मड़वा पावर प्लांट प्रोजेक्ट में 3000 करोड़ रूपये का घोटाला : कांग्रेस

०० वित्तीय अनियमितता एवं घोटाले के दोषी अफसरों को दंडित करे नियामक आयोग

रायपुर।  कांग्रेस ने राज्य विद्युत नियामक आयोग से मांग की है कि आयोग मड़वा ताप विद्युत परियोजना में हुए 3000 करोड़ रू. की वित्तीय अनियमितता एवं घोटाले की जॉंच के लिए चार्टड अकाउटेंट की टीम नियुक्त कर, सारे लेखों एवं वाउचर्स की सूक्ष्म जॉंच करावें।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक रमेश वर्ल्यानी के साथ आयोग पहुॅंचे प्रतिनिधि मंडल में इंदर चंद धाड़ीवाल, कन्हैया अग्रवाल, डॉ. निरंजन हरितवाल, एम. ए. इकवाल, मदन तालेड़ा, सगीर सिद्यीकी, कुलदीप शर्मा, सिद्धार्थ चटर्जी, मोहम्मद रियाज आदि शामिल थे। प्रतिनिधि मंडल ने आयोग के अध्यक्ष नारायण सिंह को ज्ञापन सौंपकर उनसे चर्चा की। ज्ञापन में यह उल्लेख किया गया है कि 6317 करोड़ रू. की लागत वाली 1000 मेगावाट मड़वा परियोजना की लागत आश्चर्य ढंग से बढ़कर 9000 करोड़ रू. पहुॅंच गई। चार वर्ष में पूर्ण होने वाले प्रोजेक्ट को पूरा होने में आठ साल लग गए। इसके विपरीत एन.टी.पी.सी का सीपत में 1980 मेगावाट का पावर प्लांट चार वर्ष के अंदर बनकर तैयार हो गया और उस पर लागत आई 6777 करोड़ रू.। इस प्रकार पावर जनरेशन कंपनी ने लगभग 3000 करोड़ रू. की राजस्व हानि की है। एन.टी.पी.सी. द्वारा पूंजी लागत के लिए प्राप्त लोन पर ब्याज दर 7 से 8 प्रतिशत है जबकि पावर जनरेशन कंपनी द्वारा 11 से 13 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जा रहा है। मड़वा प्रोजेक्ट की एक यूनिट चालू होते ही डेढ़ माह में बंद हो गई जो 10 माह तक बंद रही। इस कारण कंपनी को महंगी दर से बिजली खरीदनी पड़ी। ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि पावर जनरेशन कंपनी ने अपने प्रत्युत्तर में यह स्वीकार किया है कि वर्ष 2016-17 के खाते आडिटेड नहीं है- तो उनके द्वारा पूंजीगत लागत के अनुमोदन की याचिका प्रस्तुत किए जाने का कोई औचित्य नहीं है। कांग्रेस नेताओं ने आयोग से कहा कि नियामक आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है जिसका दायित्व राज्य के राजस्व हितों की रक्षा करना है। अतः आयोग इस गंभीर मामले में संज्ञान लेकर घोटाले के दोषी अफसरों की वित्तीय एवं आपराधिक जवाबदेही तय कर, उन्हें दंडित करे।

 

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