विकास की दिशा में महासमुंद-गरियाबंद जिलों को लगातार मिल रही अच्छी सफलता, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

०० महासमुंद के शत-प्रतिशत गांवों में पहुंची बिजली, गरियाबंद जिले में 132/33 केव्ही सब स्टेशन बनने पर 684 गांवों को कम वोल्टेज की समस्या से मिली मुक्ति

०० सौर सुजला योजना में गरियाबंद जिला पूरे राज्य में प्रथम, पैरी, महानदी और तेल नदी सहित विभिन्न नदी-नालों में उच्च स्तरीय पुलों का निर्माण

रायपुर| मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश के महासमुंद और नवगठित गरियाबंद जिले की विगत लगभग 14 वर्षाें की उपलब्धियों की तारीफ करते हुए कहा है कि जनता के सहयोग से दोनों जिलों को विकास की दिशा में लगातार अच्छी सफलता मिल रही है। प्रदेश सरकार की योजनाओं का दोनों जिलों में बेहतर क्रियान्वयन हो रहा है। उन्होंने दोनों जिलों की जनता को और वहां के सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी है। डॉ. सिंह ने इस बात पर खुशी जताई कि महासमुंद जिले के शत-प्रतिशत गांवों का विद्युतीकरण जिले के साथ-साथ राज्य सरकार के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में इस जिले में बिजली की सुविधा वाले गांवों की संख्या सिर्फ 1106 थी, जो अब 1136 हो गई है। इसी तरह जिले में विद्युतीकृत बसाहटों की संख्या 1319 से बढ़कर 2493 हो गई है। मुख्यमंत्री ने आज शाम लोक सुराज अभियान के तहत महासमुंद में दोनों जिलों की संयुक्त बैठक लेकर वहां के विकास कार्यों की समीक्षा की।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि यह भी खुशी की बात है कि लगभग छह वर्ष पूर्व 2012 में गठित आदिवासी बहुल गरियाबंद जिले में भी विद्युतीकरण और विद्युत अधोसंरचनाओं के विकास की दिशा में काफी कार्य हुए हैं। इस जिले के ग्राम सढ़ौली में 132/33 के.व्ही. क्षमता के विद्युत सब स्टेशन का निर्माण गरियाबंद जिले के लोगों के लिए वरदान साबित हुआ है। जिले को पांच साल पहले कोमा (राजिम) मगरलोड (जिला-धमतरी) और महासमुंद के तीन 132/33 के.व्ही. उपकेन्द्रों से बिजली की सप्लाई होती थी। इन उपकेन्द्रों की दूरी अधिक होने के कारण कई बार गरियाबंद जिले में बिजली आपूर्ति में ओव्हरलोड की समस्या आ जाती थी। फलस्वरूप विद्युत व्यवधान और कम वोल्टेज के कारण परेशानी होती थी, लेकिन जब चार वर्ष पहले 2014-15 में ग्राम सढ़ौली में 132 /33 केव्ही सब स्टेशन का निर्माण हुआ, तो जिले के सभी 684 गांवों को गुणवत्तापूर्ण बिजली की आपूर्ति होने लगी और गरियाबंद, मैनपुर, फिंगेश्वर और छुरा विकासखंडों में कम वोल्टेज की समस्या पूरी तरह दूर हो गई और सुदूरवर्ती देवभोग विकासखंडों के गांवों में भी बिजली के वोल्टेज में काफी सुधार आ गया है। मुख्यमंत्री ने कहा- यह देखकर काफी संतुष्टि हो रही है कि जिला निर्माण के सिर्फ छह वर्ष के भीतर गरियाबंद जिले में अधोसंरचना विकास के बहुत से कार्य पूरे हुए है, जिनमें जिला मुख्यालय गरियाबंद में 23 करोड़ 33 लाख रूपए की लागत से निर्मित 92 कमरों का संयुक्त जिला कार्यालय भवन (कम्पोजिट बिल्डिंग) भी शामिल है, जिसमें 21 विभागों के जिला स्तरीय कार्यालय एक ही छत के नीचे संचालित हो रहे हैं। नये जिले के मुख्यालय में दो करोड़ रूपए की लागत से जिला पंचायत भवन भी बनवाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा – नया जिला होने के बावजूद वहां की प्रशासनिक मशीनरी ने सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन में बेहतरीन कार्य किया है। राज्य सरकार ने विगत पांच वर्ष में गरियाबंद जिले में सुगम यातायात के लिए नदी-नालों में सात उच्च स्तरीय पुलों का निर्माण किया है। ये पुल पैरी नदी, तेल नदी, महानदी, सूखा तेल नदी, बेलाटजोर नाला, तुआस नाला आदि में बनवाये गए हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में भी छह उच्च स्तरीय पुलों का निर्माण किया गया है। डॉ. रमन सिंह ने कहा – राज्य सरकार की सौर सुजला योजना में गरियाबंद जिले में प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। लगभग डेढ़ साल पहले नवम्बर 2016 में प्रारंभ इस योजना के तहत जिले में अब तक दो हजार से ज्यादा किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पम्प बेहद कम कीमत पर दिए जा चुके हैं। इसके साथ ही 378 किसानों को भी सोलर पम्प देने का कार्य प्रगति पर है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गरियाबंद जिले में 69 हजार से ज्यादा गरीब परिवारों को महिलाओं के नाम पर सिर्फ 200 रूपए के पंजीयन शुल्क में रसोई गैस कनेक्शन, डबल बर्नर चूल्हा और पहला भरा हुआ सिलेण्डर निःशुल्क दिया जा चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विगत दो वर्षाें में 17 हजार गरीब परिवारों को पक्के मकान स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से लगभग 10 हजार मकानों का निर्माण पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री ने महासमुंद जिले में हो रही प्रगति की भी तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि इस जिले में भी अधोसंरचना विकास के कार्य तेजी से हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा  – यह प्रसन्नता की बात है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत महासमुंद जिले में विगत पांच वर्ष में 279 करोड़ रूपए की लागत से 280 पक्की सड़कों का निर्माण किया गया है, जिनकी लम्बाई एक हजार किलोमीटर से ज्यादा है। इन सड़कों के जरिये जिले की 539 ग्रामीण बसाहटों को मुख्य सड़कों से जोड़ा गया है। जिले में इस योजना के तहत 21 करोड़ 64 लाख रूपए की लागत  से आठ बड़े पुलों के निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। इनमें से पांच पुलों का निर्माण पूरा हो गया है। वर्ष 2003 में महासमुंद जिले में नदी नालों पर उच्च स्तरीय पुलों की संख्या सिर्फ 11 थी, जो वर्ष 2016 में बढ़कर 51 हो गई है। इस अवधि में छोटे पुलों की संख्या  39 से बढ़़कर 57 और पुलियों की संख्या 1659 से बढ़कर 2823 हो गई। सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं के तहत महासमुंद जिले में 26 हजार गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत किए गए हैं। महासमुंद जिले में शासकीय पॉलीटेक्निक और वेटनरी पॉलीटेक्निक भी शुरू किया गया है। जिले के सभी पांच विकासखंडों- महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा, बसना और सरायपाली में युवाओं के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई.टी.आई.) भी खोले गए हैं।

 

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