छत्तीसगढ़ में परिवर्तन के लिये एक-एक कांग्रेस कार्यकर्ता का संकल्प : भूपेश बघेल

०० कांग्रेस का रमन सिंह को जवाब, कांग्रेस न पहले डरी थी, न आगे डरेगी

रायपुर। 25 मई 2013 को जीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुये माओवादी हमले की पांचवी बरसी पर शहीद नंदकुमार पटेल, शहीद विद्याचरण शुक्ल, शहीद महेन्द्र कर्मा, शहीद उदय मुदलियार, शहीद दिनेश पटेल, शहीद योगेन्द्र शर्मा, शहीद अभिषेक गोलछा, शहीद अल्लानूर भिंडसरा, शहीद गोपी माधवानी सहित सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुये प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा है कि शहीदों के अधूरे काम को पूरा करने के लिये कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता संकल्पित है। अब परिवर्तन अवश्यम्भावी है। शहीदो ने परिवर्तन को जिस संकल्प को लेकर परिवर्तन यात्रा निकाली थी, उसी संकल्प को कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता और एक-एक नेता पूरा करेगा।

भूपेश बघेल ने कहा कि जीरम में कांग्रेस नेताओं की शहादत को आज 5 वर्ष हो गये। आज तक अपराधी खुलेआम घूम रहे है। हम सब दुखी है हमारी निराशा और बढ़ गयी है। चिंता की बात यह है कि राज्य सरकार ने अभी तक झीरम घाटी के हत्यारों और षडयंत्रकारियों को पकड़ने के प्रयत्न भी आरंभ नहीं किये है। जीरम मामले में एनआईए की जांच में बार-बार रमन सिंह सरकार के नोडल ऑफिसरो ने बाधा डाली और मोदी सरकार बनने के बाद तो जांच की दिशा ही बदल गयी। एनआईए ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौपी दी, कोई खुलासा नहीं हुआ। जीरम की जांच के लिये बने जांच आयोग के कार्यक्षेत्र में साजिश की जांच को सम्मिलित ही नहीं किया गया है। दरभा थाने में जो रिपोर्ट दर्ज करायी गयी थी उस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। एनआईए के द्वारा आधी-अधूरी जांच कर अंतिम रिपोर्ट आरोप पत्र दाखिल कर देने के बाद जीरम के शहीदों के परिजन कांग्रेस विधायक दल के नेता टी.एस. सिंहदेव के साथ रमन सिंह जी से नये रायपुर में मंत्रालय भवन में मिले थे। रमन सिंह जी ने जीरम की साजिश की जांच के लिये केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलवाने की बात कही थी। शहीदों के परिजनों को केन्द्रीय गृहमंत्री से मिलाने का वादा किये रमन सिंह जी को आज तीन साल से अधिक हो गये। केन्द्रीय गृहमंत्री अनेक बार छत्तीसगढ़ आये लेकिन शहीदों के परिजनों को राजनाथ सिंह से न छत्तीसगढ़ में और न ही दिल्ली में मिलवाया गया। झीरम घाटी कांड एक राजनीतिक आपराधिक षड़यंत्र था। हमने विधानसभा में भी राज्य सरकार से मांग की थी कि सीबीआई से इसकी जांच करायी जाये। सरकार ने विधानसभा में घोषणा भी की। केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकारों के उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण जीरम मामले की साजिश की सीबीआई जांच नहीं हो पा रही है। विधानसभा में पूरे सदन की भावनाओं के अनुरूप सरकार ने सीबीआई जांच की घोषणा की लेकिन आज जीरम की घटना को 5 साल बीत जाने के बाद भी जीरम की साजिश की जांच शुरू नहीं हो सकी है। प्रदेश कांग्रेस प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा है कि जब-जब कांग्रेस पार्टी द्वारा जीरम कांड की आवाज उठाई जाती है तब-तब मुख्यमंत्री रमन सिंह घबरा जाते है और घबराहट में जीरम कांड के बाद अपने उस पहले बयान को भी भूल जाते है, जिसमें उन्होने घटना में हुई चूक को स्वीकार किया था। कांग्रेस पार्टी आज 25 मई को जीरम कांड के स्थान से ही छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनाने का संकल्प लेकर संकल्प यात्रा निकाल रही है। कांग्रेस की संकल्प यात्रा से छत्तीसगढ़ में परिवर्तन सुनिश्चित देखकर रमन सिंह बौखला गये है। जीरम कांड के तार सत्ता के केन्द्र से जुड़े है, क्योंकि कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की ठीक उसी जगह सुरक्षा हटा ली गयी जहां परिवर्तन यात्रा पर माओवादी हमला हुआ था। जीरम की साजिश को उजागर होने से रोकने में भाजपा की सरकारों की पूरी ताकत लगी हुयी है। भाजपा सरकार को इस बात की जानकारी है कि हत्यारे कौन है और षड़यंत्रकारी कौन है? उनकी पहचान का जानबुझकर छुपाने के लिये और उन्हें बचाने के लिये जीरम की साजिश की जांच कराने से पीछे हटा जा रहा है। जांच से रमन सरकार और षड़यंत्रकारियों के चेहरे बेनकाब हो जायेंगे। कांग्रेस पार्टी आज फिर से झीरम घाटी में हुये आपराधिक राजनैतिक षड़यंत्र की जांच की मांग दुहराती है। 

भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और साजिश के पोषकों को कांग्रेस के बारे में बोलने का अधिकार नहीं

कांग्रेस ने अंतागढ़ में लोकतंत्र की हत्या को उजागर किया है, जिसमें उनके दामाद सरकारी डॉ. पुनीत गुप्ता की रूपयों के लेन-देन की आवाज प्रदेश की जनता ने घर-घर में सुनी। नान घोटाले के उजागर होने के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल के संकल्प पर मुख्यमंत्री रमन सिंह इसलिये परेशान हो जाते है क्योंकि नान घोटाले की डायरी में सीएम मैडम का नाम आया है, ऐश्वर्या रेसीडेंसी में उनकी निवासरत साली का नाम आया है। रूआंसे गले से डॉ. रमन सिंह ने अपनी पत्नी का बीमारी की आड लेकर कांग्रेस नेताओं को नान घोटाला उजागर करने से रोकने की कोशिश की थी। कांग्रेस द्वारा अगस्ता वेस्टलैंड की जिसमें उनके पुत्र अभिषेक सिंह का विदेशों में धन जमा करने और कवर्धा रमन मेडिकल स्टोर्स के पते पर विदेशी निवेश की जांच की बात उठाने पर रमन सिंह जी पुत्र मोह में आ जाते है और इसकी जांच कराने से घबराते है। स्वयं इंदिरा प्रिय दर्शिनी बैंक घोटाले में बैंक मेनेजर उमेश सिन्हा के पुलिस द्वारा किये गये नार्कोटेस्ट में उन पर रूपये लेने का प्रमाण उजागर होता है तो अदालत के आदेश से कराये गये नार्को टेस्ट की सीडी सीटी कोतवाली से जिला न्यायालय तक आज भी पहुंच नहीं पायी है? क्या छत्तीसगढ़ की जनता के इन सवालों का जवाब मुख्यमंत्री के पास है? इन सवालों का जवाब प्रदेश की जनता चाहती है। झूठे एवं अनर्गल निराधार आरोप लगाकर संवैधानिक संस्थाओं की आड़ में भाजपा की राजनीतिक रोटी सेकने का खेल प्रदेश की जनता समझ गयी है और इसका करारा जवाब 2018 के विधानसभा चुनाव में देगी।

 

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