5 लाख से अधिक बच्चों का कुपोषण की चपेट में होना सरकार की नाकामियों को दर्शाता है: मो. असलम

०० कुपोषण को लेकर राज्य सरकार गंभीर नहीं: कांग्रेस

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मो. असलम ने कहा है कि सरकार लाख दावा करे कि कुपोषण दूर करने लगातार प्रयास हो रहे है और इसके परिणाम भी सामने आये है फलस्वरूप कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आई है पर पर्याप्त एवं भारी भरकम बजट के बाद भी धरातल में कोई रद्दोबदल न होना तथा 5 लाख से अधिक बच्चों का कुपोषण की चपेट में होना आश्चर्यजनक एवं चिंता का विषय है। सरकार कई योजनाएं संचालित कर 45 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केन्द्रों की मदद से कुपोषण के खिलाफ जंग लडने का हवाला देती है पर राजनांदगांव जिले में तथा मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में ही प्रदेश के सबसे अधिक 39 हजार बच्चों का कुपोषित होना इस बात का प्रमाण है कि शासन कुपोषण को लेकर कितनी गंभीर है। हालत यह है कि जागरूक, शिक्षित एवं सुविधा संपन्न जिले समझे जाने वाले बिलासपुर, दुर्ग, रायपुर जैसे इलाकों में कुपोषित नौनिहालों की संख्या कम नहीं है फिर गरियाबंद, कवर्धा, बस्तर, सरगुजा के दूरस्थ पिछड़े आदिवासी एवं सुविधाविहीन अंचलों में इस योजना के क्रिन्यान्वयन का सहज आंकलन किया जा सकता है। कुपोषण के मामलों में बिलासपुर जिले में 34 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण से ग्रसित हैं। ऐसे हालात में राज्य सरकार का ताजा दावा कि नवाजनत योजना के पाचवें चरण के पश्चात लगभग 23.43 प्रतिशत बच्चे और महिलाएं कुपोषण से मुक्त हुए हैं, संदेहास्पद है।

कांग्रेस प्रवक्ता मो. असलम ने कहा है कि भवनविहीन, शौचालयविहीन विद्युत विहीन आंगनबाड़ी केंद्रों में अवश्य आंशिक सुधार हुआ है पर कुपोषण में सुधार को लेकर सरकार का दावा खोखला साबित हो रहा है। जिलों में स्वास्थ्य एवं पोषण केंद्र निष्क्रिय हैं। नवाजनत, महतारी जतन, मुख्यमंत्री अमृत योजना पूरी तरह से विफल है और भ्रष्टाचार एवं कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गई है। लगभग डेढ़ हजार करोड़ के स्वीकृत बजट एवं केंद्रीय सहायता के बाद भी वास्तविक हकदारों को इसका लाभ न मिलना एवं वंचित रहना सरकार की नाकामी को दर्शाता है।

 

 

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