कागजों में कर दिया विकास अब खोज रहे हैं कहां गया विकास

 

दिनेश जोल्हे (सारंगढ़) लाखों का विकास कार्य अगर कागज में हो जाये तो हमारे जेहन में यह विचार आता है कि यह कोई शासकीय कार्य ही होगा। दरसल सारंगढ अंचल में ऐसे पंचायतों की भरमार है, जहां विकास के नाम पर कागजों का खानापूर्ति कर भ्रष्टाचार का इतिहास रचा जाना कोई आम बात नही।सारंगढ विकासखण्ड क्षेत्र के ग्राम पंचायत हिर्री का जहां विकास के नाम पर लाखो का घोटाला किया गया है। ग्राम पंचायत हिर्री ऐसी पंचायत है जहा विभिन्न योजनाओं के तहत लाखो रुपयो के कार्य को स्वीकृति मिली और कागजो में ही बन कर रह गई केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की महत्वकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन की तो यहां सरपंच और सचिव दोनों ने मिलकर सेंध लगाने के अलावा ओडीएफ के नाम पर शासन को लाखों का चुना लगाया है। यही नहीं इस पंचायत में लाखों की लागत से केवल कागज में निर्माण कार्य हुए है जिसकी निष्पक्ष जांच होने पर घोटाले का खेल उजागर हो जाएगा। ग्राम पंचायत हिर्री की जहां स्वच्छ भारत मिशन के अलावा शासन की अनगिनत महत्वकांक्षी योजनाओं के अंतर्गत लाखो की लागत दर्जनों विकास कार्यों को लेकर स्वीकृति पर सरपंच और सचिव दोनों ने मिलकर अपनी जेबे भरने का काम किया है। जहां स्वच्छ भारत मिशन तहत कराये गये शौचालय निर्माण कार्यों में फर्जी तरीके से लाखों रूपये आहरण कर लिए गए। वहीं कई मदो से स्वीकृति निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार का खेल सरपंच और सचिव द्वारा खेला गया और लगभग 50 लाख रूपये का बंदरबांट कर लिया गया है। इस पंचायत में विकास कार्य 5 सालों मे बहुत हुए हैं, लेकिन अभी भी विकास कार्य बाकी है। बहुत से विकास केवल ग्राम पंचायत के कागजों पर ही होते हैं, जिस पर सीसी रोड़ ,मुक्तिधाम ,मुलभुत की राशि से फर्जी नाली निर्माण नाली के सफाई के लिए ग्राम पंचायत प्रस्ताव में गायब नाली के साफ़ सफाई के लिए लाखों रुपए राशि आहरण करना ,शासकीय भवनों के मर्मत और रंग रोगन का केवल कागजो पे काम महज लीपापोती और शासन को गुमराह कर कागजी कार्रवाई कर दिया गया है यहीं नहीं पूर्व में ग्रामीणों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से पंचायत के विकास कार्यों को सचिव के विरूद्ध शिकायत की थी जिस पर सालों बीतने के बाद भी आज पर्यंत तक कार्रवाई नहीं हुई है ग्रामीणों का आरोप है सरपंच के द्वारा पंचायत के विकास कार्यो में केवल अपने निजी स्वार्थ के चलते भारी भ्रस्टाचार किया गया है जिसमे 26 लाख रूपए के शौचालय निर्माण में अनियमित्ता और कुछ विभिन्न योजना अंतर्गत स्वीकृत हुए कार्यो को कागजी खानापूर्ति कर दिया गया और राशि आहरण कर डकार लिया गया है बावजूद सरपंच पे कार्यकाल के अंतिम पांच वर्ष बीतने को कार्यवाही शून्य मात्र है वही गाँव की महिला समूह के सदस्यों ने बताया कि उन्हें नल जल सम्बन्धित बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है साथ ही ओडीएफ ग्राम घोसित होने के बाद भी अधूरे शौचालय निर्माण के चलते उन्हें खुले में शौच करने जाना पड़ रहा है यही नही कुछ ग्रामीण हितग्राहियो का तो यह भी कहना है कि उनके द्वारा निजी पैसो से शौचालय बनाया गया है लेकिन उन्हें आज तक सरकार का प्रोत्साहन राशी नही मिल सका है बस सरपंच द्वारा मिल जायेगा जैसे आश्वाशन ही दिया जा रहा है।

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