क्या अब कांग्रेस में टिकट नही बिकेगी ? वाणी राव के कांग्रेस प्रवेश से फिर उठा यह सवाल

बिलासपुर। वर्ष 2018 के अंतिम माह में छत्तीसगढ़ विधानसभा की चुनाव के पूर्व कांग्रेस में इस बात की चर्चा फिर से गर्म है कि क्या इस बार पार्टी में टिकट बिकेगा नही। कुछ लोगो का मानना है कि नही बिकेगा। उनका कहना है कि टिकट नही बिकने का भरोसा होने पर ही बिलासपुर की पूर्व महापौर महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेता महराष्ट्र की प्रभारी रह चुंकी वाणी राव वापस कांग्रेस में आई। वहीं कांग्रेस के कुछ जानकार कहते है कि पार्टी की अंद्रुनी स्थिति में कोई अंतर नही आया है। जिन पर टिकट बेचने का आरोप था। वे ही नेता आज भी बड़े पदों पर बैठे है। पार्टी कितनी भी संघर्ष की स्थिति में हो किन्तु बतौर राजनैतिक दल पार्टी के टिकट का के्रज आज भी ज्यों का त्यों है और अब तो टिकट बिकने की संभावना और भी ज्यादा है। क्योंकि पार्टी को आर्थिक संसाधनों की जरूरत है। अभी कुछ ही दिन पूर्व मध्यप्रदेश कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने कह भी दिया था की जो भी व्यक्ति पार्टी की टिकट का दावा करे वह पार्टी कोष में दावे के पूर्व 50 हजार रुपये जमा कराए। स्थानीय नगर निगम का चुनाव जितने के बाद बिलासपुर की महापौर वाणी राव का कद कांग्रेस में काफी ऊपर तक गया। उन्हें प्रदेश महिला कांग्रेस का नेतृत्व करने का मौका मिला साथ ही उन्हें एक बार महाराष्ट्र, झारखंड में प्रभारी होने का मौका भी मिला था। राजनीति के जानकार बताते है कि वाणी राव जिन्होंने मध्यप्रदेश के वक्त से राजनीति में कदम रखा, का मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के साथ ही दिल्ली तक अच्छे खासे राजनैतिक संपर्क रहे। इन्हीं सम्पर्कों के बुते वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा जारी की पहली सुंची में उनका नाम था। किन्तु जिन साथियों के मदद से उन्होंने महापौर का चुनाव जीता था। उन्होंने ने ही विधानसभा चुनाव में वाणी का काम तमाम किया था। रही-सही कसर उस वक्त के जोगी समर्थकों ने पुरी की थी। यदि इन दोनो ने कांग्रेस का काम किया होता तो कांग्रेस का प्रत्याशी हारता भी तो हार 7 हजार के अंदर होती। किन्तु इनके कर्मो से पार्टी 14 हजार से अधिक वोटो से हारी। उसके बाद निगम चुनाव हुए इन दो चुनाव की तल्खी इतनी ज्यादा थी कि बिल्हा के कांग्रेस विधायक और महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेता ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पर टिकट बेचने के आरोप लगा डाले। तब प्रदेश की अनुशासन समिति ने इन दोनो नेता को कारण बताओं नोटिस दिया। नेताओं ने क्षमा मांग ली और मामला समाप्त हो गया। बाद में हाईकमान के ईशारे पर प्रदेश कांग्रेस ने बकायदा बैठक बुलाकर अजीत जोगी को पार्टी से बाहर कर दिया। तब से कांग्रेस से कई नेता जोगी कांग्रेस में गए जिनमें से कुछ वापस आ गए। जब वाणी राव ने कांग्रेस छोड़ कर जोगी कांग्रेस में प्रवेश किया था तब भी लोगो को यही उम्मीद थी कि उन्हें जोगी कांग्रेस से बिलासपुर का टिकट मिल सकता है। इस संभावना को तब और बल मिला तब अनिल टाह ने बेलतरा की शरण ली। किन्तु जैसे ही बिलासपुर में बृजेश साहू का नाम सुंची में आया तब से ही कांग्रेस पार्टी यह मान कर चल रही थी कि वाणी राव वापसी की ओर कदम उठाएंगी। बिल्हा जहां से उनके चाचा ससूर विधायक रहे। वहां जोगी कांग्रेस अपना टिकट सीयाराम के लिए निर्धारित रखी है। ऐसे में वाणी राव के लिए उस पार्टी में विकल्प थे ही नही। अब चुनाव के लगभग छः माह पूर्व वे अपने पार्टी में फिर वापस आई है। उनके वापसी से पार्टी में उनके कुछ पुरूष प्रतिस्पर्धी कुछ खुश है तो कुछ असमंजस में। महिला कांग्रेस में भी कुछ इसी तरह का मिला जुला माहौल है। जिले की महिला कांग्रेस उनके जाने के बाद से कांग्रेस भवन की काॅपी राईट बन कर रह गइ थी। महिला कांग्रेस की पुरी गतिविधियां एक बिल्डर के ईशारे की मौहताज थी। किन्तु अब स्थिति कुछ बदलेगी। वैसे कांग्रेस वापसी के बाद अभी तक वाणी राव ने शहर स्तर पर ऐसा कोई वक्तव्य नही दिया । जिससे उनके राजनैतिक दिशा का कोई अंदाज लगे।

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