जवानों की शहादत पर क्रिकेट का जश्न रहा भारी : कांग्रेस

०० सरकार की  असंवेदनशीलता की बलि चढ़ रहे फोर्स के जवान

रायपु। एक तरफ प्रदेश के जानो माल की सुरक्षा मे तैनात जवान नक्सलियों के लैंडमाइंस ब्लास्ट मे अपनी जान गंवा रहे थे और दूसरी तरफ राज्य की सरकार सार्थक छत्तीसगढ़ के नाम पर क्रिकेट के रंगारंग आयोजन में मस्त रही। प्रदेश सरकार की नजर मे जवानों के शहादत का मोल क्या है, यह केवल इतने से मालूम हो जाता है कि प्रदेश में दस जवानों के मौत का मातम पसरने के बावजूद क्रिकेट का सरकारी जश्न बदस्तूर जारी रहा।

कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता घनश्याम राजू तिवारी ने जारी कर सरकार की असंवेदनशीलता पर अफसोस जताया है। पार्टी की ओर से जारी बयान मे 13 मार्च को नक्सल अटैक मे प्राण गंवाने वाले अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये तिवारी ने कहा कि जवानों की मौत से जहां दिल्ली का सिंहासन तक हिल गया और पीएम की भी शोक श्रद्धांजलि की सूचना प्रसारित होने लगी, ऐसे मे प्रदेश की सरकार राजधानी में अंग्रेजी साटाइल के क्रिकेट प्रतियोगिता में नाच-गाने की महफिल सजाये हुये थी। जवानों की मौत पर भी सार्थक छत्तीसगढ़20-20 क्रिकेट प्रतियोगिता का जश्न रोकना तक सरकार ने जरुरी नहीं  समझा। सरकार लगातार जवानों के शहादत की अनदेखी करती आ रही है। कभी उनके शव कचरा गाड़ी उठाकर लाती है तो कभी डेंगू-मलेरिया का दंश उनकी जान लेता है। कभी पेट की आग बुझाने के फेर में जवान, नक्सली बर्बरता का निशाना बनते हैं, तो कभी सरकारी उपेक्षा से आक्रोशित होकर आत्मघाती कदम उठाने को बेबस हैं। सरकार जवानों की शहादत पर केवल शोक व्यक्त कर मौन साध लेती है और सूबे के मुखिया अपने इन्हीं कर्मों से देश में सबसे ज्यादा शोक संवेदना व्यक्त करने वाले सीएम के तमगे से नवाजे जा चुके हैं।सुरक्षा के नाम पर पूरे प्रदेश को नक्सल खौफ में धकेल देने वाली सरकार सुरक्षा मे तैनात जवानों के साथ भी दोहरा रुख अख्तियार किये हुये है। इसी वजह से सरकार के प्रति जवानों का भरोसा भी कमजोर हो गया है। रोजगार के नाम पर दिगर प्रांतों के गरीब युवाओं की बलि लेना और स्थानीय आदिवासियों को नक्सली कहर का निशाना बनाकर सरकार दोनो छोर पर हो रहे नरसंहार को रोकने मे पूर्णतः अक्षम साबित हुई है। केंद्र में भाजपा की सरकार होने के बावजूद प्रदेश सरकार नक्सल टैरर के विरुद्ध सुरक्षा साधनों में कोई ईजाफा नहीं कर सकी है। अब तक यूपीए शासन के दौर में मंजूर सुरक्षा बलों के बूते धुर नक्सली क्षेत्र मे दोपहिया पर घूमकर मुख्यमंत्री प्रदेश के सुरक्षित होने का खोखला आभाष करा रहे हैं। शहीदों के रक्तरंजित शवों के बीच सरकार का गुलाबी जश्न पूर्णतया उसकी असंवेदनशीलता को प्रदर्शित करता है साथ ही यह शहादत का अपमान भी है। ऐसी सरकार को नैतिक रुप से सत्ता में बने रहने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है।

 

 

 

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