मंच पर उचित सम्मान न मिलने से नाराज हुये जनप्रतिनिधि

00 अधिकारियों के लिए था ठण्डा बोतल बंद पानी और जनता का कण्ठ रहा सूखा

मस्तूरी| एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री राज्य में चौथी पारी के लिए मेहनत कर रहे हैं वहीं जनपद पंचायत मस्तूरी के अधिकारी पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों का खुला अपमान कर रहें हैं, पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिनिधयों से पैसा एकत्र कर लोक सुराज का कार्यक्रम आयोजित करने की भी खबर है। मस्तूरी क्षेत्र में गौण खनिज की राराशि का सबसे अधिक कलेक्षन होता है किन्तु जब कभी भी कोई सार्वजनिक कार्यक्रम होता है तब त्रिस्तरीय पंचायत के सामान्य सदस्यों को उचित सम्मान नहीं मिलता अपने साथ होने वाले इस भेदभाव से जनप्रतिनिधि नाराज हैं।जिसका खामियाजा अधिकारी को नहीं सत्ताधारी दल को उठाना पड़ेगा।

मस्तूरी क्षेत्र के जयरामनगर में 20 मार्च को लोक सुराज के अंतर्गत एक जनसमस्या निवारण षिविर का आयोजन किया गया था, कार्यक्रम स्थल खैरा एवं जयरामनगर के बीच स्थित एक क्रिकेट मैदान था जनप्रतिनिधियों ने पहले गाॅव का दौरा किया जनता से उनकी समस्याएॅ जानी और बाद में कार्यक्रम स्थल पहुॅचे, मंच पर मात्र 5 कुर्सियाॅ थी जिन पर एडिशनल कलेक्टर बिलासपुर जनपद सीईओ, जपनद अध्यक्ष और बिलासपुर से पहुॅचे जिला पंचायत अध्यक्ष ही बैठ सकते थे ऐसे में जपनद के उपाध्यक्ष, सभापति तथा गाॅव के सरपंचो के लिए कोई सम्मानजनक व्यवस्था नहीं थी जिससे कार्यक्रम में पहुॅचे जनप्रतिनिधियों को नाराजगी हुई और उन्होंने मंच के नीचे आम जनता के साथ बैठना पसंद किया किन्तु वहाॅ भी कुर्सियों का अभाव था जिसे देखकर उन्हें अपनी भावनाएॅ खुले षब्दों में व्यक्त करनी पड़ी , प्रतिनिधियों की नाराजगी देखकर एडिशनल कलेक्टर ने उन्हें मंच पर ही बैठने का निवेदन किया तब जनप्रतिनिधियों का गुस्सा मस्तूरी सीईओ पर निकला उन्होने कहा कि क्षेत्र में जितने भी सीईओ आ रहें हैं उन्होने जनपद को मजाक बना दिया है उन्होने कहा कि इसके पूर्व भी बैठको में प्रतिनिधियों का अपमान किया जाता रहा है, एक दो बार मैडम को समझाने की कोषिष हुई है किन्तु अधिकारी अपना व्यवहार बदलने को तैयार नहीं है। मस्तूरी में इसके पूर्व भी मंत्रियो के दौरा कार्यक्रम के नाम पर लम्बी उगाही हुई है सब जानते हैं कि वर्श 2017 की मार्च-अपै्रल माह में यह हुआ था जिसके बाद चंदे का उचित वितरण न होने पर सरपंच-सचिव एवं पूर्व सीईओ के बीच कई दिन तक विवाद रहा जिसके कारण ही मस्तूरी जनपद में वृध्दावस्था पेंशन घोटाला हुआ था और आम जनता को भारी तकलीफ उठानी पड़ी थी, तब भी ग्राम सुराज के कार्यक्रमों की आड़ में टेण्ट हाउस के फर्जी बिल पास कराये गये।

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