राष्ट्रपति ने देशवासियों से किया आव्हान, साल में एक-दो दिन आदिवासी भाई-बहनों के बीच बिताएं

रायपुर/जगदलपुर| राष्ट्रपति कोविन्द आज बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर के पास ग्राम डिमरापाल में स्वर्गीय श्री बलिराम कश्यप स्मृति मेडिकल कॉलेज के लिए लगभग 170 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित पांच सौ बिस्तरों वाले विशाल अस्पताल भवन का लोकार्पण करने के बाद जनसभा को सम्बोधित कर रहे थे। राष्ट्रपति ने जनसभा में देशवासियों का आव्हान किया कि वे साल में कम से कम एक या दो  दिन प्रकृति की गोद में रहने वाले आदिवासी भाई-बहनों के बीच बिताएं, उनके दुःख दर्द को समझें और उनके जीवन को बेहतर बनाने का भरसक प्रयास करें। ऐसा प्रयास करने वाले हमारे देशवासियों को आनंद और संतोष का अनुभव होगा। साथ ही उन्हें आदिवासी भाई-बहनों से, प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की उनकी कला को सीखने का अवसर मिलेगा।

श्री कोविन्द ने कहा कि देशवासी अगर ऐसा कर सकें, तो उन्हें आदिवासियों की जीवन शैली और प्रकृति के साथ जुड़कर जीवन जीने की उनकी कला को देखने और समझने का भी अवसर मिलेगा। राष्ट्रपति ने कहा – देश की आत्मा गांवों में बसती है। यदि हम देश की जड़ों से परिचित होना चाहते हैं, तो हमें गांवों को भी देखना होगा| कोविन्द ने जनसभा में प्रदेशवासियों को राष्ट्रपति भवन आने का भी न्यौता दिया। उन्होंने जनता से कहा- राष्ट्रपति भवन सिर्फ राष्ट्रपति का निवास या कार्यालय भर नहीं है, बल्कि वह  हमारे लोकतंत्र का प्रतीक और देश की धरोहर है। इसलिए राष्ट्रपति भवन पर प्रत्येक भारतीय नागरिक का अधिकार है। वह आप सबका भी भवन है।  उन्होंने कहा – मैं चाहूंगा कि आप नागरिक दिल्ली आएं तो राष्ट्रपति भवन भी जरूर पधारें।  

 छत्तीसगढ़ में महसूस होता है अपनापन :- कोविन्द ने कहा – छत्तीसगढ़ ने अपने आदिवासी भाई-बहनों के बीच आकर मुझे हमेशा एक खास तरह का अपनापन महसूस होता है। इसलिए जब आज यहां आने के लिए मुझे डॉ. रमन सिंह जी का आमंत्रण मिला तो उसे स्वीकार करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हुई। श्री कोविन्द ने कहा कि यह आमंत्रण स्वीकार करने के पीछे एक कारण और भी था। कल 25 जुलाई को मेरे राष्ट्रपति कार्यकाल का एक वर्ष पूरा हुआ। मैंने यह निर्णय लिया था कि उस दिन को दिल्ली से दूर, अपने आदिवासी भाई-बहनों और बच्चों के साथ बिताउंगा। इस तरह, बस्तर आने का आमंत्रण स्वीकार करके मुझे अपनी उस इच्छा को पूरा करने का सुअवसर मिला। कोविन्द ने कहा कि  बस्तर और आसपास के क्षेत्रों से मैं भलीभांति परिचित हूं। रामकृष्ण मिशन द्वारा नारायणपुर और अबूझमाड़ के दुर्गम आदिवासी इलाकों में काम करने का सेवाभाव मैंने स्वयं अपनी आंखों से देखा है। मई 2017 में , जब मैं बिहार का राज्यपाल था, तब मैं सरगुजा अंचल में आया था। राष्ट्रपति बनने के बाद पिछले वर्ष नवम्बर में मेरा छत्तीसगढ़ आना हुआ था। श्री कोविन्द ने विशाल जनसभा में कहा – ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में तथा छोटे शहरों में रहने वाले, अपेक्षाकृत पीछे रह गए देशवासियों के कल्याण के लिए देश में अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। सबके सिर पर छत हो, इसके लिए गरीब परिवारों को मकान देने और उसमें टायलेट तथा पीने के पानी और बिजली की सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। बच्चों के लिए नये-नये स्कूलों की स्थापना की जा रही है। आई.आई.टी और एम्स खोले जा रहे हैं। युवाओं को कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें कम ब्याज पर बिना गारंटी लोन देने की व्यवस्था की जा रही है। युवाओं को अपना रोजगार शुरू करने के लिए हर तरह की सहायता दी जा रही है। श्री कोविन्द ने कहा – दंतेवाड़ा के एजुकेशन सिटी में चल रहे युवा बीपीओ में बस्तर क्षेत्र के लगभग एक हजार युवा देश और विदेश की कम्पनियों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह एक बहुत बड़ा बदलाव है।

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