सुप्रीम कोर्ट ने संसदीय सचिव मामले में राज्य सरकार से मांगा जवाब

०० आरटीआई कार्यकर्ता राकेश चौबे ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लगायी थी याचिका

०० सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के साथ ही हाईकोर्ट से किया है जवाब तलब

रायपुर।  छत्तीसगढ़ के संसदीय सचिवों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।आरटीआई कार्यकर्ता राकेश चौबे ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, इस मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को राहत दी थी। अब मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के साथ ही हाईकोर्ट से जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस चन्डचूर, एके खान्डलूकर की बैंच ने सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ संसदीय के नियुक्त मामले मामले में नोटिस जारी किया और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आर्डर व 70 लाख के अनुदान मामले पर नोटिस जारी किया गया है।

गौरतलब है कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती देते हुए लगाई गई एक जनहित याचिका, दो याचिकाएं व एक अवमानना याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर थी। 14 अप्रैल को दिए गए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 163-164 में दी गई मंत्री की परिभाषा के तहत संसदीय सचिव किसी संवैधानिक या वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रहे। उन्हें किए गए भुगतानों से यह साबित नहीं होता कि उनके पास लाभ का पद यानी ऑफिस ऑफ प्रॉफिट है। इसे साबित करने के लिए याचिकाकर्ता कोई रिकॉर्ड या दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। वहीं, अगस्त 2017 में दिए गए आदेश को यथावत रखा गया है, इस आदेश के मुताबिक संसदीय सचिव मंत्री के तौर पर कार्य नहीं कर सकेंगे।

संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती देते कांग्रेस के मो. अकबर ने दो याचिकाएं और रायपुर के राकेश चौबे ने जनहित याचिका लगाई थी। 1अगस्त 2017 को हाईकोर्ट ने संसदीय सचिवों के मंत्री के तौर पर कार्य करने पर रोक लगा दी थी, लेकिन इसके बाद भी उन्हें सभी सुविधाएं देने का आरोप लगाते हुए राकेश चौबे ने अवमानना याचिका लगाई थी। सभी पर एक साथ सुनवाई हो रही है। 16 मार्च को सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन और जस्टिस  शरद कुमार गुप्ता की बेंच ने सभी याचिकाएं खारिज कर दी। राज्य शासन की तरफ से महाधिवक्ता जेके गिल्डा और शासकीय अधिवक्ता प्रसून भादुरी ने पैरवी की।

 

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