संसदीय सचिवों के मामले में लगायी गयी याचिका हाई कोर्ट ने की ख़ारिज

०० कोर्ट ने आदेश में कहा था कि इन्हें मंत्रियों वाले कोई अधिकार अथवा सुविधा नही मिलेगी 

रायपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट में संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती देते हुए लगाई गई याचिकाओं पर हाईकोर्ट का फैसला आ गया है, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। हालांकि कोर्ट ने यह कहा है कि अंतरिम आदेश स्थाई रूप से जारी रहेगा। अंतरिम आदेश में कोर्ट ने कहा था कि इन्हें मंत्रियों वाले कोई अधिकार अथवा सुविधा नही मिलेगी। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि संसदीय सचिव पद जो कि मंत्री के समतुल्य है, उसे राज्यपाल ने शपथ नही दिलाई, ना ही उनका निर्देशन है, इसलिए इन्हें मंत्रियों के कोई अधिकार प्राप्त नही हो सकते।

संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती देते हुए कांग्रेस के मो. अकबर ने दो याचिकाएं और रायपुर के राकेश चौबे ने जनहित याचिका लगाई थी। अगस्त में हाईकोर्ट ने संसदीय सचिवों के मंत्री के तौर पर कार्य करने पर रोक लगा दी थी, लेकिन इसके बाद भी उन्हें सभी सुविधाएं देने का आरोप लगाते हुए राकेश चौबे ने अवमानना याचिका लगाई थी। सभी पर एक साथ सुनवाई हुई। 16 मार्च को सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। शुक्रवार को इस मामले में फैसला आ गया। हाईकोर्ट ने 1 अगस्त को संसदीय सचिवों के मंत्री के रूप में कार्य करने पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि संविधान में मंत्री परिषद का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री इसके प्रमुख होंगे, जिनकी नियुक्ति राज्यपाल करेंगे। मुख्यमंत्री की अनुशंसा पर राज्यपाल ही मंत्रियों की नियुक्ति करेंगे। संविधान में 91वें संशोधन के द्वारा प्रावधान निर्धारित किया गया है कि राज्य की विधानसभा के सदस्यों से 15 फीसदी ही मंत्री परिषद में शामिल किए जा सकेंगे, इसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। वर्तमान में अंबेश जांगड़े, लाभचंद बाफना, लखन देवांगन, मोतीराम चन्द्रवंशी, रूपकुमारी चौधरी, शिवशंकर पैकरा, सुनीति सत्यानंद राठिया, तोखन साहू, चंपा देवी पावले, गोवर्धन सिंह मांझी और राजू सिंह क्षत्री को संसदीय सचिव हैं।

 

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