वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सोनी की पुस्तक “भेड़िए और जंगल की बेटियां व बदनाम गली” का हुआ विमोचन

०० विमोचन समारोह में मौजूद जनसमूह ने बनाया बिक्री का रिकार्ड 

रायपुर| छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले पत्रकार राजकुमार सोनी की दो पुस्तक भेड़िए और जंगल की बेटियां व बदनाम गली के विमोचन समारोह के मौके पर मौजूद जनसमूह ने पुस्तकों की बिक्री का रिकार्ड कायम किया है। छत्तीसगढ़ के जशपुर, कोरिया, कोरबा, अंबागढ़ चौकी, दल्ली राजहरा, रायगढ़, बिलासपुर राजनांदगांव, दुर्ग- भिलाई, कुम्हारी,धमतरी, राजिम, कुरुद, महासमुन्द, अंबिकापुर- सरगुजा, रायपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कांकेर, बस्तर जगदलपुर के अलावा झारखंड, ओडिशा, नागपुर महाराष्ट्र से काफी बड़ी संख्या में आए हुए लोगों ने उनकी पुस्तकें खरीदी। किसी भी हिंदी लेखक के लिए यह सुखद स्थिति है। संचार क्रांति के खौफनाक दौर में जब पठनीयता खत्म होती जा रही है तब विमोचन समारोह में देश-प्रदेश के कोने-कोने से शिरकत करने आए बुद्धिजीवियों, रंगकर्मियों, संस्कृतिकर्मियों, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह साबित किया कि अभी भी शब्द की सत्ता बरकरार है। सच को सच की तरह लिखने वालों का सम्मान कायम है। 

रायपुर के सिविल लाइन स्थित वृंदावन हॉल में आयोजित समारोह में देश सुप्रसिद्ध आलोचक सियाराम शर्मा ने कहा कि शब्द ठंड से नहीं मरते, कई बार शब्द साहस की कमी से मर जाते हैं और कई बार बेमतलब की नमी से भी दम तोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले महज लिखने की वजह से ही पुलिस ने उनके घर को छावनी में तब्दील कर दिया था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और डटे रहे। देश के जाने-माने उपन्यासकार मनोज रुपड़ा ने कहा कि आज के समय में खड़े रहना ही डटे रहना है। लेखक बसंत त्रिपाठी ने कहा कि लेखक सोनी ने जहां बदनाम गली में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पड़ताल की है वहीं भेड़िए और जंगल की बेटियां नामक पुस्तक में यह बताया है कि छत्तीसगढ़ किस तरह से लूटतंत्र का हिस्सा बन गया है। उपन्यासकार तेजिंदर गगन ने सोनी को मनुष्यता के पक्ष में डटे रहने वाला लेखक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों पुस्तकों में शोषितों- पीड़ितों और वंचितों के लिए खास तरह का प्रेम साफ झलकता है। कथाकार कैलाश बनवासी ने सोनी के कविता- कहानी, नाटक और पत्रकारिता के दौर को याद किया। पत्रिका के राज्य संपादक ज्ञानेश उपाध्याय ने कहा कि अभी भेड़ियों को पकड़ने का काम बाकी है। भेड़ियों को पकड़ने के लिए जिस साहस और तेवर की जरूरत है वह राजकुमार सोनी के पास मौजूद हैं और हमें लेखक के साथ खड़े और डटे रहना है। छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की ओर से आयोजित इस समारोह में इप्टा और कोरस  भिलाई के कलाकारों ने भी जनगीतों की प्रस्तुति से शमां बांध दिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन कल्पना मिश्रा ने किया। सर्वप्रिय प्रकाशन कश्मीरी गेट दिल्ली से प्रकाशित दोनों किताबें फिलहाल अमेजॉन डाट इन में उपलब्ध है और अॉनलाइन मंगवाई जा सकती है। दोनों पुस्तकें रायपुर के पुराना बस स्टैंड स्थित रामचंद्र बुक स्टाल पर भी मौजूद है।

 

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