सामाजिक प्रताड़ना का शिकार कुछ परिवार – प्रशासन सुस्त

 

के. नागे (बालोद) जिला मुख्यालय से मात्र 4 किलोमीटर की दूरी में बसे ग्राम मेडकी ग्राम पंचायत ओरमा का आश्रित ग्राम है जहां पर कुछ दबंग अपने आप को उच्च वर्ग का समझते हुए गांव में दबदबा कायम कर उल जुलूल हरकत करते रहते हैं इसी क्रम में कुछ दिन पहले कुछ लोगों को छोड़ दिया गया है । जिसे सामान्य भाषा में सामाजिक ग्रामीण बहिष्कृत अर्थात सभी कार्यो में बंद कहा जाता है गांव में इतना खौफ बना के रखा है की इन लोग के कहर से ग्रामीण खौफजदा हैं क्योंकि ग्रामीण आर्थिक रुप से कमजोर होने की वजह से अर्थ दंड से डर जाते हैं और इसी कमजोरी को ऐसे लोग हथियार बनाकर इस्तेमाल करते हैं। जिससे ग्रामीण अत्याचार के खिलाफ आवाज नहीं उठाते चुप हो जाते हैं। अगर किसी भी गांव में दंड का प्रधान रखेगा तो निश्चित ही लोग जो गरीब हैं डर जाएंगे यह बात दबंग अच्छे से जानता है। गांव में एक तरह से आतंक मचाते हुए 4 लोगों को ग्राम से बहिष्कृत कर रखा है इनलोगों से बात करने पर भी अर्थदंड का प्रावधान रख दिया है।
आज हमारा समाज जात पात ऊंच-नीच गरीब अमीर इन सबसे ऊपर उठती हुए विकास की ओर बढ़ रहा है ऐसे में इन दबंगों की दबंगाई शायद समाज को आघात कर सकता है अगर समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आगे चलकर विकराल रूप ले सकता है इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां ग्राम पंचायत में जितने भी काम आते हैं उसे अप्रत्यक्ष रूप से इन्हीं के द्वारा किया जाता है और तो और वहां अपने आप से बड़ा किसी को नहीं समझता है। बच्चों के लिए खनिज न्यास से 10 लाख खर्च कर बाल उद्यान बनाया गया है जिनका लोकार्पण अभी तीन चार महीने पहले हुआ है जगह जगह दरारें पड़ चुकी है दरारें ही गुणवत्ता की कहानी कह रही है परंतु प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है सोचने वाली बात है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है क्या वह दीवाल किसी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है जहां छोटे-छोटे मासूम खेलने आएंगे इस संबंध में सरपंच सचिव को पूछने पर अनभिज्ञता जताते हैं ।
इससे संदेह होता है कि पूरा काम ही वहां पर फर्जी तरीके से हुआ है अगर बारीकी से जांच किया जाए तो निश्चित ही बहुत बड़ा फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है कुछ सूत्रों से पता चला है उसमें जो मटेरियल लगा है उसे जिस दुकान से खरीदा गया है वह दुकान ग्राम मेड़की का है जबकि मेड़की में वैसे नाम का दुकान है ही नही और जो बिल लगाया गया है उसमे टीन नंबर भी नहीं है इससे स्पष्ट होता है गांव के कुछ लोग रिंग बनाकर भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं ।

क्या जिला प्रशासन को ध्यान नहीं है या फिर ध्यान देना नहीं चाहते है एक ओर देश का प्रधानमंत्री कहता है कि हम भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ देंगे दूसरी ओर मुख्यमंत्री कहता है भ्रष्टाचार को 0% मे लाएंगे क्या यही है वह दिन भ्रष्टाचारीयों की आतंक बढ़ रहा है इसे क्या समझा जाए यह समझ समझ का फेर है। इस बात से भी समझा जा सकता है कि खुद उन्होंने पुलिस स्टेशन जाकर आवेदन दिया है कि गांव के कुछ लोग धार्मिक भावना भड़काने लगे है गांव में जिस तरह से कुछ लोगो द्वारा समाज के नाम पर समनांतर सरकार चला रहा है येसे लोगो पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है ताकि भविष्य में किसी भी तरह से किसी का स्वतंत्रता का हनन ना हो।

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