रमन अभिषेक मिलकर दो गांव का नहीं कर पाए विकास 20 हजार गांवों का विकास दूर की बात: पुनिया

०० डॉ रमन व बेटे अभिषेक के विधानसभा क्षेत्र-लोकसभा क्षेत्र में  पहुंचे पुनिया-बघेल

०० मुख्यमंत्री के विधायक आदर्श ग्राम सुरगी व सांसद के गोद लिये ग्राम भोथीपार खुर्द जाकर जानी विकास की हकीकत

रायपुर। प्रदेश प्रभारी पी.एल. पुनिया व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल विकास खोजने मुख्यमंत्री के आदर्श ग्रामों सुरगी व उनके सांसद पुत्र के भोथीपार खुर्द में चैपाल लगाकर चर्चा की। मुख्यमंत्री के द्वारा चुने गए आदर्श ग्राम सुरगी और उनके बेटे सांसद अभिषेक सिंह के द्वारा गोद लिए गए गांव भोथीपार खुर्द का दौरा किया। गांव में मनरेगा की मजदूरी भुगतान पेयजल सहित अनेक समस्याएं भोथीपार खुर्द के लोगों ने बताया कि बीमा राशि नहीं मिली, सूखा मुआवजा नहीं मिला, मनरेगा में एक सप्ताह से ज्यादा काम नहीं मिल रहा है, जहां मिला तो उसका भुगतान नहीं हो रहा है। गरीबी बड़ी समस्या है, सिंचाई के साधन नहीं, शौचालय बना लिए, तो पैसा नहीं मिला। उज्जवला योजना में गैस सिलेंडर तो मिलना स्वीकार किया गया पर महंगा मिला और उसकी रिफिल सब्सिडी नहीं आई। बोनस एक साल का मिला, देर से कर्ज पटाने पर 13 प्रतिशत ब्याज वसूली हो रही है। जब मुख्यमंत्री और उनके सांसद पुत्र द्वारा गोद लिये हुए गांव के ये हालात हैं तो प्रदेश की जनता के विकास का क्या हाल होगा?

प्रदेश प्रभारी पी.एल. पुनिया व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री के सांसद पुत्र अभिषेक सिंह के गोद लिए गांव भोथीपार खुर्द जाकर वहां ग्रामीणों के साथ तालाब के किनारे तिरपाल पर बैठ कर चर्चा किया। ग्रामीणों ने बताया कि सांसद आते नहीं। उनके राजनैतिक साथी हमें गांव वालों को तुच्छ समझते हैं। कोई भी काम नहीं हो रहा है। ग्राम का सरपंच भाजपा से जुड़ा है और अपने स्वयं के विकास में जुटा है। गांव का कोई ख्याल ही नहीं करता। गांव में तालाब है उसमें कीड़े पैदा हो गया था, बीमारियों का खतरा बढ़ गया था, उसकी मरम्मत व साफ सफाई  के बाद इस तालाब में पानी भरने किसी ने मदद नहीं की, तो हम सब गांव वालों ने प्रत्येक घर से 200 रुपये का चंदा इकट्ठा करके तालाब में पानी भरवाया है।लेकिन लोगों ने यह भी बताया कि भोथीपार खुर्द में स्थिति कुछ तो ठीक है कुछ खराब है सांसद के गोद वाले ग्राम भोथीपार खुर्द  की हालात तो बहुत खराब है। इसी क्रम में गलतियां खोजने मुख्यमंत्री के गोद लिए गाँव सुरगी पहुंचे इस कांग्रेस दल को वहां भी मनरेगा मजदूरी भुगतान में कमी बताई गई। अब कांग्रेस मुख्यमंत्री की चुनौती स्वीकार कर राजनांदगांव में उनके परिवार के आदर्श ग्रामों में आकर बता रहे हैं कि देखिए हम नहीं जनता कह रही है कि विकास नहीं हुआ है। अब रमनसिंह इसका जवाब दें कि हमने खुद यहां आकर जो सच बताया उस पर उन्हें क्या कहना है। जब मुख्यमंत्री के आदर्श क्षेत्र में  विकास का यह हाल हैं तो वो प्रदेश की जनता को कौन सा विकास दिखाने विकास यात्रा निकाल रहे हैं। गांव वालों ने कहा कि गांव का हाल है बहुत बुरा दिया तले अंधेरा की स्थिति मनरेगा में काम नहीं मिल रहा है जिन्होंने काम किया है उन्हें मजदूरी नहीं मिल रही है प्रधानमंत्री आवास योजना यह प्रकरण स्वीकृत नहीं किए जा रहे हैं सरपंच ने जरूर अपने बने बनाए मकान के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना का पैसा ले लिया है। गांव वालों को सूखा राहत की राशि प्राप्त नहीं हुई है 300 किसानों में से सिर्फ 75 किसानों को पैसा मिला है फसल बीमा तो इस साल का मिलने की बात तो दूर रही 2015 का पैसा भी नहीं मिला।

छत्तीसगढ़ प्रभारी पी.एल. पुनिया ने रमन सरकार के विकास के दावे पर विकास खोजो  यात्रा के जरिए कड़ा प्रहार करते हुए कहां की गोद लिए दो गांव का विकास नहीं कर पाने वाले राज्य के 20 हजार गांव को विकसित समृद्धिशाली बनाने का खोखला दावा कर रहे हैं। राजनांदगांव के विधायक एवं मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह एवं उनके पुत्र सांसद अभिषेक सिंह ने मिल कर गोद लिए दो गांव भोथीपार खुर्द एवं सुरगी का विकास नहीं कर पाये। दोनों गांव के किसान मजदूर गृहणी महिलाएं छात्र अपनी समस्याओं की मांग एवं प्रशासनिक अराजकता की शिकायत करने विधायक एवं सांसद के सामने डरते हैं दोनों से क्षेत्र में व्याप्त समस्याओं की शिकायत करने वालों को जेल की हवा खानी पड़ती है। राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र के दमनकारी, तानाशाही रवैया के कारण क्षेत्र की जनता भयभीत दहशत में है आज हम जब विकास खोज यात्रा के माध्यम से इनके बीच आए तो उनकी पीड़ा व्यथा हमारे सामने आया है आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी उनकी हक अधिकार की लड़ाई लड़ेगी राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र को दमनकारी तानाशाही हुकूमत से मुक्त कराएंगे विकास खोजो यात्रा से जनता को ताकत मिला है।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा है कि कोई सांसद अपने गोद लिये गांव की इतनी उपेक्षा कर सकता है, यह समझ से परे है। कांग्रेस का दल यहां विकास खोजने आया था। सबसे बड़ी समस्या यहां पेयजल की है। घरों में नल कनेक्शन तो दे दिया गया है, लेकिन नलों में पानी नहीं आता है। शौचालय की टंकी गायब है, दरवाजे नहीं लगे है, छत भी नहीं है। मध्यान्ह भोजन में शनिवार को मीनू में मीठा लिखा था लेकिन बच्चों के खाने में मीठा नहीं था। मुख्यमंत्री को दिया हुआ वाटर कुलर तो है लेकिन उसमें पानी नहीं है। 34 प्रतिशत सूखा है लेकिन बहुत कम किसानों को सूखा राहत मिली है। बीमा राशि तो किसी को नहीं मिला ही नहीं है। बोनस भी नहीं मिल पाया है। 5 एकड़ के किसान यदि 75 क्विंटल धान बेच दिये तो उनका राशन कार्ड काट दिया गया है। बहुत सारे ऐसे लोग जिनके राशन कार्ड में केवल चार माह अनाज मिला, पहले का मिला नहीं है। मनरेगा का काम एक परिवार में सिर्फ एक व्यक्ति को एक सप्ताह काम भर मिल रहा है। तालाब की खुदाई मनरेगा से किया जाना दिखाया गया है लेकिन वास्तव में भाजपा के कार्यकर्ता ने ठेकेदारी की है और जेसीबी से खुदाई की है। जाब कार्ड में काम नहीं मिल रहा है। स्मार्ट कार्ड में इलाज नहीं हो रहा है। प्रधानमंत्री आवास में वास्तविक जरूरत मंदों को इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इन गांवों में अव्यवस्था का आलम है। प्रजातंत्र में यदि गड़बड़ी होती है तो उसकी शिकायत की जाती है तो उसके खिलाफ पुलिस कार्यवाही की जाती है। निर्माण कार्य गुणवत्ताविहीन है। पेयजल भी नहीं है। भयावह स्थिति इस गांव की है। प्रदेश में विकास यात्रा निकालने वाले रमन सिंह अपने निर्वाचन क्षेत्र में जिन मतदाताओं ने उन्हें चुना है पीने का पानी की व्यवस्था नहीं कर पाये, शौचालय निर्माण में न सीट है, न छत, न गढ्ढा, निस्तारी के पानी के लिये गांव वालों को चंदा करके पैसे की व्यवस्था करनी पड़ रही है तो प्रदेश में विकास की स्थिति को समझा जा सकता है। 

 

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