बदहाल शिक्षा व्यवस्था, खस्ताहाल स्कूल बिल्डिंग  से राज्य की हजारों बच्चियां पढ़ाई छोड़ने को मजबूर: कांग्रेस 

००  रमन सरकार वाहवाही लूटने में लगी है और योजनाओं के नाम पर कर रही है धन का बंदरबाट – कांग्रेस

०० बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ केवल नारों तक सीमित

रायपुर।  छत्तीसगढ़ में बालिका शिक्षा योजना का हाल-बेहाल है, बच्चे पढ़ना चाहते है और माॅ-बाप पढ़ना चाहते है पर सुविधाओं के अभाव ने बच्चियों के स्वप्न पर पानी फेर दिया है। बदहाल शिक्षा व्यवस्था, खस्ता हाल स्कूल बिल्डिंग और आवागमन की असुविधा बच्चियों की शिक्षा में बाधक बन गयी है। बस्तर से लेकर जशपुर-सरगुजा तक तमाम आदिवासी अंचल इस परिस्थिति को भोगने मजबूर है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा बुलंद करना ही इसकी सफलता का द्योतक नहीं है, जब तक इस योजना के क्रियान्वयन को अमलीजामा ना पहनाया जाये।

कांग्रेस प्रवक्ता मो. असलम ने कहा कि ताजा उदाहरण बस्तर के नगरनार थाना क्षेत्र के गुमलावाड़ा का है। जहां की लगभग 100 बच्चियों ने सिर्फ इसलिये पढ़ाई छोड़ रखी है क्योकि यहां से 8वी की पढ़ाई के बाद आगे की शिक्षा के लिये 7 किमी दूर जाना पड़ता है और वहां पहुंचने आवागमन की सुविधा नहीं है। तिरिया तक जाने में भारी दिक्कतो का सामना करना होता है। दुर्भाग्यजनक बात यह है कि बस्तर से छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री आते है और वे खुद भी आदिवासी है किंतु उनकी दिक्कतों एवं जरूरतों से बेपरवाह है। आदिवासियों की शिक्षा के लिये पर्याप्त धन की सुविधा है, न तो 1500 की आबादी वाले गांव में हाई स्कूल खोला जा रहा है और न ही आवागमन को सुचारू बनाया जा रहा है। जबकि रमन सरकार यह दावा करते नही थकती कि बस्तर में हजारो पुल-पुलियों का निर्माण एवं हजारो कि.मी. की ग्रामीण सड़को का निर्माण किया गया, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया, अंदरूनी इलाको में बारहमासी सुगम आवागमन उपलब्ध कराया गया है। हाॅट बाजार पहुंचना, कृषि उत्पाद ले जाना तथा प्रमुख बसाहटो पर आना जाना आसान हुआ है। लेकिन धरातल पर वास्तविकता कुछ और ही बयां करती है। यह स्थिति केवल बस्तर में ही हो ऐसा नहीं है, समुचे राज्य के भीतरी इलाको की यही सच्चाई है। बच्चियां प्राथमिक एवं मीडिल स्कूल की शिक्षा के बाद आगे की पढ़ाई छोड़ रही है। उनके सपनो और भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता मो. असलम ने कहा है कि सरकार की अदुरर्दिशता एवं सुविधा मुहैय्या कराने में बरती जा रही उदासीनता के कारण राज्य के हजारो बच्चे पढ़ाई से वंचित हो रहे है। केवल विकास का ढ़िंढ़ोरा पीटा जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में राज्य की स्थिति बेहद खराब है। लेकिन राज्य की सरकार वाहवाही लूटने में लगी है और योजनाओं के नाम पर धन का बंदरबांट कर रही है। बच्चों के भविष्य को लेकर सरकार का गंभीर न होना दुर्भाग्यजनक है। 

 

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