वेलकम फैक्ट्री में ठेकेदार ने दी मजदुर लीडर को जान से मारने की धमकी

०० वेलकम डिस्टलरी फैक्ट्री प्रबधन द्वारा मजदूरो का किया जा रहा शोषण

०० मजदूरो की सुरक्षा को लेकर फैक्ट्री प्रबधन है लापरवाह, बिना पट्टा लाइसेंसके चलाए जा रहे फैक्ट्री

करगीरोड कोटा। विवादों से पुराना नाता रहा वेलकम डिस्टलरी फैक्ट्री एक बार पुनः मजदूरों को लेकर फिर से विवादों में घिर गई है,इससे पहले भी वेलकम डिस्टलरी फैक्ट्री में होने वाली दुर्घटनाओं के नाम से जाना जाता रहा है, वहां पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर ठेकेदारों द्वारा शुरू से ही लापरवाही बरती जाती रही है, वर्तमान में भी हालात जस के तस हैं| बाहर के प्रदेशों से आए हुए मजदूरों की कई बार इस वेलकम फैक्ट्री में जान जा चुकी है ,उसके अलावा स्थानीय निवासियों जो कि वहां पर मजदूरी का कार्य करते हैं, उन लोगों की भी जान जोखिम में जा चुकी है, पिछले बार हुई दुर्घटना में दो से तीन लोगों की मौत हो चुकी थी जबकि बाकी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जब जब फैक्ट्री में कोई दुर्घटना होती उसके बाद ही वेलकम फैक्ट्री प्रबंधन वह आबकारी विभाग के लोग और प्रशासनिक अधिकारियों की नींद खुलती रही है।

वेलकम फैक्ट्री में मजदूरों के ठेकेदार जिलानी खान और कौशल साहू के नाम लारीपारा छेरकाबांधा निवासी केमिकल यूनियन लीडर होरी लाल साहू द्वारा आरोप लगाया गया की, मजदूरों को यूनियन में शामिल करने पर वेलकम फैक्ट्री में लेबर ठेकेदारी का कार्य कर रहे| जिलानी खान और कौशल साहू द्वारा मेरे साथ गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई जिसकी जानकारी फैक्ट्री के मजदूरों को लगी उसके बाद फैक्ट्री के मजदूरों के साथ कोटा थाने में दोनों को खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई गई, वेलकम फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों की सैकड़ों की तादात में कोटा थाने पहुंच कर जिलानी खान और कौशल साहू के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई गई जिसके बाद दोनों पक्षों को समझाइश देने के बाद ही वापस लौटे। कोटा थाना प्रभारी चौहान जी द्वारा मामले का निराकरण किया गया, समझाइश के बाद सैकड़ों की तादात में आए मजदूरों ने वापस फैक्ट्री की ओर चल दिए।

बिना पट्टा लाइसेंसके चलाए जा रहे फैक्ट्री :-  शिकायतकर्ता होरी लाल साहू द्वारा बताया गया की फैक्ट्री में लगभग 8 से 10 पट्टे चलते हैं जिसमें कि 5 से 6 पट्टे हैं, जो कि नियमता: लाइसेंसी रूप से चलाए जा रहे हैं, बाकी पट्टे बिना लाइसेंस के चलाए जा रहे हैं जिसमें कि मजदूरों का ना ही बीमा कराया गया है ना ही मजदूरों को दस्ताने, जूते, और चश्मे दिए गए हैं मेडिकल सुविधा भी लगभग नहीं के बराबर है|

तय मजदूरी से कम दिया जा रहा मजदूरी,  :- जब भी कोई दुर्घटना घटती है ,उसके बाद ठेकेदार और वेलकम का प्रबंधन जागता है, उससे पहले काम करने वाला मजदूर जान हथेली पर रखकर काम करता है| यहां तक की हाथ पांव कट जाए तो बैंडेज पट्टी की जगह शराब की बोतल में लगने वाले स्टिकर वाली सील को ही लगाना पड़ता है, श्रम विभाग द्वारा जो न्यूनतम मजदूरी निर्धारित है जो कि दिया जाना है जाना है 325 की जगह 120 मजदूरों को दिया जाता है जो की न्यूनतम मजदूरी से बहुत कम है। कोटा से लगे वेलकम डिक्शनरी में ना जाने कितने मजदूरों की जान गई है जिसको वेलकम डिक्शनरी के प्रबंधन द्वारा अंदर ही अंदर दबा दी गई है आज तक उनका नहीं पता चला है और ना ही प्रबंधन के ऊपर कोई कार्रवाई की गई है। वेलकम डिक्शनरी से निकलने वाली खतरनाक गैस की वजह से आसपास के लोग बहुत परेशान रहते हैं इससे निकलने वाली खतरनाक गैस की वजह से पर्यावरण वह मानव जीवन के लिए भी खतरनाक साबित हो रही है।

 

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