छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं की खुशहाली का बृजमोहन का बयान असंगत आधारहीन और किसानों का अपमान: धनेन्द्र साहू

० आजीविका के लिये किसानी करने वालों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है 

०० वास्तविक किसान कर्जदार और हर प्रकार से वंचित और सरकार से दुखी 

रायपुर। कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के द्वारा किसानों की खुशहाली को लेकर दिए गए बयान पर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने कहा है कि बृजमोहन उन किसानों के बारे में बिल्कुल ठीक बोल रहे हैं जिनकी आजीविका का साधन सिर्फ कृषि नहीं कुछ और है। जिन्होंने अपनी भ्रष्टाचार की कमाई को काला से सफेद करने के लिए खेती में निवेश किया है, ऐसे किसान रमन सिंह सरकार मेंजरूर खुशहाल है। लगता है कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की परिभाषा में ऐसे ही लोग किसान है तभी तो उन्होंने किसानों की खुशहाली की ऐसी असंगत आधारहीन और गलत बात कही है।

कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के खुशहाल किसान के बयान पर पलटवार करते हुये प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने कहा है कि आजीविका के लिए किसानी पर निर्भर छत्तीसगढ़ के लोग आज बेहद परेशान, दुखी और निराश है। हजारों किसानों ने आत्महत्या कर ली है। वास्तविक किसान कर्ज के बोझ तले कराह रहा है। सूखा राहत और फसल बीमा की राशि का कहीं अता-पता नहीं। प्रधानमंत्री के नाम से चलाई जाने वाली फसल बीमा योजना छत्तीसगढ़ में बड़े व्यापक भ्रष्टाचार का शिकार हो गई है। कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा किसानों के खुशहाल होने की बात पर धनेंद्र साहू ने चुनौती दी है कि वह किसी गांव में वास्तविक किसानों के बीच जाएं और किसानों और किसानी के हालात पता करेंगे तो उनके होश उड़ जाएंगे। कृषि मंत्री किसी सोसाइटी में जाकर ऋणी किसानों से उनकी माली हालत पता करें। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जमीनी स्थिति का आकलन करें। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने कहा है कि कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल में नैतिक साहस हो तो समुचित सूखा राहत का वितरण ना हो पाने के कारण, फसल बीमा के नाम पर, कुछ भी न मिल पाने के कारण, 2100 रू. धान का समर्थन मूल्य और पांच साल तक 300 रू. बोनस नहीं दे पाने के कारण, एक-एक दाना धान नहीं खरीदने के कारण किसानों की दुर्दशा के लिये, छत्तीसगढ़ राज्य के कृषि मंत्री के रूप में अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करें। किसानों के साथ इस धोखाधड़ी के लिये भाजपा सरकार को छत्तीसगढ़ के किसानों से माफी मांगे। किसानों से माफी मांगने के बजाय भाजपा सरकार के कृषि मंत्री सफेद झूठ बोल रहे है। छत्तीसगढ़ में आत्महत्या करने वालों किसानों की संख्या (एनसीआरबी) नेशनल क्राईम रिकार्ड ब्यूरो के द्वारा प्रमाणित है। यह कहना कि एक भी किसान ने आत्महत्या ने नहीं की है, इससे बड़ा झूठ और कुछ हो ही नहीं सकता है। 21 दिसंबर 2017 में छत्तीसगढ़ विधानसभा में परिशिष्ठ 33 में 2015-16 से 20 अक्टूबर 2017 तक 1344 किसानों की आत्महत्या की बात गृहमंत्री रामसेवक पैकरा ने कही है। कृषि मंत्री बतायें कि कौन सच बोल रहा है? वो या गृहमंत्री?

 

error: Content is protected !!