धान के समर्थन मूल्य में वृद्धि ऐतिहासिक नहीं : कांग्रेस

०० किसानों से मोदी सरकार ने जरुर किया है ऐतिहासिक धोखा

रायपुर। धान के समर्थन मूल्य पर 200 रू. की बढ़ोतरी और इस बढ़ोतरी पर भाजपा द्वारा मचाई गयी ऐतिहासिक हायतौबा पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष धनेन्द्र साहू, कांग्रेस विधायक दल के उपनेता कवासी लखमा, आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष अमरजीत भगत, पूर्व सांसद पी.आर. खुंटे, विधायक जनक राम वर्मा और प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने एक संयुक्त विज्ञप्ति में कहा है कि वास्तविक लागत मूल्य और मूल्य वृद्धि सहित सभी खर्च जोड़ें तो धान का एमएसपी जितना होना चाहिये, उससे 590 रू. कम है। घोषित खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य ‘लागत$50प्रतिशत’ की शर्त को कहीं भी पूरा नहीं करता। यह किसान के साथ धोखा है।

 

कांग्रेस नेताओ ने कहा कि लागत निकालने का मोदी सरकार का फार्मूला किसानों को मंजूर नहीं है। मोदी सरकार ने एमएसपी में जो बढ़ोतरी की वह कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की पिछले साल की सिफारिशों के अनुरूप भी नहीं है, जबकि इस साल खर्चे और बढ़ चुके है। सीएसीपी ने दो फार्मूले ए2 और ए2$एफएल के आधार पर उत्पादन खर्च का आकलन किया है। सरकार ने ए2$एफएल का डेढ़ गुना एमएसपी तय किया है। लेकिन एक और फार्मूला सी-2 है, इसमें ब्याज पर कर्ज समेत सभी खर्चे जोड़े जाते है। इसलिये यह ए2$एफएल से ज्यादा होता है। किसान इसी आधार पर लागत मूल्य की गणना डेढ़ गुना की मांग कर रहे है। मोदी सरकार जानबूझकर ‘कृषि लागत एवं मूल्य आयोग’ की चालू वर्ष 2018-19 की सिफारिशों को सार्वजनिक नहीं कर रही। आज मोदी मंत्रीमंडल ने खरीफ फसलों के मूल्यों की घोषणा कृषि मूल्य आयोग द्वारा पिछले साल, यानि 2017-18 के लागत मूल्य आंकलन को ध्यान में रखकर की है, न कि कृषि मूल्य आयोग के मौज़ूदा साल यानि 2018-19 के लागत मूल्य आंकलन के आधार पर। किसान के साथ यह धोखाधड़ी क्यों? ‘कृषि लागत एवं मूल्य आयोग’ ( commission for agricultural costs and prices) की  2017-18 की सिफारिश के मुताबिक खरीफ फसलों की ‘लागत$50प्रतिशत’ की कीमत निम्नलिखित होनी चाहिए।

धान का लागत मूल्य प्रति क्विंटल 1484रु.

स्वामीनाथन कमेटी के मुताबिक मूल्य 2226 रु.

2018-19 के लिए घोषित समर्थन मूल्य 1750 रु.

स्वामीनाथन कमेटी के सिफ़ारिशो के मुताबिक मूल्य और समर्थन मूल्य का अंतर (-) 476 रु. अगर मूल्य वृद्धि को जोड़ लिया जाये तो यह कीमत 590 रू. प्रतिक्विंटल कम है। धान का एमएसपी यूपीए-1 के समय 61 प्रतिशत और यूपीए-2 के समय 38 प्रतिशत बढ़ा था। लेकिन मौजूदा एनडीए सरकार के कार्यकाल में यह सिर्फ 29 प्रतिशत बढ़ा है। वजह यह है कि एमएसपी में सिर्फ 50 से 80 रू. तक की बढ़ोतरी हुई। दलहन और तिलहन की स्थिति और खराब है। दलहन-तिलहन में बढ़ोतरी भी यूपीए से कम हुई है। भाजपा की अटल बिहारी बाजपेई सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 6 वर्षो में 490 रू. से 550 रू. किया था। (मात्र 60 रू. की वृद्धि), अब मोदी सरकार ने चार वर्षो में मात्र 200 रु. की थी और इस साल 200 रू. की वृद्धि की है। भाजपा की सरकारों ने धान का समर्थन मूल्य 11 वर्षो में कुल 460 रू. की वृद्धि की है, जो कि स्पष्ट रूप से भाजपा के किसान विरोधी, धान विरोधी रवैये को उजागर करता है। कांग्रेस ने 10 वर्षो में धान के समर्थन मूल्य में 890 रू. की वृद्धि की है। यूपीए 1 में धान का समर्थन मूल्य 5 वर्षों में 2004 से 2009 तक 450 रूपयें बढ़ाया गया। (550 रू. प्रति क्विंटल से 900 रू. प्रति क्विंटल) और यूपीए 2 में 2009 से 2014 तक 5 वर्षो में धान का समर्थन मूल्य 440 रूपयें बढ़ाया गया।

 

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