कांग्रेस के दबाव में एससी, एसटी एस्ट्रोसीटी एक्ट के मामले में रमन सरकार ने लिया यू टर्न : भूपेश बघेल

०० छत्तीसगढ़ प्रभारी पी.एल. पुनिया ने किया था विरोध, केंद्र की फटकार के बाद रमन ने लिया आदेश वापस

०० बीजेपी सरकार ने जानबूझकर निकाला आदेश, भाजपा का दोहरा चरित्र उजागर

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि पहले के उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद पूरे देश भर में आंदोलन हुआ जिसमें 10 से अधिक लोगो की मौत हो गई, उसके बाद केंद्र सरकार में जो कानून मंत्री है रविशंकर प्रसाद उन्होंने कहा था कि इस आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट जायेगी और सरकार ने याचिका लगायी भी उसके बावजूद छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक अधिकारी के द्वारा सर्कुलर जारी किया जाता है माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश पर आदेश निकाली जाती है। जो सर्कुलर है, दिल्ली हमारे पार्टी हाईकमान को भेजा गया है। वहां हमारे छत्तीसगढ़ प्रभारी एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता पी.एल. पुनिया ने पत्रकारवार्ता लेकर इसका विरोध किया और जब वहां से फटकार पड़ी मुख्यमंत्री रमन सिंह को तब यहां आज पत्रकारो को बुलाकर उन्होंने कहा कि इस आदेश को हम वापस लेते है। सवाल इस बात का है यदि आदेश रमन सिंह जी के बिना जानकारी के जारी किया गया है तो फिर रमन सिंह को अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करना चाहिये। यदि ऐसा नहीं है यदि रमन सिंह कार्यवाही नही करते है तो यहीं माना जायेगा कि रमन सिंह के संज्ञान में ये बात रही है।

भूपेश बघेल ने कहा कि यदि बीजेपी सरकार ने जानबूझ के आदेश निकाला है तो भाजपा का दोहरा चरित्र उजागर हो गया है। क्योकि जिस प्रकार से मोहन भागवत, एमजी वैद्य के लगातार आरक्षण विरोधी बयान बाजी कर रहे है उससे स्पष्ट हो जाता है कि भाजपा और आरएसएस आदिवासी विरोधी है, अनुसूचित जाति विरोधी है और लगातार उनके अधिकारो में कटौती करने का षडयंत्र भाजपा कर रही है। यह षडयंत्र अब उजागर हो चुका है और अनुसूचित जाति-जनजाति के हितैषी बनने और दिखने की ये भले ही कोशिश कर रहे है लेकिन भाजपा और आरएसएस का जो असली चेहरा है वो सामने आ चुका है। जिस प्रकार से विधानसभा में आदिवासियों के जमीन खरीदने के लिये आपसी सहमति के लिये जो बिल लाया था, हम लोगो ने वहां भी विरोध किया था और जब आदिवासी समाज खड़ा हुआ कांग्रेस पार्टी ने सड़को में विरोध किया तो भाजपा सरकार को उसको वापस लेना पड़ा। उसी प्रकार से जनसुनवाई हो रही थी महाराष्ट्र गर्वमेंट को कोल ब्लाक ऐलाॅट हुआ था, वहां भी अनुसूची पांच क्षेत्र में आता है वह क्षेत्र वहां भी विरोध हुआ। उस जनसुनवाई को रमन सरकार ने निरस्त किया। ये पंचायती राज के भी विरोधी है। भाजपा सरकार 600 करोड़ रू. अपने मित्र को लाभ पहुंचाने के लिये पंचायतों के पैसो को अपने खाते में डाल चुके थे। हम लोगो ने विरोध किया तो फिर वापस लिया। लगातार ये अपने लोगो को जाते-जाते लाभान्वित करने में लगे है। अनुसूचित जाति-जनजाति की हितैषी आरएसएस और भाजपा कभी रही ही नहीं और कभी हो ही नहीं सकती है। इनका हिडन ऐजंेडा बार-बार उभर आता है और उसके हिसाब से ये कार्यवाही कर देते है और जब लगता है इससे नुकसान हो जायेगा तो उसे वापस लने के लिये मजबूर हो जाते है। केंद्र सरकार अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के मामले में सुप्रीम कोर्ट गयी लेकिन सरकार उसमें स्टे लेने में असफल रही है रोक लगाने में असफल रहीं है और छत्तीसगढ़ में इसको लागू भी कर दिया गया। ये जो आरएसएस और भाजपा का ऐजेंडा है, दलित विरोधी और आदिवासी विरोधी चेहरा है वह बेनकाब हो चुका है। नोटो की कमी से छत्तीसगढ़ और पूरे देश में हो रही है तकलीफ छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देशभर में नोटो की कमी हो गयी है, लोग दबा रहे है या भाजपा के लोग दबा रहे है या चुनाव के लिये दबा के रखे है, लेकिन बाजार से नोट गायब हो गये है। भाजपा का कैशलेश इकानामी की बात विफल हो गयी है। आज जितने नोट नोटबंदी के पहले थे उतने नोट बाजार में होने के बाद भी नोट की कमी हो गयी है। बस्तर जैसे सुदुर अंचल में दंतेवाड़ा के गांवों में सरकार कहती थी कि कैशलेश की व्यवस्था है, जहां नेट भी नहीं वहां भी तो इस प्रकार से जुमले बाजी भाजपा सरकार करती रहती है। आज जो स्थिति बन रही है वह भायनक है। सरकार के कब्जे में कोई बात रही नहीं है और देश में आर्थिक अराजकता की स्थिति बन चुकी है। 

 

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