अब राहों में भी पहचान होगी शिक्षक व शिक्षिकाओं की, काला पेंट सफेद शर्ट और गुलाबी सूट व साड़ियों में

 

(रवि ग्वाल) कवर्धा – अब काली पेंट-सफेद शर्ट में नजर आएंगे शिक्षक साथ ही शिक्षिकायें भी पहनेंगी गुलाबी साड़ी और सूट नए सत्र से शुरूआत किया जायेगा। कवर्धा कबीरधाम में नए कलेक्टर अवनीश कुमार शरण के आगम के बाद यह पहला फैसला है जिसके चलते स्कूलों के बाद राह में भी होगी पहचान और शिक्षकों का सम्मान और यह भी उम्मीद किया जा रहा है की शिक्षा के स्तर में सुधार व बेहतर और कुछ करने के लिए यह पहल किया जा रहा है मगर यह विषय भी सोचनीय बना हुआ है कि नए कलेक्टर के इस फैसले से कुछ शिक्षक संघ इससे समहत है तो कुछ शिक्षक संघ इस ड्रेस कोड को लेकर अपनी असहमति व्यक्तिगत रूप से जाहिर कर रहे है मगर यह भी जिला अधिकारी के द्वारा कहाँ जा रहा है कि यह फैसला शिक्षको से सहमति लेकर किया जा रहा है मगर ये बात समझ से परे है कि इस फैसले से शिक्षकों को एक पहचान मिलेगा मगर इसके विपरीत कुछ संघ या शिक्षक जा रहे है तो आखिर क्या मनसा होगी यह भी साफ पता नही चल पा रहा है मगर सहमति वाले शिक्षक नए कलेक्टर कबीरधाम अवनिश कुमार शरण के इस फैसले से खुशी जाहिर कर रहे है साथ यह बया कर रहे है कि ड्रेस कोड रहने से हमे भी पहचान और सम्मान मिलेगा हालांकि यह नियम आगामी शिक्षा सत्र 16 जून से शुरू होगा ऐसे में शिक्षाकर्मी फिलहाल इस नियम का खुल कर विरोध तो नहीं कर रहे है लेकिन इसके पक्ष में भी शतप्रतिशत शिक्षक जाते नजर नहीं आ रहे है। वहीं शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा में गुणवत्ता सुधार करने तथा समानता लाने के उद्देश्य से इसे लागू करने की बात कह रहे है। साथ ही नए कलेक्टर के इस फैसले से आम लोगों में चर्चा स्वागत का विषय बना हुआ है ।

अब आपको यह भी बता देतें है कि यह वे कलेक्टर है जिन्होंने छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में अपनी बच्ची वेदिका का दाखिला एक सरकारी स्कूल में कराया था साथ ही अचानक मध्यान भोजन का जायजा लेने स्कूल में ही मिलने वाली भोजन अपनी बच्ची के साथ बैठकर क्लास रूम में खाया था जिसका फ़ोटो कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर बहोत वाइरल भी हुआ था और बहुचर्चित भी हुआ था । और आम लोगों में यह विषय बहोत अचंभित और खुशियों भरा था अचंभित इस लिए रहा क्योंकि आज के इस युग और समय को देखते हुए हर वर्ग के लोग अपने बच्चों को एक हाईफाई और स्मार्ट प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने के लिए सोचतें है मगर साहब तो कलेक्टर है उन्होंने अपनी बच्ची को सरकारी स्कूल में कैसे भर्ती करा दिया तो दूसरी ओर वही आम लोगों में खुशी इस बात का था कि अधिकारी हो तो कलेक्टर साहब जैसा जिन्होंने अपनी बच्ची को सरकारी स्कूल में भर्ती कराया और इससे बांकी स्कूली बच्चों की भी पढ़ाई का स्तर बढेगा साथ ही अगर ऐसे ही सभी साहब और अधिकारी करें तो राज्य का शिक्षा स्तर कहाँ से कहाँ पहोच जायेगा इसका अंदाजा नही लगाया जा सकता और तो और गरीब परिवार के बच्चे भी अफसर और अधिकारियों के रूप में आगे नजर आएगा साथ ही बड़े और हाईटेक प्राइवेट स्कूलों के फीस से भी छुटकारा मिल जायेगा ।

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