दिव्यांगजनों के अनुकुल बनाया जाएगा राज्य के सभी शासकीय भवन : आर. प्रसन्ना

०० वर्ष 2022 तक पूरे करने होंगे अनुकूलन के कार्य, बेहतर कार्य करने वाले विभाग को मिलेगा पुरस्कार

रायपुर| राज्य आयुक्त दिव्यांगजन श्री आर. प्रसन्ना ने बताया है कि राज्य के सभी शासकीय विभागों के भवनों को वर्ष 2022 तक दिव्यांगजनों के अनुकुल बनाया जाना है। इन भवनों में वरिष्ठ नागरिकों और तृतीय लिंग के लोगो की सुविधा का भी ध्यान रखा जाएगा। विभागीय भर्ती प्रक्रिया के तहत स्थानांतरण एवं पदस्थापना में दिव्यांगजनों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर नियम बनाये जाएंगे। विभिन्न शासकीय आयोजनों में दिव्यांगजनों के समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प के द्वारा मुख्य अतिथियों का स्वागत किया जाएगा। शासन के जिन विभागों द्वारा दिव्यांगजनों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा और उनके प्रोत्साहन के लिए बेहतर कार्य किए जाएंगे, उन्हें दिव्यांगजन दिवस तीन दिसम्बर के अवसर पर पुरस्कृत किया जाएगा।
मंत्रालय (महानदी भवन) मेें दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के क्रियान्वयन की जानकारी देने विभागीय अधिकारियों की बैठक आयोजित की गयी। बैठक में राज्य आयुक्त दिव्यांगजन श्री आर. प्रसन्ना ने अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि अधिनियम के क्रियान्वयन की समीक्षा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा की जाती है। सभी विभागों द्वारा समय-सीमा के भीतर इस अधिनियम का क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए गए है। प्रसन्ना ने बताया कि विभागीय वेबसाईटों का अनुकूलन भी दिव्यांगजनों की सुविधा अनुसार किया जाना है। शासकीय कार्यालयों में कार्यरत निःशक्तजनों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी पंजी में रखी जाएगी। दिव्यांगजनों के रिक्त पदों पर भर्ती, स्थानांतरण, पदस्थापना में उनकी सुविधाओं को ध्यान रखा जाएगा। दिव्यांगजनों को परिवहन के लिए निशुल्क पास उपलब्ध कराने और बसों में उनके लिए दो सीट आरक्षित रखने का प्रावधान अधिनियम में किया गया है। जनगणना 2011 के अनुसार छत्तीसगढ़ में छह लाख 25 हजार दिव्यांगजन है। पूर्व में भारत में केवल सात प्रकार की दिव्यांगता में सुविधा का लाभ दिया जाता था। अब दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में दिव्यांगता की श्रेणी में 21 प्रकार की अक्षमता को शामिल किया गया। इसके अनुसार कुष्ठ रोग से मुक्त हो चुके व्यक्ति, सेरेब्रल पॉलिसी, एसिड प्रभावित, हिमोफिलिया, थैलेसिमिया, सिकलिन, मानसिक रूग्णता, ऑटिज्जम, सीखने की क्षमता में कमी, बोलने की क्षमता में कमी, सुनने की क्षमता में कमी, पूर्णतः बहरापन, कम दिखाई देना, पूर्णताः अन्धत्वा, मांसपेशियों संबंधित अक्षमता, बौनापन, स्नायु तंत्र की बीमारी जैसे-पार्किसन्, एक से अधिक प्रकार की निशक्तता, चलने में अक्षम, मल्टीपल स्केलेरोसिस, आत्म केन्द्रित स्पेक्ट्रम विकार को दिव्यांगता की श्रेणी में रखा गया है। श्री प्रसन्ना ने समस्त विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने अधीनस्थ जिला एवं मैदानी स्तर तक के कार्यालयों को दिव्यांगजनों के अनुकुल बनायें जाने कार्रवाई सुनिश्चित करें। राज्य की शासकीय भवनों को दिव्यांगजनों के अनुकुल बनाये जाने के लिए तीन चरणों में काम किया जाना है। पहले चरण में राज्य के चयनित 50 शासकीय भवनों को दिव्यांगजनों के लिए अनुकूल बनाया गया है। दूसरे चरण में राजधानी रायपुर के शासकीय भवनों में से 50 प्रतिशत भवन में अनुकुलन का कार्य किया जाएगा। तीसरे चरण में राज्य के दस महत्वपूर्ण शहरों- दुर्ग, राजनांदगांव, कवर्धा, बिलासपुर, मंुगेली, कोरबा, रायगढ़, बस्तर, कोरिया और सरगुजा के समस्त शासकीय भवनों का अनुकूलन किया जाएगा। राज्य भर के शासकीय भवनों को वर्ष 2022 तक दिव्यांगजनों, वरिष्ठजनों और तृतीय लिंग के लोगो के अनुकूल बनाया जाएगा।

 

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