रमन सिंह ने उद्योगों और शहरी विकास के नाम पर किया कृषि भूमि को किसानों से छीनने और हड़पने का काम : कांग्रेस

०० अगस्त, 2013 के बाद से कृषि भूमि के ऐसे सभी सौदे शून्य घोषित हों जिसमें ख़रीददार ग़ैर कृषक है : भूपेश बघेल

०० कानून बना लेकिन रमन सरकार ने 5 साल में कृषि भूमि की ख़रीदी बिक्री का नियम नहीं बनाया

००  कांग्रेस ने लगाया भू-माफ़िया से मिलीभगत का आरोप कहा, सरकार की ओर से विधानसभा में भी झूठी जानकारी दी गई

रायपुर| कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि पिछले 15 सालों में रमन सिंह ने उद्योगों और शहरी विकास के नाम पर कृषि भूमि को किसानों से छीनने और हड़पने का काम किया है, इससे किसानों की हालत लगातार ख़राब हुई है। किसान की संख्या घटती जा रही है और वे मज़दूर बनते जा रहे हैं। भाजपा सरकार ने कृषि भूमि को लेकर संविधान और क़ानून सबको ताक पर रखकर अपने कारोबारी मित्रों को फ़ायदा पहुंचाने का काम किया है।इसका सबसे बड़ा उदाहरण कृषि भूमि को बेचने के मामले से जुड़ा है।

सरकार ने यह क़ानून संशोधन करके वाहवाही लूटी कि छत्तीसगढ़ में किसानों की ज़मीन सिर्फ़ किसान ही ख़रीद सकते हैं। दस्तावेज़ बताते हैं कि इसके बाद सरकार ने अवैध तरीक़े से इस क़ानून के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी और कृषि भूमि धड़ल्ले से बिकने लगी और जब इस पर सवाल उठे तो सरकार की ओर से विधानसभा तक में झूठी जानकारी दी गई।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने रमन सरकार पर आरोप लगाते हुए पत्रकारवार्ता में कहा कि 17 जुलाई 2013 को विधानसभा में छत्तीसगढ़ भू राजस्व अधिनियम की धारा 165 में संशोधन विधेयक पारित किया गया। इस संशोधन के माध्यम से धारा 165 में एक उपधारा 4 (क) जोड़ी गई, इस संशोधन में कहा गया कि कृषि भूमि का किसी ग़ैर कृषक को नहीं बेची जा सकती। इस प्रावधान के क्रियान्वयन के लिए नियम बनाने और उसे अधिसूचित करने के लिए राज्य को अधिकृत कर दिया गया। 16 अगस्त 2013 को राज्यपाल की स्वीकृति मिली और इसके बाद 19 अगस्त 2013 को राजपत्र में इसका प्रकाशन भी हो गया। अगर विधेयक पारित हो गया था और क़ानून बन गया था तो तत्काल प्रभाव से कृषि भूमि का विक्रय किसी ग़ैर कृषक को बेचने पर प्रतिबंध लग जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा होता इससे पहले 17 सितंबर 2013 को राज्य सरकार के एक सचिव स्तर के अधिकारी ने राज्य के सभी कलेक्टरों को एक परिपत्र भेजकर कहा कि फिलहाल यह क़ानून लागू नहीं है और कृषि भूमि की ख़रीद बिक्री पूर्व की तरह होती रहेगी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव के हस्ताक्षर से जारी परिपत्र में कहा गया कि चूंकि नियम बनाने में समय लगेगा इसलिए फ़िलहाल यह क़ानून लागू न माना जाए। अब पांच साल बीत वाले हैं. रमन सिंह जी की मुस्तैद सरकार पांच साल में भी नियम क्यों नहीं बना सकी और कृषि भूमि हड़पने का सिलसिला लगातार जारी है यानी क़ानून के अमल पर रोक अभी भी प्रभावी है,लेकिन शर्मनाक बात है कि सरकार इस संबंध में विधानसभा के भीतर भी झूठ बोल रही है। भूपेश ने कहा कि मार्च 2015 में कांग्रेस विधायक मोतीलाल देवांगन ने विधानसभा में एक प्रश्न किया था और राजस्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडे ने स्पष्ट रूप से कहा था कि 165 में एक उपधारा 4 (क) के क्रियान्वयन को किसी तरह से निष्प्रभावी नहीं किया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्य सरकार से सवाल करते हुए कहा कि सबसे बड़ा सवाल है कि क्या विधानसभा द्वारा पारित क़ानून को लागू करने से रोकने का अधिकार सचिव स्तर के एक अधिकारी को है? अगर नियम बनाते तक ही क़ानून पर अमल रोकना था तो क्या कारण है कि पांच साल में भी क़ानून नहीं बनाया गया? अगर क़ानून 19 अगस्त 2013 से प्रभावी हो गया था तो क्या उसके बाद से कृषि भूमि को ग़ैर कृषकों द्वारा ख़रीदे जाने के जितने भी सौदे हुए हैं वे अपने आप शून्य नहीं हो जाएंगे? मुख्यमंत्री रमन सिंह क्या प्रदेश की जनता को बताएंगे कि उनकी सरकार ने पांच साल में भी कृषि भूमि की बिक्री के लिए नियम क्यों नहीं बनाए? मुख्यमंत्री रमन सिंह और राजस्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडे बताएं कि उन्होंने विधानसभा में कांग्रेस विधायक के सवाल के जवाब में झूठ क्यों बोला? क्या यह इरादतन किया जा रहा है? क्या यह रमन सिंह, उनके मंत्रियों, भाजपा के नेताओं – कार्यकर्ताओं और भू माफ़ियाओं के बीच सांठगांठ का नतीजा नहीं है?

 

भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की राजनीति करने का आरोप लगाने की बजाय रमन सिंह अपनी भ्रष्ट सरकार से जुड़े सवालों का जवाब जनता को दें। प्रेस कॉन्फ्रेंस का मज़ाक उड़ाकर रमन सिंह दरअसल पत्रकार बिरादरी और मीडिया का माखौल उड़ाते हैं उन्हें नहीं भूलना चाहिए कि मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया है। कांग्रेस मानती है कि रमन सिंह सरकार ने भू माफ़िया से मिलीभगत की वजह से जानबूझकर नियम क़ानून नहीं बनाए। कांग्रेस रमन सरकार से इस बात का भी जवाब चाहती है कि सरकार ने विधानसभा में झूठ क्यों बोला और क्या यह सदन को गुमराह करने और विशेषाधिकार हनन का मामला नहीं है? कांग्रेस मांग करती है कि 19 अगस्त 2013 के बाद से कृषि भूमि के जो भी सौदे ग़ैर कृषकों द्वारा किए गए हैं उनके विवरण सार्वजनिक किए जाएं जिससे भू माफ़ियाओं और भाजपा के रिश्ते उजागर हो सकें। ऐसे सभी सौदों को तत्काल शून्य घोषित किया जाएऔर नियम न बनने के लिए दोषी अधिकारियों को तत्काल कड़ी कार्यवाही की जाये।

 

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