मत्स्य पालन से किसानों के जीवन में आएगी खुशहाली : पटेल

०० इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर  

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर एवं मत्स्यिकी विकास बोर्ड, हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में सफर मछलियों का प्रजनक प्रबंधन एवं उन्नत बीज उत्पादन विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण आज हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि देवजी भाई पटेल, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. ए. एल. राठौड़, निदेशक विस्तार सेवायें, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने की। देवजी भाई पटेल ने कहा कि यदि किसान खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन भी करें तो उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है। राज्य शासन की ओर से मत्स्य पालक किसानों की बेहतरी के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं जिसके फलस्वरूप आज छत्तीसगढ़ मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। 
समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ. ए.एल. राठौर ने कहा कि इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण में मछलियों की सामान्य प्रजातियों के साथ-साथ रंगीन मछलियों के बीज उत्पादन तथा पालन के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई तथा व्यवाहरिक प्रशिक्षण दिया गया। अत: यह प्रशिक्षण मत्स्य पालक कृषकों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। मत्स्योद्योग विभाग के संयुक्त संचालक एस.के. त्रिपाठी ने भी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. आर.एल. शर्मा तथा प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. सौगात सासमल ने प्रशिक्षण के दौरान आयोजित गतिविधियों की जानकारी दी। प्रशिक्षणार्थियों ने प्रशिक्षण के अनुभव साझा करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी बताया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के 50 चयनित मत्स्य पालक कृषक शामिल हुए। 
प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को भारतीय मेजर कार्प और एक्ज़ोटिक कार्प की ब्रुड स्टॉक प्रबंधन एवं उनके प्रेरित प्रजनन पर विषय विशेषज्ञों की ओर से विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही साथ मत्स्य पालन कृषकों को कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर में स्थित मत्स्य फार्म में भारतीय मेजर कार्प की उन्नत बीज उत्पादन के विषय में मत्स्य वैज्ञानिकों की ओर से व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। उन्हें मत्स्य नर्सरी प्रबंधन के बारे में भी सैद्वान्तिक एवं व्यावहारिक जानकारी दी गयी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर, गरियाबंद, बस्तर, मछली पालन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन एवं मत्स्यकी महाविद्यालय, कवर्धा के वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी रही।

 

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