नंदकुमार साय ने पोलावरम के  कॉन्ट्रैक्टरों के कहने पर, सांठगांठ कर, पोलावरम का लिया पक्ष : अमित जोगी

०० नंदकुमार साय संवैधानिक पद पर विराजमान होकर पोलावरम बाँध के कॉन्ट्रैक्टरों के एजेंट की तरह कर रहे हैं बात

०० नंदकुमार साय शपथ-पत्र लिख कर दें कि सुकमा कोंटा के प्रभावित आदिवासियों के साथ हुआ है न्याय

रायपुर| मरवाही विधायक अमित जोगी ने राष्ट्रीय जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंदकुमार साय को आदिवासी विरोधी बताते हुए कहा कि नंदकुमार साय पोलावरम के  कॉन्ट्रैक्टरों के कहने पर, उनसे सांठगांठ कर, पोलावरम का पक्ष लिया और छत्तीसगढ़ सरकार के विरोध को न्यायिक तौर पर कमजोर किया। ओडिशा में पोलावरम के विषय पर एक प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंदकुमार साय पोलावरम का विरोध करते हैं और कहते हैं कि आदिवासियों को विस्थापित तब तक नहीं किया जाना चाहिए जब तक कि कोई वैकल्पिक व्यवस्था न हो जाए। वो हीराकुंड बाँध का उदहारण भी देते हैं और कहते हैं कि उस दौरान बेघर हुए आदिवासियों का आज तक कोई अता पता नहीं चला। 19 जनवरी को अपने इस पोलावरम विरोधी ब्यान के लगभग ढाई महीने बाद 30 मार्च 2018 को नंदकुमार साय जी आन्ध्रा के पोलावरम जाते हैं, वहां अधिकारियों और मंत्रियों से मिलते हैं और साथ ही सत्तर हज़ार करोड़ की इस पोलावरम परियोजना को बना रहे कॉन्ट्रैक्टरों से भी मिलते हैं। उनसे चर्चा करते हैं। 

मरवाही विधायक अमित जोगी ने कहा कि अब सवाल ये उठता है कि, ढाई महीने पहले नंदकुमार साय आदिवासियों के विस्थापन की कोई व्यवस्था नहीं होने की बात कर रहे थे और पोलावरम का विरोध कर रहे थे और फिर ढाई महीने बाद, आन्ध्रा जाकर कहते हैं कि पोलावरम विश्व का सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट है, पोलावरम सुंदर है। यही नहीं, नंदकुमार साय अपनी संतुष्टि व्यक्त करते हुए प्रभावित आदिवासियों के प्रसन्न होने के दावे करते हैं, यहाँ तक कहते हैं कि पोलावरम, प्रभावित आदिवासियों के जीवन में नए रंग लाएगा। वो इस बात को भी दावे के साथ कहते हैं कि आंध्रा प्रदेश सरकार, छत्तीसगढ़ के प्रभावित आदिवासियों को बहुत खुश रख रही है। यानि नंदकुमार साय जी के अनुसार पोलावरम को लेकर सब कुछ बढ़िया है, सब कुछ अच्छा है। पोलावरम सर्वश्रेष्ठ है, सब प्रसन्न हैं, कहीं कोई समस्या नहीं है। छत्तीसगढ़ की ढाई करोड़ जनता विशेषकर सुकमा कोंटा के प्रभावित लोग तो व्यर्थ में ही विरोध कर रहे हैं। 

झूठ बोलकर भ्रमित कर रहे हैं नंदकुमार साय:- अमित जोगी ने कहा कि  नंदकुमार साय छत्तीसगढ़ को और देश को झूठ बोलकर भ्रमित कर रहे है। नंदकुमार साय राष्ट्रीय जनजाति आयोग के अध्यक्ष के संवैधानिक पद पर विराजमान होकर पोलावरम बाँध बनाने वाले कॉन्ट्रैक्टरों के एजेंट की तरह बात कर रहे हैं। राष्ट्रीय जनजाति आयोग का काम भारत में निवासरत विभिन्न जनजातियों के हितों और अधिकारों की रक्षा करना है, न की किसी प्रोजेक्ट को “विश्व का सर्वश्रेष्ठ ” होने का सर्टिफिकेट देने का। जो की नंदकुमार साय जी ने पोलावरम मामले में किया है। सत्तर हज़ार करोड़ का पोलावरम बाँध बना रहे कॉन्ट्रैक्टरों ने राष्ट्रीय जनजाति आयोग के अध्यक्ष को अपनी ओर प्रभावित किया है ताकि उच्चतम न्यायलय में छत्तीसगढ़ सरकार और प्रभावित आदिवासियों के पक्ष को कमजोर किया जा सके। आँध्रप्रदेश सरकार साय के समर्थन को अपने ढाल के रूप में न्यायालय में प्रस्तुत करेगी। अमित जोगी ने कहा कि मैं कोई हवा में आरोप नहीं लगा रहा हूँ बल्कि पूरी प्रमाणिकता के साथ राष्ट्रीय जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंदकुमार साय जी के दोगले और आदिवासी विरोधी चरित्र को छत्तीसगढ़ और देश की जनता के समक्ष उजागर कर रहा हूँ। 

अमित ने दी नंदकुमार साय को चुनौती :- अमित जोगी ने नंदकुमार साय को चुनौती देते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर रहकर, बिना किसी ठोस जानकारी और प्रमाण के पक्ष रखना कानूनी जुर्म और अपराध है, मैं नंदकुमार जी को चुनौती देता हूँ कि अगर वो सच्चे हैं तो छत्तीसगढ़ की जनता के समक्ष यह शपथ-पत्र लिख कर दें कि सुकमा कोंटा के प्रभावित आदिवासियों के साथ न्याय हुआ है, जनसुनवाई हुई है और पोलावरम से छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़वासियों को कोई नुक्सान नहीं होगा। वो ऐसा करेंगे नहीं क्योंकि आंध्रा जाकर वो प्रभावित बस्तरवासियों के भविष्य का सौदा जो कर आये हैं। नंदकुमार साय जी ने केवल आदिवासियों के नाम पर ढोंग और स्वार्थ की राजनीति की है। आंध्रा प्रदेश की सरकार ने पोलावरम के कॉन्ट्रैक्टरों के माध्यम से राष्ट्रीय जनजाति आयोग के पक्ष को खरीद लिया है। आज उसी का परिणाम है कि राष्ट्रीय जनजाति आयोग का अध्यक्ष छत्तीसगढ़ से होने के बाद भी, छत्तीसगढ़ के हितों की अनदेखी हो रही है और आंध्र प्रदेश का हित साधा जा रहा है, पोलावरम को देश का नहीं बल्कि विश्व का सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट बताया जा रहा है।

अमित ने राज्य सरकार से की जांच की मांग :- हम राज्य सरकार और केंद्र सरकार से यह मांग करते हैं कि वो नंदकुमार साय के आंध्रा दौरे की जांच करे, उनसे मिलने वाले लोगों की पहचान सार्वजनिक की जाए । साथ ही हम मुख्यमंत्री से यह मांग करते हैं कि वो राष्ट्रीय जनजाति आयोग के अध्यक्ष के पोलावरम समर्थित दावों और ब्यान पर आधिकारिक तौर पर अपना कड़ा विरोध दर्ज करे और इस संबंध में केंद्र सरकार और महामहिम राष्ट्रपति को अवगत कराये।

अमित जोगी ने किये नंदकुमार साय से पूछे पांच सवालो के जवाब

अमित ने अपने पहले सवाल में कहा कि 30 मार्च 2018 को आंध्र प्रदेश में ऐसा क्या हुआ जिसके बाद पोलावरम को लेकर आपके सुर ही बदल गए ? ढाई महीने पहले विस्थापन पर संशय व्यक्त किया था और ढाई महीने बाद अचानक संतुष्टि ? क्या ढाई महीने में ही प्रभावितों को न्याय मिल गया और उनकी समस्यायों का निदान हो गया ?

  1. आप सुकमा और कोंटा जाकर अब तक छत्तीसगढ़ के प्रभावितों से क्यों नहीं मिले ? बिना सुकमा और कोंटा गए, बिना प्रभावित आदिवासियों से मिले, आपने आंध्रा जाकर आखिर किस आधार पर यह वक्तव्य दिया और दावा किया कि विस्थापन और बाँध का कार्य संतोषजनक है ?
  2. संविधान के अनुच्छेद 338क के खण्ड (5) के उपखण्ड (क) में निर्दिष्ट किसी विषय का अन्वेषण या उपखण्ड (ख) में निर्दिष्ट किसी शिकायत की जाचं करते समय राष्ट्रीय जनजाति आयोग को एक सिविल न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त हैं। आपने बगैर सुकमा और कोंटा गए, बिना प्रभावितों से वार्तालाप किये, बिना किसी साक्ष्य के या दस्तावेजों के, किस आधार पर पोलावरम के पक्ष में यह सार्वजनिक वक्तव्य दिया कि आंध्रा के अधिकारी अच्छे से प्रभावितों का ध्यान रख रहे हैं ? जबकि ये जानते हुए भी कि आप एक संवैधानिक पद पर विराजमान हैं और विशेष तौर पर उच्चतम न्यायालय में चल रहे पोलावरम मामले में संवेदनशीलता को देखते हुए आपके वक्तव्य या दावे का न्यायिक महत्व है।    
  3. आपने आंध्रा प्रदेश में कहा कि पोलावरम बाँध से सभी राज्य लाभान्वित होंगे ? छत्तीसगढ़ कैसे लाभान्वित होगा, ये बताईये ?
  4. क्या आंध्रा प्रदेश, बाँध की ऊंचाई कम करने राजी हो गया है ? मुआवज़े की रकम किस आधार पर तय हुई है ? क्या छत्तीसगढ़ में जन सुनवाई पूरी और विधिवत हो चुकी है ? प्रभावितों का विस्थापन कहाँ किया जा रहा है ? कितनी सिंचित भूमि आदिवासियों को मिलेगी ? आपको यह सब ज्ञात होगा, तभी आपने दावा किया है कि पोलावरम सर्वश्रेष्ठ है और आदिवासियों के जीवन में नए रंग लेकर आएगा और वो प्रसन्न हैं पोलावरम से। तो कृपया कर, क्या आप छत्तीसगढ़ के लोगों विशेषकर छत्तीसगढ़ सरकार को अपने इन दावों की विस्तृत जानकारी देंगे ? क्योंकि आपके दावों और अवलोकन के विपरीत छत्तीसगढ़ सरकार तो पोलावरम का विरोध कर रही है।

 

 

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