शिवतराई प्री मैटिक आदिवासी छात्रावास अधीक्षक की मनमानी से छात्र परेशान

०० छात्रावास अधीक्षक करते है बिलासपुर स्थित अपने निवास से छात्रावास का संचालन

०० स्थानीय निवासी व जनप्रतिनिधि द्वारा छात्रावास अधीक्षक की शिकायत के बाद नहीं हो रही कार्यवाही  

करगीरोड कोटा| कोटा विकासखण्ड के अंर्तगत ग्राम पंचायत शिवतराई में प्री मैटिक आदिवासी छात्रावास यहा के अधीक्षक की मनमानी चलती है जिसके कारण यहां रहने वाले आदिवासी छात्रो को काफी परेशानी सामना करना पड़ता है जबकि बिलासपुर जिला मुख्यालय की शिवतराई से महज 45 किमी. दूरी में स्थित है इसके बाद भी यहा के अधिक्षक एक सप्ताह में एक दिन या बीच में कभी कभार यहां आते है और शिवतराई प्री मैटिक आदिवासी छात्रावास के बिलासपुर अपने से ही यहां का संचालन करते है ऐसे में जिम्मेदार छात्रावास अधीक्षक की लापरवाही सामने आते है शिवतराई छात्रावास में जिले में आलाअधिकारी समय समय पर निरिक्षण और बच्चो का खान पान का ध्यान नही देता इसकी देखभाल कोई करने वाले नहीं है जिला सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग बिलासपुर अधिकारी को स्थानीय व्यक्ति व जनप्रतिनिधि द्वारा छात्रावास अधीक्षक का मनमानी का शिकायत किया जाता है इसके बाद भी यहां के अधीक्षक पर कोई ठोस कार्यवाही अपने कार्य में लापरवाही बरतने के कारण कार्यवाही नही होता शायद इसी कारण छात्रावास अधिक्षक मनमानी ढंग से छात्रावास में बिना रहे अपने घर से संचालन करता है|

उपस्थिति छात्रावास के बच्चो को सविदा कर्मचारी रसोईया के भरोसे रोज छोड़ के चले जाते है ऐसा में छत्तीसगढ़ षासन महत्वपूर्ण योजना जाये या यहां छात्रावास के बच्चो के खाने पीने पढ़ने बिल्डींग बिजली की सुविधा भी सही तरीके से नही मिल पाता है सरकार लाखो रूपये खर्च कर अच्छे से अच्छे सुविधा प्रदान करें ताकि आदिवासी बच्चो को अधिक से अधिक लाभ मिले शिवतराई प्री मैट्रिक आदिवासी छात्रावास में बच्चों सोने के लिये दी जाने वाली रजाई गद्दा भी फटे पुराने दिये गये है जबकि शासन स्तर में हर साल इसका नया बजट पास होता है लेकिन इसका लाभ सुदुर आदिवासी अंचल के छात्रावास के बच्चों को नही मिल पाता और यहाॅं के बच्चो को प्रतिमाह आवश्यकता अनुसार छात्रावास में बच्चों को दी जाने वाली जैसे साबुन, तेल, में महिनो में एक बार दिया जाता है, जबकि बच्चो को छात्रावास में उनके आवश्यकतानुसार सामाग्री का वितरण करना है लेकिन यह वितरण छात्रों को ही सिर्फ कागजो के तक सिमित कर रह जाता है छात्रावास में बच्चो का हाल जानने कोई नही है जब छात्रावास के छात्र से प्रतिदिन खाने-पीने की सामाग्री के बारे में पूछा गया तो उपस्थित छात्रों में बताया की यहाॅं रोज आलू और सोयाबीन बड़ी बनता है और एक सप्ताह में शनिवार और सोमवार को नाश्ता मिलता जबकि छात्रावास के बच्चों बजट के अनुसार भोजन नही मिलता सब कुछ छात्रावास अधीक्षक की मनमानी के कारण यहाॅं बच्चो का पढ़ाई के सिवाये कुछ भी सुविधा नही मिलता लेकिन शिवतराई छात्रावास अधीक्षक अपने मनमर्जी के चलते है। शिवतराई छात्रावास की बिल्डिंग र्जजर हो चुकी है इसका रिपेरिंग की समय-समय पर नही कराया गया तो कभी भी यहाॅं के रहने वाले बच्चो पर पड़ सकते है।

छात्रावास में बने शौचालय में दरवाजा आधा सड़कर अलग हो चुका है कई काफी जर्जर हो चुका है, लेकिन समय पर रिपेरिंग नही होने के कारण यहाॅं बने शौचालय का उपयोग यहाॅं छात्र नहीं करते यहाॅं स्वच्छ भारत मिशन अभियान का मजाक उठाया जा रहा है।छात्रावास में कई कमरो में पंखा, बिजली बंद होने के कारण यहा रहने वाले बच्चो को पढ़ाई लिखाई में काफी परेशानी होता है।

मुझे आपके माध्यम से छात्रावास में अनियमितताओं का पता चल रहा है,इसकी जांच कराई जायेगी

अविनाश श्रीवास, सहायक आयुक्त, अदिवासी विकास बिलासपुर

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