अनु.जाति-अनु.जनजाति अधिनियम 1989 को पूर्व की तरह लागू कराने किया गया विरोध प्रदर्शन

०० राष्ट्रपति के नाम पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कोटा को सौपा गया ज्ञापन
करगीरोड कोटा। पूरे भारत में 2 अप्रैल को भारत बंद का आवाहन किए गए थे अनुसूचित जन जाति अनुसूचित जाति के लोग कोटा स्तंभ चौक से लेकर एसडीएम कार्यालय तक पैदल रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया गया एससी-एसटी एक्ट अधिनियम 1989 को फिर से लागू करने के लिए प्रतिवेदन दिए गए पूर्व में यह अधिनियम लागू थी लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा इसको हटा दिया गया है उसको फिर से लागू करने के लिए अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति लोग नारेबाजी व रैली निकालकर खुलकर विरोध की इस रैली में हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ रही।

इस विरोध प्रदर्शन में व्यापारियों से दुकानों को बंद करने के लिए अनुरोध किए गए जिसमें की व्यापारियों ने भी प्रदर्शन कर रहे लोगो का भी साथ दिए। इस रैली में गांव व शहर से लेकर प्रदर्शन करने के लिए लोगों की तादात दिखी इसमें कर्मचारी से लेकर युवा वर्ग व किसान की भी भीड़ इस रैली में शामिल हुए। अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोगों के प्रति जो कानूनी धाराएं लागू थी उसको सुप्रीम कोर्ट के द्वारा फैसला सुनाते हुए निरस्त कर दिए गए थे। उसको जय भीम की सेना ने एस सी / एस टी वर्ग के लोगो ने राज्य स्तर से लेकर जिला व ब्लॉक में भी प्रदर्शन कर्ताओं ने रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किए। उन लोगो की मांग है कि केंद्र सरकार को उनकी बातों को सुनना ही पड़ेगा। महामहिम राष्ट्रपति भारत सरकार, महामहिम राज्यपाल छत्तीसगढ़ शासन, सुप्रीम कोर्ट, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग ,को भी ज्ञापन के माध्यम से अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कोटा को ज्ञापन सौंपा गए। साधेलाल भारद्वाज अध्यक्ष अनुसूचित जाति का कहना है कि अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति की जो एक्ट हैं। उसको लागू किये जायें चूंकि उत्पीड़न के मामले में एस सी/ एस टी एक्ट लगाकर जो कानूनी कार्यवाही की जाती थी।  उससे अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोगों को बहोत ही राहत मिल रही थी। अगर उनकी मांगे पूर्ण नहीं होती है तो 14 अप्रैल को फिर से धरना प्रदर्शन व रैली निकाली जाएगी। इस विरोध प्रदर्शन रैली में दिनेश बंजारे,उत्तम भारद्वाज, राधेश्याम भारद्वाज, चिरंजीव भारद्वाज, परमेश्वर मिरी, नीलेश भार्गव, अशोक जांगडे ,प्रकाश  बंजारे ,मलेश लहरे ,चिंताराम ध्रुव ,प्रभु सिंह जगत,गंगासागर, आदि लोगों की अनुपस्थिति रही।

 

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