जीरम मामले में भाजपा सरकार की नीति और नीयत में खोट : कांग्रेस

०० तीन महीने बाद कांग्रेस की सरकार बनेगी और जीरम मामले की जांच होगी

०० शपथ पत्र के साथ सबूत देने का सुझाव देना बंद करें मूणत जी

०० शपथ पत्र देने का इतना ही शौक है तो कथित सीडी बनवाने वालों के नामों की जानकारी सीबीआई को शपथ पत्र में दे देते

रायपुर। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील सोनी और लोक निर्माण मंत्री राजेश मूणत के बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि जीरम मामले में भाजपा की नीति और नीयत में खोट है। छत्तीसगढ़ में 25 मई की दुखद और दर्दनाक घटना पर शर्म महसूस करने के बजाय भाजपा के नेतागण आरोप-प्रत्यारोप की ओछी राजनीति करने पर दुख और पीड़ा व्यक्त करते हुये प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि रमन सिंह जी की सरकार ने 5 वर्षो से जीरम की साजिश की सही जांच होने ही नहीं दी। अब तीन महीनों बाद कांग्रेस की सरकार बनेगी और जीरम में 25 मई 2013 की घटना के पीछे के आपराधिक राजनैतिक षड़यंत्र की जांच भी होगी और जीरम के गुनाहगारों को सजा भी होगी।

शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि मूणत जी शपथ पत्र देकर जीरम की जानकारी जांच एजेंसी को देने का सुझाव देना अब बंद करे। अब कांग्रेस की सरकार बनेगी और कांग्रेस की सरकार जीरम की जांच करायेगी। मूणत जी शपथ पत्र के साथ सबूत देने का सुझाव देना बंद करें। मूणत जी शपथ पत्र देने का इतना ही शौक है तो कथित सीडी बनवाने वालों के नामों की जानकारी सीबीआई को शपथ पत्र में दे देते। विगत 15 वर्षो से छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार ने राजनैतिक स्वार्थ के चलते छत्तीसगढ़ में माओवाद को जम कर खाद पानी दिया है। केन्द्र से नक्सलवाद के नियंत्रण के लिये मिले पैसो और सुरक्षा बलो का भाजपा सरकार ने दुरूपयोग और अपव्यय ही किया है। राज्य की भाजपा सरकार की माओवाद के नियंत्रण की असफलता को छुपाने के लिये भाजपा बहाना ढूंढ रही है। माओवादी समस्या पर भाजपा की सरकारों की नीति और नीयत में खोट है। मोदी की सरकार बनने के बाद परिदृश्य बदल गया है। उत्तर प्रदेश में कोई भी ज़िला गहन नक्सली हिंसा से प्रभावित नहीं है और न ही पिछले चार वर्षों में वहां कोई गंभीर वारदात हुई है लेकिन वर्ष 2014 से 2018 के बीच उत्तर प्रदेश के नक्सली हिंसा से निपटने के लिए 349.21 करोड़ की राशि दी गई जबकि इसी अवधि में छत्तीसगढ़ को सिर्फ़ 53.71 करोड़ की राशि दी गई। जबकि छत्तीसगढ़ देश का सर्वाधिक नक्सल प्रभावित प्रदेश है और कई ज़िले गहन नक्सली गतिविधियों के लिए जाने जाते है। माओवाद के सतत फैलाव और उसकी आयोजना में रमन सिंह जी की सरकार की भूमिका स्पष्ट उजागर नक्सलवाद से निपटने के लिये मिलने वाली धनराशि से कवर्धा में आफिसर क्लब की आलीशान बिल्डिंग 2013 में बना दी गयी, जबकि कवर्धा माओवादी प्रभावित जिलों की सूची में 2017 में शामिल हुआ है। इसी एक घटना से माओवाद के सत्त फैलाव और उसकी आयोजना में रमन सिंह जी की सरकार की भूमिका स्पष्ट है। आदिवासी बच्चियों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिये छात्रावास और आश्रमों के लिये भरपूर धनराशि मिलने के बावजूद लेकिन छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार इन आश्रमों में भी बच्चियों को सुरक्षा तक नहीं दे पायी है। आश्रमों में मासूम बच्चियां दुष्कर्म का शिकार हुयी है। छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार में नक्सल वाद की समस्या के समाधान की इच्छा शक्ति ही नहीं हैं। पिछले 15 वर्ष से अधिक समय से छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार है। पिछले चार वर्षो से केन्द्र में भी भाजपा की सरकार है। इन्हीं 15 वर्षों में राज्य में माओवाद का न सिर्फ तेज गति से विकास हुआ है माओवाद सुदूर वन क्षेत्रों से निकलकर शहरी क्षेत्रों तक पैर पसार चुका है। पूरा छत्तीसगढ़ जानता है कि माओवाद को किसको सरंक्षण क्यों मिल रहा है तथा माओवाद के विस्तार से किस दल को सर्वाधिक फायदा पहुंचा है? 

 

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