शहीद मूसे खा रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स 5 मई को

०० 86वे उर्स में रहेगी जायरीनों की भीड़ आसपास-दूरदराज से आते हैं,जायरीन पाते हैं,फैज आस्ताने मुबारक से

०० कौमी एकता गंगा-जमुना की तहजीब की मिसाल देखने को मिलती है,बाबा साहब के उर्स में, सब की दुआएं होती है कुबूल

करगी रोड कोटा। हजरत सैय्यद मूसा शहीद रहमतुल्ला अलैह का 86 वा सालाना उर्स मुबारक हर साल की तरह इस साल भी 5 मई को पूरे अकीदत और शानो-शौकत के साथ मनाया जाएगा इसकी तैयारियां की शुरुआत इंतजामिया कमेटी द्वारा अभी से शुरू कर दी गई है,|धार्मिक नगरी रतनपुर की पहचान मंदिरों की वजह से रही है, मगर यहां सदियों से गंगा-जमुना की तहजीब भी कायम रही है, जिसकी मिसाल हजरत सैय्यद मूसा शहीद रहमतुल्ला अलैह का आस्ताने मुबारक है,हर साल यहां उर्स के मौके पर जूना शहर मे मेला भरता है ,जहां आसपास दूरदराज से जायरीन अकीदत पेश करने आते हैं, आस्ताने मुबारक में अपनी-अपनी हाजिरी पेश करते हैं,और फैज हासिल करते हैं।

ऐतिहासिक धार्मिक नगरी रतनपुर की पहचान हिंदू आस्था के तमाम मंदिरों की वजह से तो है ही साथ ही यह नगरी मुस्लिम समाज के लिए भी पाक सरजमीन है,यहां उनके भी अल्लाह के वलियों के मुक़द्दस आस्ताने मुबारक मजारे हैं ,जहां अकीदतमंदों की दिल की दुआएं कुबूल होती है,और सभी अकीदतमंद रूहानी जिस्मानी फैज हासिल कर ही वापस लौटते हैं ,शायद यही वजह है कि रतनपूर को छत्तीसगढ़ का अजमेर भी कहा जाता है,और इसके पीछे जो असल वजह है,वो यह है कि, यहां मौजूद हजरत सैय्यद मूसा शहीद रहमतुल्लाह अलैह का आस्ताने मुबारक है, रतनपुर में कुछ ऐसे जगह हैं जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी की संख्या ज्यादा है ,नगर के बड़ी बाजार, भेड़ीमुड़ा ,और करैहापारा ,जैसे कुछ इलाके हैं, जहां सदियों से मुस्लिमों के साथ हिंदु भी मिलजुल आपसी सदभाव और सौहार्द से रहते हैं। एक दूसरे के त्योहारों को मिल जुलकर मनाने की परंपरा के साथ आपसी भाईचारा की वजह से कौमी एकता की एक मिसाल पेश करता है, यही वजह है कि नवरात्र पर मुस्लिम भाई अपना पूरा सहयोग प्रदान करते हैं ,उसी तरह बाबा साहब के उर्स के मौके पर भी मुस्लिमों के साथ दरगाह पहुंचकर अपनी इबादत से हिंदू समाज भी गंगा-जमुना तहजीब रतनपुर को खास बनाती है।

ऐतिहासिक है मूसा शहीद बाबा का मजार :- बाबा का मजार करीब 850 साल पुराना है, पुराने जानकार बताते हैं, की हजरत मूसा शहीद रहमतुल्ला अलैह का ताल्लुक सर जमीन-ए-यमन से था,उनका भारत में आगमन महमूद गजनबी के सिपहसालार के रूप में हुआ था,साल 1186 ईसवी में में एक बड़ी फौज के साथ हिंदुस्तान में इस्लाम के प्रचार के लिए वे आए थे ,और इसी मकसद के साथ वह छत्तीसगढ़ भी पहुंचे,इस्लाम को उस वक्त आरंग के सियासत के तत्कालीन राजा ने संघर्षपूर्ण चुनौती दी धर्म की लड़ाई में खूनी संघर्ष हुआ कहते हैं,उसी जंग में हजरत मूसा शहीद बाबा अपने वफादार साथियों के साथ शहीद हो गए,लेकिन आश्चर्य की बात यह रही कि उनका सर मुबारक प आरंग में ही रह गया,जहां आज भव्य मजार स्थित है,लेकिन अल्लाह के करामात से बिना सर के मूसा बाबा का धड़ उनका घोड़ा, रतनपुर पुरानी बस्ती जूना शहर के इस पहाड़ी तक ले आया उनके साथ करीब 35 घुड़सवार सिपाही भी आए थे ,यह सभी इस कदर जख्मी थे कि यहां पहुंचते ही उनकी मौत हो गई यहां तक की उनका घोड़ा भी शहादत को प्राप्त हुआ, हजरत मूसा शहीद की शहादत 15 रबीउल अव्वल दिन शनिवार अंग्रेजी तवारीख 9 अप्रैल 1186 ईस्वी को हुआ था। लेकिन इस घटना के बाद उनका मजार कब और किसने बनवाया इसका कोई लिखित दस्तावेज या ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता है, आज यह मजारे मुकद्दस पर उनकी शहादत की तारीख जरूर देखी जा सकती है, शहीद मूसे खा रहमतुल्ला अलेह बाबा के साथ अपनी जान कुर्बान करने वाले घोड़े का भी मजार आस्ताने में ही सुरक्षित है,उस पर भी यही तारीख लिखी हुई है ,कहते हैं उनके घोड़े के शरीर पर 79 तीर लगे थे,बाबा साहब के साथ आए 35 सिपाही जो उस लड़ाई में शहीद हो गए थे उनकी उनकी कब्रे भी यही है, जिसे गंजे शहीदा के नाम से जाना जाता है,क्या हिंदू क्या मुसलमान सब के लिए जूना शहर स्थित हजरत मूसा शहीद बाबा के आस्ताने मुबारक पाक मजार का दरवाजा हमेशा खुला है, वे सब पर अपनी रहमत की बारिश करते हैं, सबको फैज देते हैं, यहां जो भी अपनी मुरादे लेकर आता है ,दुआओं के बाद  बाबा सरकार उनकी मुराद जरूर पूरा करते हैं, आम दिनों में भी यहां जियारत के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं ,लेकिन उर्स पर तो छत्तीसगढ़ और देश के अलग-अलग प्रांतों से आने वाले अकीदतमंदों की संख्या हजारों लाखों में होती है।

कई वर्षो से हो रहा उर्स :- विगत वर्षों की तरह इस साल भी रतनपुर जूना शहर में हजरत सय्यद मूसा शहीद रहमतुल्ला अलैह का 86वां उर्स पाक मुबारक 5 मई को आयोजित होगा ।इस मौके पर पाक दरगाह शरीफ पर दिनभर जियारत मंदो का मेला लगेगा इस दौरान कई खास मेहमान भी यहां पहुंचेंगे जिनमें भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक सांसद लखनलाल साहू ,SP शेख आरिफ ,भाजपा जिलाध्यक्ष बिलासपुर रजनीश सिंह, समाजसेवी संजय साहू, जिला मंत्री भाजपा बिलासपुर शिव मोहन बघेल,जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव अनिल टाह, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण सहकारी आवास संघ व सहकारी बैंक के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल शामिल होंगे। 5 मई को होने वाले उर्स में हर साल की तरह इस साल भी कव्वाली का प्रोग्राम आयोजित होगा ,जिस में मुंबई के मशहूर कव्वाल सलीम हाशमी और जमशेदपुर के फिरोज फिरदौसी नात कव्वाली पेश करेंगे ,इस उर्स पाक पर सभी के लिए आम लंगर का भी आयोजन होगा ,रतनपुर सिर्फ हिंदू-देवी देवताओं की पूजा अर्चना तक ही सीमित नहीं है, यहां मुस्लिम मान्यताओं का भी  सम्मान किया जाता है ,और उनके त्योहारों पर भी सभी मिल जुलकर जिस तरह भाईचारे का उदाहरण पेश करते हैं, आज की तारीख में उसकी मिसाल ढूंढे नहीं मिलती उर्स पाक जहां मुसलमानों के लिए एक मुबारक मौका है,वही सामाजिक, सदभाव, सौहार्द, के लिहाज से भी रतनपुर को एक अलग पहचान देता हैं,इस साल के उर्स पाक को खास बनाने में इंतजामिया कमेटी रतनपुर जमात के लोग पूरी जोर शोर से तैयारियों में जुटे हैं,सामने विधानसभा चुनाव होने को है, उस लिहाज से भी राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों, सहित आलाधिकारियों की भी उर्स में मौजूदगी रहेगी।

 

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