मस्तुरी क्षेत्र में रेत से तेल नही, निकलता है बेहिसाब पैसा

०० ग्राम पंचायत अमलडीहा में रंग बिरंगी पर्ची छाप कर हो रहा है गैरकानूनी काम

०० सरपंच नदी में सड़क बना आवागमन पर वसूल रहे है मनमानी रकम

बिलासपुर। मस्तुरी का क्षेत्र रेत माफिया के लिए स्वर्ग साबित हो रहा है। एक ओर भ्रष्ट व्यवस्था है तथा दूसरी तरफ बिना जिम्मेदारी का काम जिसमें हर लगे न फिटकरी रंग चोखा आए का अवैध धंधा है। पंचायत के किसी भी काम में आज नही तो कल जांच होने पर फसने का पुरा अंदेशा है। उसके बाद धारा 40 का डर जबकि रेत के धंधे में बात ही कुछ और है। इसमें फसने पर केवल जुर्माना देना होता है जेल जाने का कोई डर नही है जबकि कमाई इतनी की एक साल के भीतर ही सरपंच सीधा एसयूव्ही की सवारी करता है।

इन दिनो अमलीडीह में निर्वाचित जनप्रतिनिधि इसी खेल में लगे है। अन्य की अपेक्षा इस जनप्रतिनिधि ने अपने काले कारनामें को ज्यादा व्यवस्थित कर लिया है। यहां तो गैर कानूनी काम भी रंग बिरंगी पर्ची छाप कर हो रहा है। इस खेल में दूसरे जिले के एक गांव का सरपंच भी शामिल है। मानो रेत की तस्करी ने अब अंतर जिला स्वरूप ग्रहण कर लिया है। एक तरफ छत्तीसगढ़ का सरपंच संघ सरपंचों के अधिकार के लिए लड़ रहा है और मांगे पुरी न होने पर 16 मई को अपने सील सिक्के सरकार को वापस करने का सोच रहा है। दूसरी तरफ मस्तुरी ब्लाॅक के अमलडीह गांव का सरपंच चंद रुपयों की खतिर अपना ईमान बेच रहा है। आम जनता जिस नदी को अपने जीवन की लाइन मानती है। उस नदी की रेत को अवैध तरीके से सरपंच बेच रहा है और सरपंच ने अपने दम पर नदी में ही रोड बनाने के बाद उस रोड से आवागमन करने पर टैक्स भी वसूली कर रहा है। अवैध काम को पुरी तरीके से कागजी स्वरूप किया गया है। ताकी डकैती की कमाई में जिन लोगो को हिस्सा देना उनके बीच कभी भी कोई विवाद न हो। बिलासपुर जिले की मस्तुरी स्थिति अमलडीह से बलौदाबाजार का ग्राम कोयदा जुड़ा हुआ है। दोनो गांव के बीच शिवनाथ नदी पार करनी पड़ती है। इस ओर अमलडीह का सरपंच और दूसरी ओर कोयदा का सरंपच रेत के दो तस्कर अवैध कमाई के लिए आपस में एक हो गए है। नदी पर अवैध रूप से बनाए गए मार्ग का जो लोग सामान्य तौर पर उपयोग करना चाहते है उनसे भी पैसा वसूल किया जाता है। दोनो सरपंचों ने अपनी अवैध कमाई को व्यवस्थित करने के लिए तीन रंग की रसीद छपवा ली है। जिससे उनके बीच कमाई का बाटवारा आसानी से हो जाता है। बिलासपुर जिला खनिज कार्यालय तथा एसडीएम मस्तुरी को इन सब मामलों में शिकायत का इंतजार होता है। जब तक कोई व्यक्ति दोनो गांव के सरपंचों से व्यक्तिगत दुश्मनी लिए बिना शिकायत नही करेगा। एसडीएम तथा खनिज अधिकारी कार्यवाही क्यों करेंगे ??

तस्करी के लिए बनाया मार्ग, आम नागरिको से भी हो रही वसूली :- नदी से रेत निकालकर अवैध तरीके से बेचने मात्र से जब मन नही भरा तो दोनो सरपंचों ने नदी पार करने का टैक्स वसूलना शुरू कर दिया है। रेत की अवैध निकासी के लिए पहले नदी में एक काम चलाऊ सड़क का निर्माण किया गया। ट्राली और डंपर की गिनती में कोई चुक ना हो जाए इस कारण नदी की सड़क पर दोनो ओर चैकी बनाई गई। जिस पर अपने आदमी रख गए। दिन रात रेत का आवागमन तो होता नही है किन्तु यह सड़क मुख्य मार्ग से कम समय में पहंुचा देती है। जिस कारण नदी पर बने मार्ग का उपयोग सामान्य नागरिक भी करते है। यही बात दोनो सरपंचों के लिए व्यवसाय का स्त्रोत बन गई। अब वे इस मार्ग का उपयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति से टैक्स लेते है। जो मार्ग कल तक केवल रेत की अवैध धंधे का मार्ग था अब उस पर आम नागरिकों का आना जाना भी हो रहा है। किन्तु इस धंधे की आड़ में बलौदाबाजार और मस्तुरी जनपद के सरपंच अपना जेब भर रहे है।

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