छत्तीसगढ़ के राज्यसभा चुनावों में भाजपा की हुयी है नैतिक हार: भूपेश बघेल

०० विधायक आर.के. राय और सियाराम कौशिक दोनों ने कांग्रेस के साथ किया धोखा, जोगी पार्टी का चरित्र हो गया है जगजाहिर

०० राज्यसभा चुनावों में छत्तीसगढ़ में भाजपा पूरी तरह से विभाजित और खंड-खंड नजर आयी 

रायपुर।  प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि राज्यसभा चुनाव संपन्न हो चुका है और सारी घटना से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ के राज्यसभा चुनावों में भाजपा की नैतिक हार हुयी है। भूषण जांगड़े की टिकट काटने, 25 उम्मीदवारों के नाम का पेनल दिल्ली भेजने और धरमलाल कौशिक के अपमान और सरोज पांडे को भाजपा का राज्यसभा प्रत्याशी बनाने के अर्थ को प्रदेश की जनता ने बखूबी समझती है। राज्यसभा सीट के मामले पर भाजपा की आंतरिक राजनीति की कहानी रही है उसे पत्रकारो से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। भाजपा ने राज्यसभा सदस्य भूषणलाल जांगड़े का टिकट काट कर सरोज पांडे को प्रत्याशी बनाया। सुश्री सरोज पांडे जिन्हें एक ही समय में महापौर, विधायक, सांसद होने का गौरव प्राप्त था, उनको संसद में पिछले दरवाजे से जाने का रास्ता चुनना पड़ा, आम जनता के बीच जाने साहस उनमें नहीं रहा। यह भाजपा की प्रदेश में स्थिति है।

कांग्रेस भवन में पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुये भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस ने लेखराम साहू को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद हमारी संख्या 39 थी। एक अमित जोगी के निष्कासन के बाद हमारी संख्या 38 हो गयी। दो अन्य विधायकों ने अपनी निष्ठा कही और दिखायी पर विधानसभा में व्हिप जारी जब भी होता था आप सब उसके गवाह है कि  आर.के. राय और सियाराम कौशिक दोनों कांग्रेस का साथ देते रहे। राज्यसभा मतदान को लेकर कांग्रेस पार्टी के द्वारा 3-लाईन व्हिप जारी होने के बाद भी दोनों ने कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार लेखराम साहू के पक्ष में मतदान नहीं किया। बहाना क्या था पुनिया जी का बयान, असली मकसद रमन से पैसे कमाना था। पहले कांग्रेस प्रत्याशी लेखराम साहू के पक्ष में मतदान करने की बात कहकर आज छत्तीसगढ़ प्रभारी पी.एल. पुनिया के द्वारा किसी का नाम लेकर नहीं कही गयी बात को खुद अजीत जोगी के नाम से जोड़कर तीन विधायकों ने राज्यसभा चुनाव के लिये मतदान नहीं किया जिससे जोगी पार्टी का चरित्र जगजाहिर हो गया है। सवाल यह है कि 30 जनवरी को माननीय उच्चन्यायालय ने जाति के प्रकरण में निर्णय दिया था 60 दिनों पर फैसले लेने का। 54 दिन बीत चुके है, परंतु राज्य सरकार के द्वारा अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया। जिस अधिकारी ने फैसला दिया उसी अधिकारी को फिर से अजीत जोगी की जाति निर्धारित करने की जिम्मेदारी दे दी गयी है। यही सबसे बड़ा कारण है कि रमन सिंह को खुश करने के लिये इन तीन माननीय सदस्यों ने राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं किया। अंतागढ़ में रमन जोगी द्वारा मिलकर खरीद फरोख्त से लोकतंत्र की हत्या की गयी और जाति प्रमाण पत्र में बार-बार स्पष्ट सांठगांठ के बाद अब राज्यसभा चुनावों के लिये हुये मतदान से जोगी-रमन की सांठगांठ फिर से उजागर हुयी है। कांग्रेस के 36 विधायकों में सभी 36 ने कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार लेखराम साहू के पक्ष में मतदान किया है। भाजपा को वोट बढ़ने या अपनी ही बी-टीम के वोट मिलने के लिये भले ही रमन सिंह अपने ही मुंह से अपनी प्रशंसा करते रहें, हकीकत ये है कि राज्यसभा चुनावों में छत्तीसगढ़ में भाजपा पूरी तरह से विभाजित और खंड-खंड नजर आयी है।

कांग्रेस पार्टी ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल महोदय को संसदीय सचिवों की अर्हता के मामलों को लेकर ज्ञापन दिया था। कांग्रेस के 36 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ प्रभारी पी.एल. पुनिया के नेतृत्व में भारत निर्वाचन आयोग से मिलकर दो बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज करायी। एक 11 विधायक संसदीय सचिव है और 7 ऐसे मंत्री है जो लाभ के पदों पर है। ऐसे कुल 18 सदस्य है जो लाभ के पद पर है। जिस प्रकार से श्रीमती जया बच्चन मामले में फैसला आया था और उनकी सदस्यता रद्द की गयी थी। ठीक उसी प्रकार दिल्ली में 21 सदस्यों की सदस्यता समाप्त कर दी गयी थी। लाभ के पद के मामले में श्रीमती सोनिया गांधी जी ने संसद की सदस्यता से इस्तीफा दिया था और पुनः चुनाव लड़ा था। ये जो लाभ के पद पर है उनके नाम मतदाता सूची से हटाया जाना चाहिये। संवैधानिक पद पर बैठे हुये लोगों ने अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया। नहीं तो 51 में से 18 सदस्यों की संख्या कम होती और भाजपा को मिलते सिर्फ 33 वोट और जीत हमारी होती। नैतिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की हार हो चुकी है। 

 

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