एनटीपीसी प्रभावित ग्राम पंचायतों को गोद लेने का झांसा देकर क्षेत्र में उगल रहा जहर

०० ग्रीन बेल्ट एवं एसईसीआर मद  के नाम पर किया जाता हैं प्रतिवर्ष करोड़ो का घोटाला

बिलासपुर। नेशनल थर्मल पावर कापोरेशन सीपत द्वारा अपने ही वादों को पुरा न करने की आदत से अब जिले के नागरिक खफां है। एनटीपीसी प्रभावित गांव में युनिट ने अपने बड़े वादे को छोड़ भी दे तो छोटे-छोटे काम भी नही किए, यहां तक की हैंडपंप के पास पानी की उचित निकासी का प्रबंध भी नही किया गया। एक बार गांव के अंदर सीसी रोड बना देने के बाद दुबारा वहां मूड़ कर भी ना देखना प्रबंधन की आदत में शुमार हो गया है।

एक वक्त जिन स्कूलो को गोद लेकर प्रबंधन और उत्पादन ईकाई के महिला क्लब शान से फोटो खिचाते थे उन्ही स्कूलों को अब साधारण ब्लैक बोर्ड भी हासिल नही है। इसके अतिरिक्त एनटीपीसी ने बिलासपुर सीपत मार्ग पर लगरा गांव से सीपत तक हजारों की संख्या में पौध रोपण का दावा किया था इसके एवज में वर्ष 2002-03 में औद्योगिक वृक्षारोपण निगम को लाखों का भुगतान भी हुआ है। किन्तु इस क्षेत्र में हरियाली का जैसा दावा किया गया था वैसा प्रभाव नही दिखता। इसी तरह एनटीपीसी के प्रभावित गांव में तो लोगो का रात दिन का खाना भी दुश्वार हो गया है। प्रभावित गांव की संख्या देखने के लिए मात्र आठ की संख्या में है किन्तु यहां के परिवारों का कष्ट इतना ज्यादा है कि यदि उन्हें इस उत्पादन ईकाई में नौकरी की आस नही होती और उचित प्रतिफल मिला होता तो यह आठों गांव विस्थापित हो चुके होते। वर्ष 1995 की भू-अर्जन प्रक्रिया में जमीन के बदले मुआवजा तथा नौकरी यही दो विकल्प थे। उस वक्त एनटीपीसी के विरूद्ध आंदोलन कर रहे सामाजिक नेताओं ने यही मांग की थी कि प्रभावित गांव के नागरिकों को अन्य स्थान पर खेती योग्य जमीन दी जाए। किन्तु उस वक्त नियम न होने कारण ऐसा नही हुआ।

काल के गाल में समा रहे बेजुबान जानवर :- एनटीपीसी क्षेत्र में नागरिकों के अतिरिक्त पशुधन की अपूर्णिय क्षति होती है। गांव में प्राकृतिक रूप से हरा चारा लगभग समाप्त है। किसान पशुओं को घर पर बांध कर चारा नही दक सकते इसलिए चरने के लिए बाहर भेजना उनकी मजबूरी है। इसी कारण अधिक्तर पशु राखड़ डेम के आसपास चरने पहुंच जाते है और उनमें से कई काल के गाल में समा जाते है। 

अग्नि सुरक्षा सप्ताह का एनटीपीसी द्वारा किया जा रहा ढकोसला :- अग्नि सुरक्षा का एनटीपीसी द्वारा 14 अप्रेल से 20 तक सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है, जबकि छेत्र के किसान और प्रभावित ग्रामवासी का जीना दूभर हो गया हैं, सांथ ही आसपास ग्राम पंचायतों के हाल बेहाल है, मुआवजा तो दूर की बात कई किसान और उनके पुत्रो रोजगार तक मिलना मुश्किल है, कई राजनीतिक पार्टी केवल अपना रोटी सेकने का काम किया हैं, किसानों के तकलीफ से कोई सरोकार नही हैं|

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