जोगी कांग्रेस के भार्गव ने समिति बना कर किया सरकारी जमीन पर कब्जा

०० पंचायत अधिकारियों के जुब़ा पर होता था एक ही नारा ‘‘आधा तोर आधा मोर यही है नवाअंजोर‘‘

०० धरम भार्गव व राजेश्वर भार्गव ने लगभग 7-7 एकड़ जमीन पर समिति बनाकर लिया योजना का लाभ

०० जिला पंचायत सीईओ की अनदेखी के चलते हरैली-सहेली योजना में जमकर किया गया फर्जीवाडा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश की अधोसंरचना सुधारने के लिए अधिक्तर योजनाएं जिला पंचायत के माध्यम से लागू हुई है। दो योजना विशेष रूप से जनप्रतिधियों का चारागाह बनी हरेली-सहेली दूसरा नवाअंजोर । बिलासपुर जिले में इन दोनो योजनाओं में इतना भ्रष्टाचार हुआ की नवाअंजोर को तो विश्व बैंक ने दुबारा राशि भी स्वीकृत नही की। जिला पंचायत के भ्रष्ट अधिकारी इस योजना के हिसाब किताब से भी घबराते है तब एक ही नारा पंचायत अधिकारियों के जुब़ा पर होता था ‘‘आधा तोर आधा मोर यही है नवाअंजोर‘‘ इसी तरह हरैली-सहेली योजना के तहत खाली पड़ी सरकारी भुमि पर गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के माध्यम से वृक्षारोपण, औषधिय पौधों की खेती योजना थी। इस योजना के तहत मस्तुरी गांव में उस समय के राजनैतिक बलशाली लोगो ने अपने फर्जी सदस्यों के साथ समिति बनाई और तत्कालीन तहसीलदार के साथ मिलकर भुमि को खड़ा किया।

ऐसे ही एक किस्सा बसपा के नेता धरम भार्गव एवं कांग्रेस के नेता रहे राजेश्वर भार्गव का है। उसी दौरान पावर्ती साहू नाम की एक महिला ने भी सरकारी जमीन पर महिला समिति बना कर कब्जा किया था। उसने तो अपने व्यवसाय को माईक्रो फाइनेंस के तहत भी पंजीकृत कराया था। पावर्ती साहू वर्तमान में राष्ट्रीय महापुरूष रामदेव यादव के योग संस्था से जुड़ी है। वे मतदाता जागरूकता के तहत सत्ता रूढ़ दल की अघोषित कार्यकर्ता है। बसपा नेता धरम भार्गव तथा छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के नेता राजेश्वर भार्गव ने मस्तुरी क्षेत्र में लगभग 7-7 एकड़ जमीन पर समिति बनाकर योजना का लाभ लिया। बाद में उन्होंने इसी भुमि पर बागवानी मिश्न के अंतर्गत एक नलकुप भी स्वीकृत करवाया, चुंकी राजेश्वर भार्गव जिला पंचायत सदस्य थे और जिला पंचायत की सामान्य सभा में जिले के सभी कार्यालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित होते है और उन्हें सरकारी योजनाओं के कार्यानवयन पर जनप्रतिनिधियों को पालन प्रतिवेदन देना होता है। इसी बात का लाभ उठा कर नेताओं ने उन योजनाओं का गलत उपयोग किया। जिसके वे हितग्राही नही हो सकते थे। इन सब भ्रष्टाचार को जिसे रोकने की जिम्मेदारी थी उस जिला पंचायत सीईओ ने भी अपनी आंख बंद कर ली और हरैली-सहेली एवं नवाअंजोर जैसी समाज उनमुक्ख योजना बंद हो गई। आज भी सरकारी जमीन पर ऐसे ही दोगले जनप्रतिनिधयों का कब्जा है तथा आम जनता जिनका भविष्य इन योजनाओं से सुरक्षित हो सकता था उनके नसीब में बिना सीट का शौचालय आया।

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