रतनपुर लोरमी मार्ग की समय सीमा खत्म होने के कगार पर, करोड़ों की एडीबी सड़क बन पाई महज 45 प्रतिशत

०० गुणवत्ता को दरकिनार कर मुरूम की जगह डाली जा रही है पीली मिट्टी

संजय बंजारे

करगी रोड कोटा|  रतनपुर लोरमी मार्ग में एडीबी द्वारा 106 करोड़ में की निर्माणधीन सड़क जो कि सालो बीत गए लेकिन अभी तक निर्माणकार्य नहीं हुआ है जगह जगह दरारे आने के बाद भी अधिकारी मौन साधे हुए है  कोटा से लोरमी तक न ही पानी का छिड़काव नही किये जा रहे वहाँ पर मौजूद इंजीनियर व कर्मचारी लोग बोलते है कि सुबह शाम पानी का छिड़काव किया जाता है ऐसा बोलते है लेकिन सही बात तय है कि उस कोटा लोरमी मार्ग पर पानी का छिड़काव ही नही करते है  इससे गुजरने वाले लोग व धूल से परेशान दिखते नजर आते है रोड क़ीनरे लगे घरो में तो सिर्फ धूल ही नजर आते है, आखिर कब तक लोगो को धूल खाना होगा?

एशियन डेवलपमेंट बैंक (ए.डी.बी.) द्वारा निर्माणाधीन रतनपुर से लोरमी सड़क की मियाद अप्रैल 2018 में खत्म होने को है लेकिन बमुश्किल अभी तक 40 से 45% ही सड़क निर्माण का कार्य हो पाया है कुछ शासकीय स्वीकृति का हवाला दिया भी गया तो 6 माह की मियाद और मिलने की उम्मीद की जा सकती है लेकिन कोई उम्मीद नहीं की इस मियाद में भी निर्माण सफल हो पाएगा गुणवत्ता की पूर्ण अनदेखी की जा रही है जहां मुरूम डालना चाहिए वहां सरेआम पीली मिट्टी डाली जा रही है पेटी  कांट्रेक्टरों को भुगतान नहीं किया जा रहा है जिससे मजदूरों को भुगतान नहीं हो पा रहा है मजदूर,पेटी काम छोड़ छोड़ कर बैठ रहे हैं कुछ पेटी तो भाग रहे हैं शिकायतों के अनुसार इस कंपनी का भुगतान काफी लचर हो गया है पैसा दबाकर काम का दबाव बनाया जा रहा है धूल का अंबार सड़क किनारे के संस्थान घर एवं यात्री लगातार साल भर से झेल रहे हैं जिसको अखबारों के माध्यम से अनेक बार ध्यानाकर्षण किया गया फिर भी पानी नहीं डाला जा रहा था तो आज भी नहीं डाला जा रहा है तय दूरी पर लगभग 90 पुल पुलिया का निर्माण होना था एक माह बाद तय समय सीमा समाप्त हो जाएगी फिर भी मुश्किल से 45 पुल पुलिया का ही निर्माण हो पाया है एक माह में क्या वह कंप्लीट हो पाएगा ठेकेदार का पूरा ध्यान पी.क्यू.सी.(डामर सड़क) मैं बना रहता है क्योंकि इसके निर्माण जल्द हो जाता है और बिल भी अन्य कार्यों की अपेक्षाकृत लंबा बनता है वही पुल-पुलिया नाली अधिक काम में अपेक्षाकृत समय ज्यादा लगता है अब बिल भी छोटा बनता है पीड़ितों द्वारा बताया गया कि 4 से 6 माह बीच ठेकेदार का चेहरा बदलने से आर्थिक परेशानी ज्यादा आ रही है नहीं तो पहले ठीक चल रहा था भुगतान भी यथा समय हो रहा था अब  तो ट्रांसपोर्ट वाले भी रोना रो रहे हैं मान लिया जाए कि मियाद अवधि  6 माह बढ़ जाती है तो क्या बरसात में सड़क निर्माण डामर काम संभव हो पाएगा वही कोटा नगर की नाली के लिए अभी तक शासन द्वारा स्वीकृति प्राप्त नहीं हो पाई है और अप्रैल 2018 में मियाद खत्म।

प्रभारी एस एस माझी से बात करने पर उन्होंने बताया बड़ा ऑपरेशन हुआ है मैं डेढ़ से दो माह की छुट्टी पर हूं, पी श्री बघेल जो कि चार्ज में है से बात करने पर उन्होंने बताया कि बीच में उस सड़क निरीक्षण में गए थे प्रोग्रेस कमजोर है ठेकेदार का कहना है की मियाद बढ़ाकर जून तक काम खत्म कर देंगे

 

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