छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र शुरू, पहले दिन राज्य के तीन वरिष्ठ नेताओं को दी गई श्रद्धांजलि

०० स्वर्गीय श्री हेमचंद यादव, श्री केयूर भूषण और श्री विक्रम भगत के व्यक्तित्व और कृतित्व को सदस्यों ने याद किया

०० दिवंगतों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया

रायपुर| छत्तीसगढ़ विधान सभा का मानसून सत्र आज शुरू हो गया। पहले दिन सदन में पूर्व मंत्री स्वर्गीय श्री हेमचंद यादव, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पूर्व संासद स्वर्गीय श्री केयूर भूषण और पूर्व मंत्री स्वर्गीय श्री विक्रम भगत को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। दिवंगतों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया। सदन की कार्रवाई प्रारंभ होने पर विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल ने निधन उल्लेख करते हुए तीनों दिवंगत नेताओं का परिचय दिया। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने स्वर्गीय श्री हेमचंद यादव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि श्री यादव ने अपना पूरा जीवन सादगी के साथ अजातशत्रु की तरह जिया। श्री यादव सबसे समान व्यवहार करने वाले लोकप्रिय नेता थे। श्री यादव की लोककला और लोक संगीत में भी गहरी रूचि थी। खेलों से भी उनका लगाव था। उन्होंने कम समय में ही सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में ऐतिहासिक काम किए। स्वर्गीय श्री यादव की स्मृतियों को चिरस्थाई बनाने के लिए दुर्ग विश्वविद्यालय का नामकरण स्वर्गीय श्री हेमचंद यादव के नाम पर करने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, साहित्यकार और रायपुर लोकसभा क्षेत्र के पूर्व संासद स्वर्गीय श्री केयूर भूषण को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके निधन से एक युग का अंत हो गया। उन्होंने आजीवन पूरी सादगी के साथ जनता की सेवा की। डॉ. सिंह ने कहा कि मैंने गांधीजी को नहीं देखा, लेकिन स्वर्गीय श्री केयूर भूषण जी को देखकर लगता था कि गांधीजी कैसे रहे होंगे। उन्होंने जीवन भर गांधीवादी सिद्धांतों का पालन किया और छत्तीसगढ़ की संस्कृति, खादी और आयुर्वेद के प्रसार में अपना जीवन लगा दिया। सत्रह वर्ष की आयु में उन्होंने गांधीजी के भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया और जेल यात्रा भी की। स्वर्गीय श्री केयूर भूषण जी 1980 से 1990 तक रायपुर क्षेत्र से लोकसभा में सांसद रहे। वे गांव, गरीब और किसानों की भलाई के लिए हमेशा सक्रिय रहे। छुआ-छूत की सामाजिक बुराई के खिलाफ जनजागरण में और छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के लिए चलाये गए सर्वदलीय अभियान में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। मुख्यमंत्री ने उनसे जुड़े संस्मरणों को याद करते हुए कहा कि बीमार होने के बावजूद वे हर माह मुझसे मिलने आते थे और मुझे मार्गदर्शन देते थे। हिन्दी और छत्तीसगढ़ी साहित्य जगत में एक संवेदनशील कवि, कहानीकार और उपन्यासकार के रूप में भी उनकी अपनी पहंचान थी। स्वर्गीय श्री केयूर भूषण जी ने आजीवन गांधीवादी और सर्वोदयी विचारधारा को अपनाया। डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व मंत्री स्वर्गीय श्री विक्रम भगत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे जशपुर क्षेत्र के एक सशक्त नेतृत्वकर्ता और समर्पित समाजसेवी थे। मनोरा के सरपंच के रूप में उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरूआत की। वे चार बार विधायक निर्वाचित हुए और छत्तीसगढ़ सरकार के राज्य मंत्री भी रहे। स्वर्गीय श्री विक्रम भगत ने जीवन भर गरीबो, आदिवासियों और समाज की अंतिम पंक्ति के लोगों की बेहतरी के लिए काम किया। उनके निधन से हम सबने किसानों, मजदूरों, आदिवासियों और समाज के कमजोर वर्गो के एक सच्चे हितैषी को हमेशा के लिए खो दिया।नेता प्रतिपक्ष श्री टी.एस. सिंहदेव, संसदीय कार्य मंत्री श्री अजय चंद्राकर, कृषि एवं जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय, सहकारिता और संस्कृति मंत्री श्री दयाल दास बघेल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रमशीला साहू, संसदीय सचिव श्री लाभचंद बाफना, विधायक श्री भूपेश बघेल, श्री सत्यनारायण शर्मा, श्री अरूण बोरा, श्री धनेन्द्र साहू, श्री अमरजीत भगत, श्री शिवरतन शर्मा, श्री देवजी भाई पटेल और श्री केशव चंद्रा ने भी दिवंगतों के सम्मान में अपने विचार किए और उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

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