भदौरा के डामर प्लांट को लेकर फर्जी हस्ताक्षर से तैयार हुआ है सहमति पत्र

०० ग्रामीणों ने की हस्ताक्षर जांच की मांग 

बिलासपुर। मस्तुरी जनपद क्षेत्र के अंतर्गत भदौरा के एक डामर प्लांट का विरोध हालहीं में वहां के ग्रामीणों ने किया था। नागरिकों ने कलेक्ट्रेट आकर निर्धारित समय सीमा में प्लांट बंद ना हाने पर सीधे आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। सुत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्लांट के मालिक जो की इसके पहले भी छल कपट के कारनामों के लिए प्रसिद्ध है। पुरा मामला भदौरा गांव में एक डामर प्लांट लगने को लेकर है। प्लांट चल रहा है और इसके धुंए से क्षेत्र के नागरिक परेशान है। प्लांट के मालिक का कहना है कि उन्होंने पुरी सरकारी औपचारिक्ता के बाद प्लांट को शुरू किया है। ग्रामीणों ने बताया की प्लांट के संबंध में गांव वालों की कभी भी कोई पंचायत नही हुई। वे अपने क्षेत्र में ऐसा प्लांट नही लगाने देंगे,जिसके स्थापना के बाद से भदौरा सहित आसपास गांव के निवासियों को लगातार बीमारियों का सामना करना पड़ रहा हैं। नागरिकों के आंदोलन के चेतावनी की बात प्लांट के मालिक ने धनबल, बाहुबल के साथ अपने दलालों को क्षेत्र में सक्रिय किया और झुटे, बनावटी हस्ताक्षर कर सचिव से संपर्क किया। और भदौरा के सचिव को मोटी रकम देकर  एक पत्र पर्यावरण विभाग के नाम पर तैयार कराया गया हैं। ऐसा बताया जाता है कि यह पत्र पर्यावरण के क्षेत्रिय कार्यालय में जमा हो गया है। जिसमें यह कहा गया है कि नागरिकों को प्लांट से कोई आपत्ती नही है।

“डामर प्लांट का मालिक रोड निर्माण में कर चुका हैं फर्जीवाड़ा,तत्कालिक कलेक्टर द्वारा लगाया जा चुका हैं कनबुच्ची”

भदौरा में जो डामर प्लांट लगा है उसका मालिक इसके पूर्व पीडब्ल्यूडी में भी फर्जी डीडी जमा करने का आरोप झेल चुका है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी ने जब बैंक प्रबंधन से ठेकेदार द्वारा प्रस्तुत किए गए डीडी की असलियत जानने कहा था तब प्रबंधन ने डीडी को नकली बताया था। इसके बाद भी न तो पीडब्ल्यूडी के अधिकारी ने न ही बैंक प्रबंधक ने उक्त ठेकेदार के विरूद्ध ऐक्शन लिया। ठेकेदार सड़क निर्माण के क्षेत्र में स्तरहीन कार्यों के लिए जाना जाता है। बिलासपुर के पुराने हाईकोर्ट के सामने की रोड को लेकर कई बार विवाद हुआ था। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में इसी ठेकेदार के द्वारा इतने भ्रष्टाचार की शिकायत थी कि एक बार कलेक्टर ने कलेट्रेट परिसर में ठेकेदार को कान पकड़ कर खड़े रहने की सजा दे दी थी। किन्तु ठेकेदरा अपने राजनैतिक संबंधों के दम पर हमेशा बच कर निकल लेता है।

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