जहां ताकत वहां विजय, 25 को लेंगे पद की शपथ

०० जिला कांग्रेस ग्रामीण के अध्यक्ष का शपथ ग्रहण कार्यक्रम रविवार 25 मार्च को

बिलासपुर। 25 मार्च रविवार को जिला कांग्रेस ग्रामीण के अध्यक्ष का शपथ ग्रहण कार्यक्रम रखा गया है। जिसमें तीन बड़े नेता भुपेश बघेल, टीएस सिंहदेव एवं चरणदास महंत उपस्थित रहेंगे। विजय केशरवानी पिछले कुछ साल से राजनीति कम क्रिकेट प्रबंधन ज्यादा कर रहे थे। दिल्ली से चरणदास महंत को प्रदेश में एहमियत मिलने के बाद जिला ग्रामीण कांग्रेस की कमान केशरवानी को मिली। चुनाव वाले वर्ष में वे कितने सफल होंगे इससे उनका राजनैतिक भविष्य तय होगा।

केशरवानी को कांग्रेस में जो लोग जानते है उनकी बातों पर विश्वास करें तो एक ही सार निकलता है कि केशरवानी जहां ताकत होती है वहीं होते है। पार्टी से ज्यादा उन्हें व्यक्ति पसंद है। भारतीय राष्ट्रीय कंाग्रेस में उन्होंने छात्र राजनीति से कदम रखा और डीपी विप्र, सीएमडी की राजनीति की यह वह वक्त था जब चरणदास महंत मध्यप्रदेश सरकार में गृहराज्य मंत्री हुआ करते थे। तब विजय केशरवानी महंत गुट में थे। जबकि जिले में बीआर यादव का दबदबा था। 2001 में राज्य बनने के बाद विजय की विश्वसनियता जोगी की तरफ हो गई और उन्होनंे छोटे जोगी को ज्वाईन किया। किन्तु यह मंडली 2003 में संकट काल में चल दी। जोगी हत्या का मुकदमा झेलते हुए जेल चले गए। ऐसे संकट में कुशल राजनेता की तरह विजय ने दूरी बनाना ही उचित समझा। चरणदास मंहत सांसद थे तो एक बार फिर जहां ताकत वहां विजय। यूपीए के दूसरे कार्यकाल में महंत को कृषि राज्य मंत्री बनने का अवसर मिला। तब केशरवानी केन्द्र स्तर पर महंत के नज़दिक रहे पर राज्य स्तर में उन्होंने क्रिकेट को फुल टाइम दिया और राज्य में क्रिकेट के मैनेजर भाटिया को खूब मैनेज किया। जिसका परिणाम यह हुआ कि जिले में क्रिकेट की पुरी गतिविधियां केशरवानी के हाथ आ गई। भला हो देश की सर्वोच्च अदालत का जिसने क्रिकेट में खिलाड़ियों के अतिरिक्त अन्य का प्रवेश बंद करा दिया। तब केशरवानी की दुकान जो सब दुकानों को मैनेज कराती थी बंद हो गई। परिणाम यह हुआ की उन्हें दुबारा फुल टाईम राजनीति आना पड़ा। जिले की राजनीति में महंत का तिसरी बार प्रवेश तब हुआ जब उन्हें दिल्ली ने चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बना दिया। इसे महंत ने अपने संभाग में वरचस्व बनाने के लिए उपयोग किया। बिलासपुर उनके पुराने प्रभाव क्षेत्र में है। निवास भले ही जांजगीर जिला हो उन्होंने अपनी राजनीति कोरबा एवं बिलासपुर में की। यहां उनके पारिवारिक तथा व्यवसायक रिशतों की कमी नही है। केशरवानी शहरी युवाओ को भले ही भाते हो किन्तु उन्हें ग्रामीण कार्यकर्ताओं के बीच उन्हीं के तौर तरीकों को सीखना होगा। अन्यथा चुनाव के वक्त कोई कार्यकर्ता क्रिकेट के आकर्षण से पार्टी के लिए फिल्डींग नही करेगा।

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