सहकारी बैंकों में जमा नोटबन्दी का काला पैसा प्रदेश के किसानों को सूखा राहत में दिया जाए: अमित जोगी 

०० आरटीआई खुलासे के बाद भाजपाई नेताओं द्वारा संरक्षित और संचालित जिला सहकारी बैंकों का 25 जून को  जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) करेगी घेराव

०० किसानों का ऋण माफ करने, मुआवजा एवं सूखा राहत देने की जाएगी मांग।

०० नोटबन्दी के दौरान रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, अम्बिकापुर और राजनांदगांव जिला सहकारी बैंकों में 280 करोड़ रुपये जमा हुए।  

रायपुर|  नोटबंदी के दौरान छत्तीसगढ़ के सहकारी बैंकों में लगभग 280 करोड़ रुपयों की राशि जमा हुई है। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त हुई जानकारी से यह बात सामने आयी है। इस तथ्य के सामने आने के बाद मरवाही विधायक अमित जोगी ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ये दुखद विडंबना है कि छत्तीसगढ़ में 40 प्रतिशत से ज्यादा लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने विवश हैं, 50 प्रतिशत से ज्यादा लोग निम्न माध्यम वर्गीय हैं, लेकिन नोटबन्दी के दौरान भाजपाई नेताओं के बैंकों में 280 करोड़ रुपये का धन एकत्रित हो जाता है। उल्लेखनीय है कि 10 नवंबर 2016 से 31 दिसंबर 2016 के बीच छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित में 32 करोड़ 52 लाख रूपए मूल्य के पुराने नोट जमा हुए। साथ ही 10 नवंबर 2016 से 14 नवंबर 2016 के बीच अर्थात सिर्फ पांच दिनों में बिलासपुर, दुर्ग, अंबिकापुर, जगदलपुर, रायपुर और राजनांदगाव के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित में क्रमशः  50 करोड़ 29 लाख, 56 करोड़ 96 लाख, 10 करोड़ 88 लाख, 29 करोड़ 33 लाख, 60 करोड़ 64 लाख और 38 करोड़ 77 लाख रूपए जमा किये गए हैं। इस प्रकार नोटबंदी के बाद प्रदेश के जिला सहकारी बैंकों में 5 दिनों में ही लगभग 247 करोड़ रूपए जमा किये गए। 

अमित जोगी ने कहा कि साफ है कि यह धन सफेद नही बल्कि काला है और भाजपाई नेताओं ने सहकारी बैंकों का दुरुपयोग कर अपना काला धन इन बैंकों में फ़र्ज़ी नामों से जमा रखा है। जहां प्रदेश में एक ओर सहकारी बैंक किसानों को ऋण पटाने के लिए तंग कर रहे हैं वहीं इन बैंकों में सरकारी संरक्षण प्राप्त भ्रष्टाचारी अपना पैसा सुरक्षित रख ऐश कर रहे हैं। विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए अमित जोगी ने कहा कि प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को नोटबंदी के बाद गुजरात की बैंकों में जमा हुई राशि की याद तो आती है लेकिन छत्तीसगढ़ के विषय में वे मौन धारण किये हुए हैं। 4 वर्षों में एक बार वे छत्तीसगढ़ भ्रमण पर जरूर आ जाते हैं। इतने गंभीर विषय पर राज्य में मुख्य विपक्षी दल के नेता भी चुप्पी साधे हुए हैं। क्या विपक्षी दल के नेताओं द्वारा भी सहकारी बैंकों में राशि जमा करी गयी है? अमित जोगी ने पूछा कि जनता जानना चाहती है कि आखिर किन किसानों ने नोटबंदी के बाद राज्य के सहकारी बैंकों में यह राशि जमा करी है। क्या इन किसानों के नाम किसान रमन सिंह, किसान अमर अग्रवाल, किसान प्रेम प्रकाश पांडे, किसान टी एस सिंहदेव, किसान भूपेश बघेल आदि हैं? अमित जोगी ने कहा कि जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) प्रदेश के किसानों के संग मिलकर 25 जून को आरटीआई में उल्लेखित सहकारी बैंकों का घेराव करेगी और सरकार पर किसानों का ऋण माफ करने, सुख राहत और मुआवजा देने का दबाव बनाएगी।

 

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