रमन सिंह कर रहे गलत आंकड़ों के साथ जनता को बहकाने की साजिश, जनता से मांगें माफी: भूपेश बघेल

०० झूठ का पुलिंदा है रमन सरकार का विज्ञापन

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा है कि रमन सिंह सरकार समाचार पत्रों में विकास के जो आंकड़े प्रसारित कर रही है वह झूठ का पुलिंदा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गलत आंकड़ों के साथ सरकार जनता को गुमराह करके बहकाने की साजिश कर रही है। छत्तीसगढ़ को देश का सबसे गरीब राज्य बनाने वाली रमन सरकार झूठी बातें करके अब विकास दिखाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा है कि 30 अप्रैल को प्रकाशित समाचार माध्यमों (विज्ञापन) में दावा किया गया है कि आईआईटी, आईआईएम, एआईआईएमएस, आईआईआईटी वाला पहला राज्य छत्तीसगढ़ है जबकि यह सच नहीं है क्योंकि छत्तीसगढ़ से पहले ये सारे संस्थान राजस्थान में स्थापित हो चुके थे। छत्तीसगढ़ में भी एआईआईएमएस, आईआईएम जैसे राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना यूपीए कांग्रेस सरकार के समय सरदार मनमोहन सिंह की सरकार के प्रयत्नों से ही संभव हो पायी। भूपेश बघेल ने कहा है कि रमन सरकार के विज्ञापनों में यह दावा भी झूठा कि छात्रों को निःशुल्क लैपटॉप और टैबलेट देने वाला छत्तीसगढ़ पहला राज्य है। तथ्य यह है कि लैपटॉप वितरण योजना जयललिता सरकार ने सबसे पहले शुरु की थी। 15 सितम्बर 2011 को सर्वप्रथम तमिलनाडु में छात्रों को लैपटॉप बांटा गया था। जबकि रमन सिंह ने मई, 2013 में लैपटॉप बांटने की शुरुआत की. बघेल ने कहा है कि शिक्षा की बदहाली को देखते हुए रमन सरकार का यह दावा भी झूठा दिखता है कि शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ सर्वाधिक व्यय करने वाले दूसरा राज्य है क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि एलेमेंट्री एजुकेशन में रमन सरकार आवश्यकता से लगभग 40 प्रतिशत कम राशि खर्च करती है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि रमन सरकार ने पूरे एक पेज का विज्ञापन देकर दावा किया है ‘किसानों के साथ किसानों की सरकार’. सच यह है कि रमन सिंह की सरकार के शासनकाल में ही किसानों की आत्महत्या का सिलसिला लगातार जारी है। गत दिसंबर में ही सरकार ने बताया था कि पिछले ढाई साल में 1344 किसानों ने आत्महत्या की है। कृषि कर्मण पुरस्कार का गुणगान करते हुए रमन सिंह भूल गए कि उनके शासनकाल में किसानों के मजदूर बनने की प्रक्रिया सबसे तेज रही है और पलायन की दर सबसे ऊंची रही है। वे धान में बोनस देने के प्रावधान का विज्ञापन में जिक्र करते हैं लेकिन यह बताना भूल जाते हैं कि बोनस देना दरअसल कांग्रेस की सरकार ने शुरु किया था। उन्होंने कहा है कि रमन सरकार अभी भी किसानों के प्रति जवाबदेह के साथ-साथ किसानों की बकायेदार है कि उन्होंने 2100 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य देने का वादा किया था जबकि मिला सिर्फ 1470 रुपए और न उन्होंने हर साल 300 रुपए बोनस देने का अपना वादा पूरा किया है। चुनाव देखकर बोनस देने को वादा पूरा करना नहीं कहा जा सकता है।किसानों को लेकर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए भूपेश बघेल ने कहा है कि विज्ञापनों में 14 वर्षों में सिंचाई क्षमता 13.28 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 20.52 लाख हेक्टेयर कर दिया गया. लेकिन सच रमन सरकार के दस्तावेज ही बताते हैं कि  2003-04 तक प्रदेश में सिंचाई क्षमता बढ़कर 15.51 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी. मीडिया में आई खबरें बताती हैं कि सिंचाई की क्षमता कई स्थानों पर सिर्फ कागजों में बढ़ी है और यह भी तथ्य है कि कई जगह सिंचाई का पानी उद्योगों को दे दिया गया है। सिंचाई क्षमता के मामले में आदिवासी जिलों और खासकर बस्तर के साथ बड़ा अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा है कि मछली उत्पादन में भी देश को छठवें स्थान पर बताने वाला दावा गलत है कि क्योंकि केंद्र सरकार के आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ मछली उत्पादन में देश में पहले दस स्थानों में कहीं नहीं है। उन्होंने कहा है, “37 लेयर जियोग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम लागू करने का श्रेय लूटने वाली रमन सरकार को नहीं भूलना चाहिए कि यह कांग्रेस सरकार के समय से लागू सिस्टम है और मेरे राजस्व मंत्री के कार्यकाल के समय ही यह सिस्टम शुरु किया था।”मनरेगा के संबंध में 50 दिन के अतिरिक्त रोजगार देने की योजना के बारे में भूपेश बघेल ने कहा है कि रमन सरकार अपने विज्ञापन में यह बताना भूल गए कि यूपीए सरकार ने जनवरी 2014 में आदिवासी इलाकों में 50 दिन अतिरिक्त रोजगार देने का प्रावधान कर दिया था. वे यह भी भूल गए कि पिछले साल मनरेगा के तहत छत्तीसगढ़ में 150 दिनों की जगह औसतन 37 दिन ही काम मिल सका. उन्होंने कहा कि प्रावधान कर देने भर से रमन सिंह श्रेय लूटने के काबिल नहीं हो जाते, असली सवाल तो अमल का है।भूपेश बघेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री रमन सिंह को गलत जानकारियां देकर श्रेय लूटने की कोशिश के लिए जनता से तुरंत माफी मांगनी चाहिए और वादा करना चाहिए कि चुनाव में हार के डर से वे ऐसे अनर्गल दावे आगे से नहीं करेंगे।

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