स्मार्ट सिटी के झुनझुने की पहली किश्त 36 करोड़

०० पहली किश्त के रूप में बिलासपुर को मिलने थे 200 करोड़ मिले सिर्फ 36 करोड़

०० स्मार्ट सिटी की सुचीं में शमिल होने के लिए नगर निगम ने की थी ताबड़तोड़ बैठके

बिलासपुर। स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल होने के 9 माह बाद बिलासपुर नगर निगम को 36 करोड़ रुपये की पहली किश्त मिली किन्तु अभी यह राशि निगम के खाते में नही आई है और राज्य सरकार के पास जमा है। स्मार्ट सिटी परियोजना में कुल राशि 3966.62 करोड़ रुपये मिलेगा। जिसकी पहली किश्त के रूप में 200 करोड़ रुपये मिलने थे किन्तु बिलासपुर को इस खाते से सिर्फ 36 करोड़ रुपये प्राप्त हुआ।

स्मार्ट सिटी की सुचीं में शमिल होने के लिए नगर निगम ने ताबड़तोड़ बैठके की थी सरकारी-गैरसरकारी विशेषज्ञों को बुलाकर अपने फंड से लाखों रुपये खर्च किया यहां तक की मोबाईल एप के माध्यम से वोटिंग भी कराई। मंत्री-संत्री के प्रयास के बाद केन्द्रीय शहरी विकास प्राधिकरण ने 23 जून 2017 को बिलासपुर शहर को देश में बनने वाले 100 स्मार्ट शहर में शामिल किया। तब शहर के नागरिकों को लगा की बस अब तो शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना का 3966 करोड़ रुपये बस आया ही समझों। हर तरफ विकास की गाथा लिखि जाएगी। पुरा शहर वाईफाई हो जाएगा। साथ ही मल्टी लेबल पार्किंग की दिलकश व्यवस्था बनेगी। माॅल तथा सितारा हाॅटले रात दो बजे तक खुंलेगी। किन्तु 23 जून से 20 अप्रेल 2018 तक बीएससीएल (बिलासपुर स्र्माट सिटी लिमिटेड) की दो बैठके हुई। जिसकी पहली बैठक में 293 करोड़ के खर्च के लिए सहमति बनी तथा दूसरी बैठक में एक कंसलटेंट नियुक्त करने के लिए टेंडर हुआ। इस ग्लोबल टेंडर में केवल दो कंपनियां आई जिन्होंने रायपुर में अपना प्रजंटेशन दिया। अभी निगम को दो सौ करोड़ की पहली किश्त का 25 प्रतिशत भी प्राप्त नही हुआ है। जो 36 करोड़ रुपये केन्द्र सरकार ने दिए है वे राज्य सरकार के पास आए है। स्मार्ट सिटी की कुल योजना 5 साल की है जिसका डीपीआर अभी नही बना है। 3966.62 करोड़ के प्रोजेक्ट में 5 सौ करोड़ रुपये केन्द्र सरकार देगी। 5 सौ करोड़ राज्य सरकार देगी। 1100 करोड़ रुपये अन्य योजनाओं से प्राप्त होंगे। 1500 करोड़ रुपये पीपीपी माॅडल से अर्जित किए जाएगंे। 

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