वेदपरसदा का तालाब ही नही बोर भी सूखा, पानी के लिए परेशान है ग्रामीण

०० भुमिगत नाले के जरिये पानी की समस्या का हो सकता है समाधान लेकिन फसे है कई पेंच

०० ग्रामीण पानी के तरस रहे है और लाफार्ज फैक्ट्री में किया जा रहा बोर का अवैध खनन

बिलासपुर। जनपद पंचायत मस्तुरी के ग्राम परसदा में इन दिनो पानी के लिए हाहाकार मचा है। गांव का तालाब सुख गया है यह अप्रेल माह के दूसरे सप्ताह में ही जवाब दे गया। ऐसे में एक राहत पीएचई का बोर बन सकता था किन्तु वह भी पिछले 15 दिनों से हवा फेक रहा है। एक मोहल्ले के नागरिक उन मोहल्लों में जाते हैजहां नीजि नल कूप लगे है, इन्हीं से गांव के सभी लोगो का गुजारा हो रहा है। वेदपरसदा के नागरिको ने बताया की गांव के पास ही डीपीएस स्कूल स्थित है और तालाब में पानी न होने का जिम्मेदार भी यही स्कूल है। जानकारी प्राप्त करने पर ज्ञात हुआ की तालाब में पानी लाने के लिए नहर के माध्यम से एक कोशिश हो रही थी। नहर से तालाब में पानी डालने के लिए एक नाला बनना था जो नहर को तालाब से जोड़ देता किन्तु यह नाला डीपीएस स्कूल के खेल मैदान से गुजरने वाला था। इसी कारण स्कूल प्रबेधन ने भुमिगत नाले का काम बंद करा दिया। बाद में ग्राम पंचायत ने पीएचई के सामने दबाव डाला तब मामला भुमिगत नाले को लेकर स्वीकृति के लिए भेजा गया। जिससे इसकी लागत बढ़ गई। बढ़ी हुई धन राशि के लिए बजट जरूरी इसीलिए नहर के पानी से तालाब का में पानी भरने का काम लगातार आगे बढ़ रहा है और तालाब में पानी न होने के कारण गांव का बोर भी सुख गया। ऐसे में गांव में पानी के लिए पीएचई का बोर ही उम्मीद की किरण है।

पीने के पानी को तरस्ते ग्रामीण उद्योग के लिए लाफार्ज कर रहा अवैध बोरिंग :- एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों के तालाब सुख रहे है तालाबों के सुखने का असर बोर पर पड़ रहा है बोर दम तोड़ रहे है वहीं क्षेत्र के बड़े औद्योगिक केन्द्र बाहर से मेहंगी और आधुनिक मशिन बुलाकर अपने परिसर में नए गहरे और बड़े औद्योगिक पंप वाले बोर करा रहे है। इन्हें कराने के लिए कंपनी आवश्यक अनुमति भी प्राप्त भी नही कर रही है। जिला दंडाधिकारी ने वर्ष 2017 में ही सुखे की स्थिति को देखते हुए नीजि क्षेत्र में नए बोर पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह प्रतिबंध आज भी जारी है और इस पर किसी तरह की शिथिलता नही दी गई है। इस नियम के बावजूद मस्तुरी का लाफार्ज प्रबंधन अपने परिसर में बड़े बोर करा रहा है। एक तरफ गांव में मानव एवं पशुधन को निस्तार का पानी नही मिल रहा है और दूसरी ओर औद्यागिक कंपनियां नियमों को धत्ता दिखा कर भुमि के गर्भ से मनमर्जी पानी निकाल रही है। जिला प्रशासन के उत्तरदायी अधिकारी अवैध बोरिंग पर सख्त कार्यवाही की बाते करके अपना कत्वर्य पुरा कर लेते है।

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