डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल के 42 में से 41 स्टूडेंट्स फेल होने के मामले में हुआ बड़ा खुलासा

०० गोबरीपाट डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल में एक साल में ना ही पढ़ाई हुई और ना ही प्रैक्टिकल

०० कोटा एसडीएम के नेतृत्व में टीम ने की जांच, बंद पैकेट में मिली प्रैक्टिकल सामग्री

संजय बंजारे

करगी रोड कोटा। कोटा ब्लॉक के गोबरीपाट स्थित डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल के 42 में 41 स्टूडेंट्स के फेल होने के मामले में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। कोटा अनुविभागीय अधिकारी कीर्तिमान सिंह राठौर की जांच में चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि यहां बोर्ड क्लॉस की किसी भी कक्षा का कोई कोर्स पूरा नहीं की गई थी। यही नहीं, यहां की लैब में महज 15 सौ रुपए की सामग्री मिली, वो भी बंद पैकेट में। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां की पढ़ाई का स्तर कैसा है। एक माह पहले बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे जारी हुए थे तब डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल से सिर्फ एक स्टूडेंट पास हुआ था बाकी 41 बच्चे फेल हो गए थे। तब यह स्कूल मीडिया की सुर्खियों में रही। एक साथ इतने स्टूडेंट‌्स फेल होने से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया था। स्टूडेंट्स और पालकों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। यहां तक स्कूल में तालाबंदी तक कर दी गई थी। उस समय बिलासपुर कलेक्टर पी दयानंद ने कोटा एसडीएम के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की गई थी। टीम में कोटा बीईओ प्रतिभा मंडलोई व एबीईओ अजहर खांन को भी जाँच अधिकारी बनाया गया था। उस जाँच टीम को यह पता लगाने कहा गया था कि आखिर इतने बच्चे कैसे फेल हो गए। इसका क्या कारण हैं? एसडीएम के नेतृत्व में जब टीम जांच करने पहुंची, तब स्कूल में व्यवस्था देख टीम के सदस्य दंग रह गए।दरअसल, स्कूल में केमेस्ट्री, फिजिक्स और बायो की लैब तो है, लेकिन वहां पर प्रैक्टिकल सामग्री नहीं थी। आलमारी की खाक छानने पर कुछ बंद पैकेट मिले, जिसमें प्रैक्टिकल सामग्री भरी हुई थी। जांच टीम ने यहां मिली सारी प्रैक्टिकल सामग्री की कुल कीमत 15 सौ रुपए आंकी है। इससे साफ हो गया कि यहां के बच्चों को प्रैक्टिकल ही नहीं कराया गया है। आपको बता दें कि केंद्र शासन ने सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने के लिए मॉडल स्कूल योजना लागू की गई थी। इसके तहत शैक्षणिक रूप से जिलों के हर ब्लॉक में एक-एक स्कूल खोले गए। इसके तहत प्रदेश में 74 स्कूलों को मॉडल स्कूल का दर्जा दे दिया गया।इसमें बिलासपुर जिले के सात ब्लॉक 7 स्कूल भी शामिल हैं। पिछले साल राज्य शासन ने पढ़ाई का स्तर सुधारने की गरज से इन स्कूलों को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लिया और शर्त में खरे उतरने पर डीएवी प्रबंधन को स्कूल संचालन का जिम्मा सौंप दिया था।

कुछ विषय की तो पढ़ाई तक शुरू नहीं हुई थी :- टीम के सदस्यों ने स्कूल के बच्चों और अभिभावकों से चर्चा की तो पता चला कि यहां पर सालभर शिक्षकों की कमी बनी हुई थी। हालात यह था कि बोर्ड कक्षा के कई विषय की पढ़ाई तक शुरू नहीं हुई थी। कुछ सब्जेक्ट के एक या दो चेप्टर ही पूरे हुए थे। इस दौरान पालकों ने जांच टीम के सामने ही जमकर नाराजगी जाहिर की थी और स्कूल को बंद करने की बात कही गई थी।

बच्चों ने सामूहिक रूप से मांगी थी टीसी :- जब जांच टीम स्कूल पहुंची तो उस समय वहां पर अभिभावकों के अलावा करीब 150 से 200 के बीच स्टूडेंट्स थे। जांच टीम के सामने ही उन्होंने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सामूहिक रूप से टीसी देने की मांग की। तब टीम ने उन्हें समझाइश दी कि यहां से टीसी ले जाने के बाद उन्हें दूसरे स्कूल में शायद ही दाखिला मिले। वैसे भी टीसी देने का अधिकार उनका नहीं है।

 

डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल के प्रबंधन के खिलाफ शासन व प्रशासन क्या कार्यवाही करते हैं? अगर प्रबंधन का यही रवैया रहा तो वहा की स्थिति और भी नीचे की ओर गिरते ही जायेंगे। डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल गोबरीपाठ के प्राचार्य ने कहा कि मैं अभी यहां नया हूं, कुछ पता नहीं है।

प्रैक्टिकल नहीं होने और कोर्स की पढ़ाई अधूरी रहने के मामले में जब एसडीएम ने स्कूल प्राचार्य के कालोर मित्रा से जवाब तलब किया तब उनका कहना था कि उन्होंने हाल ही में यहां ड्यूटी ज्वाइन की है, इसलिए वे कुछ नहीं बोल पाए।

 

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