नक्सली हमले पर कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल व नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री पर किया तीखा हमला

०० माओवाद से निपटने में मुख्यमंत्री रमन सिंह विफल : भूपेश

०० रमन सरकार की गलत नीतियों के कारण आंतरिक सुरक्षा का खतरा लगातार बढ़ रहा : सिंहदेव

०० नक्सली हमला में शहीद हुये जवानों को कांग्रेस ने दी श्रद्धांजलि

रायपुर| सुकमा जिले में हुये नक्सली हमला में शहीद हुये जवानों को कांग्रेस ने श्रद्धांजलि दी है। शहीद परिवारजनों के दुख में सहभागिता व्यक्त करते हुये कहा है कि कांग्रेस उनके दुख को बखूबी समझती है, उनके दर्द को महसूस करती है क्योंकि माओवादी हमले में कांग्रेस ने भी अपनों को खोया है। माओवाद से निपटने में मुख्यमंत्री रमन सिंह के विफल होने का आरोप लगाते हुये प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और कांग्रेस विधायक दल के नेता टी.एस. सिंहदेव ने कहा है कि रमन सरकार की गलत नीतियों के कारण आंतरिक सुरक्षा के खतरा लगातार बढ़ रहा है। कांग्रेस ने बढ़ते माओवादी हिंसा के लिये नेतृत्व में इच्छाशक्ति के अभाव, सूचना तंत्र की विफलता और सुरक्षा बलो के पास उचित संसाधनों का अभाव को प्रमुख कारण बताया है। सीआरपीएफ ने 2005 से अब तक 1928 जवान हिंसा में मारे गये हैं जिनमें आधे से अधिक छत्तीसगढ़ में मारे गये है।

कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और कांग्रेस विधायक दल के नेता टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि देश में 60 जिले नक्सल प्रभावित है, जिनमें 14 जिले छत्तीसगढ़ के है लेकिन माओवादी हिंसा सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़ में होती है। 2003 में माओवादी दक्षिण बस्तर के सीमावर्ती इलाकों तक सीमित था। वह भाजपा के 14 वर्षो के शासनकाल के बाद 14 जिलों तक कैसे बढ़ा? रमन सिंह सरकार के 14 वर्षो में छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा प्रभावित इलाका 3 ब्लाकों से बढ़कर देश में सबसे ज्यादा माओवादी हिंसा से प्रभावित इलाका कैसे बन गया है? एसपी वी.के. चैबे के मारे जाने की घटना की जांच तक नहीं होती और जो अधिकारी पूरी घटना में कहीं शामिल नहीं होता है, उस अधिकारी को वीरता पुरस्कार दिया जाता है। ताड़मेटला में 76 लोग मारे गये, लेकिन सही जांच नहीं होती। जीरम में शामिल लोगों की शादी तो भाजपा सरकार कराती है लेकिन जीरम के षड़यंत्र की जांच नहीं कराती। दिल्ली और अमेरिका जाकर मुख्यमंत्री रमन सिंह ये दावा जरूर करते है कि माओवादी बीते दिनों की बात है। लेकिन बड़ी घटनाओं की भी जांच नहीं कराते। दरअसल छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार में नक्सलवाद खत्म नहीं हो रहा है, बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ के एक बड़े इलाके में पुलिस जा ही नहीं पाती है। 2018 में अब तक चार हमले हो चुके है, 17 जवान मारे जा चुके है। समय आ गया है कि माओवाद से लड़ने के लिये बनाई गयी ज्वाइंट कमांड के प्रमुख रमन सिंह अपनी नैतिक जिम्मेदारी को स्वीकार करें। 2013 में डाॅ. रमन सिंह विकास यात्रा में निकलते है और नक्सली क्षेत्रों से यात्रा कर सुरक्षित वापस लौट आते है वहीं कांग्रेस के परिवर्तन यात्रा में नक्सली घात लगाकर हमला करते है जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की हत्या होती है। सुकमा जिले में 11 मार्च को मुख्यमंत्री लोकसुराज अभियान कार्यक्रम के दौरान मोटर सायकल में निकलते है, सुरक्षित वापस लौट आते है उनके वापस लौटने के ठीक तीन दिन बाद एंटीलैंडमाइन व्हिकल में निकले सीआरपीएफ जवानों पर नक्सली हमला करते है जिसमें 9 जवान शहीद हो जाते है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और कांग्रेस विधायक दल के नेता टी.एस. सिंहदेव ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुये कहा कि राज्य सरकार की रूचि माओवाद से निपटने में कम, माओवादियों से लड़ने के नाम पर मिलने वाली भारी भरकम राशि पर ज्यादा है। राज्य का खूफिया तंत्र बार-बार नाकाम होता है। केन्द्रीय सुरक्षा बल एवं राज्य पुलिस के बीच तालमेल की भारी कमी है, जिसका खामियाजा हमारे जवानों को भुगतना पड़ रहा है।

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