुशाशन व जीत का मूल्य समझ मे आता है,जितना व हारना जीवन का एक हिस्सा है ,खेल से ही खिलाड़ी भावना विकसित होती है।

सरस्वती शिशु मंदिर कोटा में जिला स्तरीय खो-खो प्रतियोगिता में  कुल 5 टीमों ने हिस्सा लिया, जिसमें लोरमी, सरगांव,सकरी,मुंगेली एवं कोटा की सरस्वती शिशु मंदिर  के टीमो ने भाग लिया, कुल मिलाकर 240 खिलाड़ीयो ने अपने कौशल का प्रदर्शन किया,खो-खो प्रतियोगिता 28 जुलाई को संपन्न होकर  29 जुलाई को समापन हुआ, विजेता टीम के रूप में  प्रथम पुरस्कार, मुंगेली को प्राप्त हुआ एवं कोटा को द्वितीय  स्थान प्राप्त हुआ। वरिष्ठ भाजपा नेता वेंकट अग्रवाल ने कहा कि प्रत्येक शालाओं में शिक्षा के साथ-साथ खेल का भी आयोजन होना निहायत जरूरी है, सरस्वती शिशु मंदिर के साथ-साथ अन्य स्कूलों को भी  खेल का आयोजन  करना चाहिए, खेलों से छात्र-छात्राओं के बौद्धिक व शारीरिक विकास भी तेजी से होता है, इसी कड़ी में खेल का आयोजन सरस्वती शिशु मंदिर द्वारा किया गया, कार्यक्रम के संपन्न और समापन में आए हुए अतिथियों का वेंकट अग्रवाल ने आभार प्रकट किया व स्कूलों से आए हुए छात्र-छात्राओं का भी उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के समापन में वक्तव्य देते हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रकाश जायसवाल ने कहा कि शिक्षा के साथ खेल के प्रति भी बच्चों की रुचि जरूरी है,खेल से मस्तिष्क का विकास होता है,खेलकूद से बच्चों में कौशल का विकास अन्य बच्चों की अपेक्षा तेजी से होता है, खिलाड़ी भावना आती है,जीतने और हारने का महत्व समझ मे आता है।सामाजिक कौशल का विकास होता है, टीमवर्क की भावना आती है,एवं शारीरिक विकास भी तेजी से होता है,खेल कूद के आयोजन से खिलाड़ी में प्रतियोगी भावना का उद्गम होता है,खिलाड़ी भावना का संचार होता है ,तथा प्रत्येक खिलाड़ी के मन में समय  के साथ बहने की क्षमता विकसित होती है, सहनशीलता के गुणों का विकास होता है,और जीत का मूल्य भी समझ में आता है। सरस्वती शिशु मंदिर द्वारा कराए गए खेल के आयोजन के कार्यक्रम में सरस्वती शिशु मंदिर के संयोजक वेंकट अग्रवाल , अध्यक्ष राकेश गुप्ता, व्यस्थापक अजय अग्रवाल,वासुदेव रेड्डी, रामसजीवन गुप्ता,अभिभावक गण,प्रधानाचार्य , समस्त आचार्य,आचार्या सारे विद्यार्थी की उपस्थिति रही।

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