मासूम की मौत दरअसल हत्या है और इसका दोष मुख्यमंत्री के सर पर है : कांग्रेस

०० रमन सिंह के विकास का सच उजागर, अनुपयोगी हो चुके एंबुलेंस के रूप में चल रहे वाहन

०० मुख्यमंत्री स्वास्थ्यमंत्री से तत्काल इस्तीफ़ा और जनता से माफ़ी मांगें

रायपुर| प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओ ने कहा कि एंबुलेंस से अंबेडकर अस्पताल पहुंच चुके मासूम की मौत एक बेहद दुखद दुर्घटना है, इस मौत को दरअसल हत्या की तरह देखा जाना चाहिए और इसका दोष मुख्यमंत्री रमन सिंह के सिर पर है। इस मौत ने छत्तीसगढ़ सरकार के विकास के झूठे दावों की कलई खोल दी है। जिस राज्य में अस्पताल प्रांगण में पहुंचने के बाद भी एक बच्चे की मौत हो जाए उस राज्य में सरकार के निकम्मेपन पर लानत है। यह कैसा राज्य प्रशासन है जो एक एंबुलेंस में क़ैद हो गए बच्चे को ढाई घंटे में नहीं निकाल पाता।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि एक ओर थाइलैंड जैसा देश है जहां गुफ़ा में फंसे बच्चों को पूरा देश मिलकर निकाल लाता है और एक यह प्रदेश है जहां एक गाड़ी में फंसा बच्चा तड़प तड़प कर जान दे देता है। मुख्यमंत्री रमन सिंह का दिल न तो नसबंदी कांड में माताओं की मौत से पसीजता है, न बुज़ुर्गों की आंखों की रोशनी छीनने से, वे कंधे पर मरीज़ों को मीलों ले जाते लोगों को देखकर भी अनदेखा कर देते हैं, लेकिन एक मासूम की मौत तो उन्हें शर्मिंदा होना ही चाहिए। वे कब तक अपने नाकारा स्वास्थ्य मंत्री को बचाते रहेंगे? अब तो मुख्यमंत्री रमन सिंह को अपने स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर से इस्तीफ़ा े प्रदेश की जनता से माफ़ी मांगना चाहिये।  भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में चल रही 108 एंबुलेंस सेवाएं दरअसल केंद्र की यूपीए सरकार की देन थी लेकिन श्रेय लेने में माहिर रमन सिंह जी ने इसे अपनी उपलब्धि के रूप में पेश किया, अब जबकि केंद्र में भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार है इसलिए पूरी एंबुलेंस सेवा दम तोड़ रही है। दस्तावेज़ बताते हैं कि कई एंबुलेंस नाकारा हो चुकी हैं और उनको बदलने के स्थान पर चलाया जा रहा है, वे तयशुदा दूरी से ज़्यादा चल चुके हैं लेकिन उन्हें बदला नहीं जा रहा है। दूसरी ओर डीके सुपरस्पेश्यलिटी अस्पताल के नाम से महंगे उपकरणों से लैस आठ एंबुलेंस धूल खाते पड़े हैं। प्रदेश की जनता को विकास की ऐसी तस्वीर बार बार दिखती है लेकिन मुख्यमंत्री सड़कें और इमारतें दिखाकर विकास की ढफली बजाते घूमते हैं। ऐसी है प्रदेश की सरकार लानत,  ऐसा है प्रदेश का विकास। 108 एम्बुलेंस सेवाओं के कर्मचारियों के साथ वेतन भत्ते काम के घंटे को लेकर लगातार अन्याय हो रहा है। आवश्यक सेवायें घोषित करना उचित है, लेकिन यह दायित्व सेवा देने वाली कंपनी का है। कार्यवाही कंपनी पर होने चाहिये। कर्मचारियों पर कार्यवाही का हम विरोध करते है। 

 

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