व्यापक सूखे में 96 तहसीलो के किसानों के लिये 731 करोड़ की स्वीकृत मुआवजा राशि “ऊंट के मुंह में जीरा के समान”  : धनेद्र साहू

०० किसान विरोधी रमन सरकार सूखा पीड़ित किसानों को आखिर कब देगी सूखा राहत राशि: कांग्रेस 

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने छत्तीसगढ़ की रमन सरकार को घोर किसान विरोधी निरूपित करते हुये आरोप लगाया है कि 731 करोड़ की अपर्याप्त राशि सूखा राहत के लिये छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिला कलेक्टरों को भेजे जाने के बाद भी आज तक सूखा राहत राशि छत्तीसगढ़ के 96 सूखा ग्रस्त तहसीलो के पीड़ित किसानो को नहीं दी गई है। यह किसानो के प्रति भाजपा सरकार की बेरहमी की इम्तिहा है। 

पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने सूखा ग्रस्त किसानों के कर्ज माफी फसल बीमा राशि और सूखा राहत राशि के तत्काल भुगतान की मांग की है और शीघ्र किसानों को क्षतिपूर्ति मुआवजा की राशि के आंवटन की मांग की है। धनेन्द्र साहू ने आंशका व्यक्त की है कि भाजपा सरकार ने आंवटन की प्रक्रिया को जानबूझकर रोका है ताकि विकास यात्रा के दौरान राशि को किसानों के खातों में ट्रांसफ्रर, कर राजनैतिक लाभ उठाते हुये किसानों के साथ पुनः धोखा किया जावे। नीति आयोग ने ठीक ही कहा है कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य ही देश को पीछे धकेल रहे हैं और इसके लिए रमन सिंह का 15 वर्षों का शासन दोषी है, रमन सिंह का फर्जी विकास माॅडल दोषी है, गरीब विरोधी, किसान विरोधी, मजदूर विरोधी नीतियां जिम्मेदार है। किसानों को रमन सिंह ने चैतरफा मारा है. एक तो उनको दाना दाना खरीदी का झूठा आश्वासन दिया, फिर वोट लेने के लिए 2100 रुपए समर्थन मूल्य देने का वादा किया और हर साल 300 रुपए बोनस देने का झूठ गढ़ा, न दाना दाना खरीदी हुई, न समर्थन मूल्य मिला और न हर साल बोनस मिला, उनकी जमीनें हड़प लीं और उनका पानी उद्योगों को बेच दिया। किसान निराश होकर आत्महत्या कर रहा है।किसानों की दुर्दशा पर आंखें नम हो जाती हैं. लेकिन रमन सिंह हैं कि विकास की ढफली बजाते झूठे गीत गाते प्रदेश भर में घूम रहे हैं। रमन सिंह के मुखिया रहते विकास की चिड़िया का यही हश्र होना था. कोटा के रिगवार के 35 किसान अगर इच्छामृत्यु मांग रहे हैं तो इसे विकास की चिड़िया की इच्छामृत्यु की तरह देखा जाना चाहिए। किसानों की जमीनें बांध और नहरों के लिए ली गई. न उन्हें पानी मिला और न मुआवजा. वे मुआवजे के लिए दस वर्षों से भटक रहे हैं और अब उनके लिए इच्छामृत्यु मांगने की नौबत आ गई है. अगर सिंचाई योजना के लिए जमीनें ली थीं तो कम से कम पानी तो दे देते, वह भी नहीं मिला। कांग्रेस द्वारा लगातार मांग करने के बावजूद किसानों का सहकारी बैंको का कर्जमाफ नहीं किया गया। किसानों द्वारा खेती के लिये बड़े पैमाने पर लिये गये व्यक्तिगत कर्ज अलग है। किसानों ने गहना गुरिया गिरवी रखकर बेचकर किसानी की है, लेकिन सूखा पड़ जाने के कारण वो भी पैसा बर्बाद हो गया। किसानों को फसल बीमा की राशि या तो मिली नहीं या अपर्याप्त मिली है। राजनैतिक स्वार्थ के लिजे सूखा पीड़ित किसानों की राहत राशी रोकना बेरहमी की इम्तिहा है।

सूखा पीड़ित किसानों की स्थिति रोजगार के अभाव में नियंत्रण से बाहर हो गयी है। सूखा पीड़ित किसानों के खातों में क्षति पूर्ति की मुआवजा राशि कलेक्टरों के द्वारा जमा नहीं करया जाना किसानों के साथ न सिर्फ अन्याय है अपितु उनका अपमान एवं प्रताड़ना भी हैं। 96 तहसीलों के किसानों को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति मुआवजा राशि व्यापक सूखे के मुकाबले “ऊंट के मुंह में जीरा” के समान है। वह भी किसानों को अप्राप्त है।पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने यह भी कहा कि अब बरसात में सिर्फ दो माह शेष है और किसानों को खरीफ फसल की पुनः तैयारी करना है। ऐसी दशा में राशि उपलब्ध होने के बाद भी सुनियोजित षडयंत्र के तहत आवंटन की प्रतिक्रिया जानबूझ कर प्रारंभ नहीं की जा रही है। ताकि विकासयात्रा में निकले रमन सिंह बटन दबाकर किसानों के खाते में राशि भेजने का नाटक कर पूर्व की भाति एक बार पुनः छल सकंे। यदि सरकार किसानों की सच्ची हमदर्द है तो घोषित 96 तहसीलो में फसल अति पूर्ति, फसल बीमा की पूर्ण क्षति पूर्ति राशि व कर्ज माफी कर किसानों को आर्थिक संकट से उबारे। बैंको से किसानों की सूखा राहत राशि से मिलने वाले ब्याज का सरकार दोहन करना चाहती हैं। साफ जाहिर है कि सरकार किसानो को लेकर संवेदनहीन है और किसानों की विपदा से उन्हें कोई सरोकार नहीं हैं। धनेन्द्र साहू ने सवाल किया कि आखिर राशि किसानों को देने में इस असहनीय विलंब का क्या कारण है? क्या यहां भी भ्रष्टाचार एवं कमीशनखोरी तलाशने की कोशिश हो रही है? किसानों की समस्या को लेकर जिस धीमी गति एवं भारी मन से सरकार कार्य कर रही है, रमन सरकार का किसान विरोधी चरित्र उजागार हो गयी। 

 

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